ट्रेन 18 से वंदे भारत तक का सफर
वंदे भारत एक्सप्रेस आज भारत की सबसे आधुनिक और लोकप्रिय सेमी-हाई-स्पीड ट्रेनों में से एक बन चुकी है। अपनी शानदार रफ्तार और आधुनिक सुविधाओं के कारण यह देश के कई बड़े शहरों को आपस में जोड़ती है। हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि इस ट्रेन का मूल नाम ट्रेन 18 था।
क्यों पड़ा था ट्रेन 18 नाम?
इस ट्रेन का नाम ट्रेन 18 इसलिए रखा गया था क्योंकि इसे 2018 में डिज़ाइन और विकसित किया गया था। इसे चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) के इंजीनियरों द्वारा पूरी तरह से भारत में बनाया गया था। यह भारत की पहली बिना इंजन वाली ट्रेन थी, जिसमें कोच के नीचे ही मोटर सिस्टम लगा था, जिससे इसकी गति और कार्यक्षमता में काफी सुधार हुआ।
कब और कैसे बदला गया नाम?
- जनवरी 2019 में तत्कालीन रेल मंत्री पीयूष गोयल ने आधिकारिक तौर पर इसका नाम बदलकर वंदे भारत एक्सप्रेस रखने की घोषणा की।
- माना जाता है कि वंदे भारत नाम वंदे मातरम से प्रेरित है, जो देशभक्ति का प्रतीक है।
- फरवरी 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली और वाराणसी के बीच पहली वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस ट्रेन की खासियतें
मेक इन इंडिया पहल के तहत बनी यह ट्रेन भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण का एक बड़ा प्रतीक है। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- यह ट्रेन 160 km/h की टॉप स्पीड तक चलने में सक्षम है।
- इसमें ऑटोमैटिक दरवाजे, GPS आधारित सूचना प्रणाली और आरामदायक सीटें दी गई हैं।
- यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इसमें कवच जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी भी जोड़ी जा रही है।
आज वंदे भारत एक्सप्रेस का नेटवर्क तेजी से देश के कई राज्यों में फैल रहा है, जो भारतीय इंजीनियरिंग और आत्मनिर्भर भारत के विजन को मजबूती प्रदान करता है।
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