शनिवार का महत्व और पंचांग की गणना
हिंदू धर्म में किसी भी महत्वपूर्ण कार्य या यात्रा से पहले पंचांग देखने की परंपरा है। कल यानी 20 जून 2026, शनिवार का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष है। इस दिन ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि दोपहर 3:46 बजे तक रहेगी और उसके बाद सप्तमी तिथि शुरू होगी। शनिदेव को समर्पित इस दिन ग्रहों की स्थिति के अनुसार कुछ खास सावधानियां बरतनी चाहिए ताकि किसी भी तरह के नकारात्मक प्रभाव से बचा जा सके।
यात्रा के लिए दिशाशूल
ज्योतिष और वास्तु के जानकारों के अनुसार, शनिवार को पूर्व दिशा और उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। इन दिशाओं में दिशाशूल होने के कारण यात्रा में बाधाएं आ सकती हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, दिशाशूल वाली दिशा में यात्रा करने से व्यक्ति को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है:
- कार्यों में असफलता मिलना।
- अचानक आर्थिक नुकसान होना।
- शारीरिक कष्ट और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं।
- यात्रा के दौरान दुर्घटना होने का डर।
आहार संबंधी सावधानियां
शनिवार के दिन खान-पान को लेकर भी कुछ नियम बताए गए हैं। मान्यता है कि इन चीजों का सेवन करने से शनिदोष का प्रभाव बढ़ सकता है:
- दूध और दही: शनिवार को इनका सेवन करने से बचना चाहिए। यदि दूध पीना अनिवार्य हो, तो उसमें थोड़ी हल्दी या गुड़ मिलाकर ही उसका सेवन करें।
- अन्य वर्जित खाद्य पदार्थ: हल्दी मिले दूध के अलावा बैंगन, लाल मिर्च और आम का अचार खाने से भी परहेज करना चाहिए।
मान्यता है कि शनिवार को इन चीजों से परहेज करने से मानसिक और शारीरिक शांति बनी रहती है।
शुभ समय और अन्य जानकारी
कल यानी शनिवार को सूर्योदय सुबह 5:27 बजे और सूर्यास्त शाम 19:17 बजे होगा। वहीं चंद्रोदय सुबह 10:49 बजे और चन्द्रास्त रात 23:39 बजे होगा। यदि आप कोई महत्वपूर्ण कार्य शुरू करना चाहते हैं, तो दोपहर 12:09 से 12:57 बजे तक का अभिजीत मुहूर्त काफी शुभ माना जाता है। इसके विपरीत, सुबह 08:59 से 10:41 बजे तक राहुकाल, सुबह 07:12 से 08:55 बजे तक गुलिक काल और सुबह 06:52 से 08:37 बजे तक यमघण्टकाल रहेगा, जिसमें नए कार्यों की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है।
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