धान की अच्छी फसल प्राप्त करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले बीज का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण होता है। हालांकि, किसानों को हर साल बाजार से महंगे बीज खरीदने पड़ते हैं। इसी समस्या को हल करने के लिए, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के नगर पंचायत नहर के निवासी प्रगतिशील किसान जदूनंदन प्रसाद वर्मा ने एक बेहद आसान और कम लागत वाला तरीका बताया है। उनका दावा है कि किसान थोड़ी सी सावधानी और वैज्ञानिक विधि अपनाकर अपने घर के धान से ही बेहतरीन, रोगमुक्त और उन्नत बीज तैयार कर सकते हैं।
घर पर ही बीज तैयार करने के फायदे
किसान वर्मा के अनुसार, घर पर बीज तैयार करने से कई लाभ मिलते हैं:
- बीज की गुणवत्ता बेहतर होती है।
- अंकुरण अच्छा होता है।
- फसल में रोगों का प्रकोप कम होता है।
- उत्पादन में बढ़ोतरी देखने को मिलती है।
- महंगे बीज खरीदने का खर्च बचता है।
कमजोर बीजों को अलग करने की वैज्ञानिक विधि
जदूनंदन प्रसाद वर्मा ने बताया कि धान के बीजों को गुणवत्ता के आधार पर अलग करने के लिए यह सरल तरीका अपनाएं:
- सबसे पहले, एक प्लास्टिक की बाल्टी में पानी भर लें।
- इसमें एक आलू डालें।
- धीरे-धीरे नमक मिलाते रहें।
- जब आलू पानी में तैरने लगे, तब उस घोल में धान डाल दें।
- जो धान के दाने ऊपर तैरने लगें, उन्हें तुरंत अलग निकाल दें। ये हल्के और कमजोर बीज होते हैं।
- जो धान के दाने नीचे बैठ जाते हैं, वही गुणवत्तापूर्ण और भारी बीज माने जाते हैं। इन्हें आगे के उपचार के लिए चुनें।
बीजों की धुलाई और सुखाने का सही तरीका
चयनित गुणवत्तापूर्ण बीजों को आगे की प्रक्रिया के लिए तैयार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है:
- चयनित धान के बीज को दो से तीन बार अलग-अलग बर्तनों में साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। इससे नमक और अन्य अशुद्धियां पूरी तरह निकल जाती हैं।
- साफ किए गए बीज को सीधे तेज धूप में सुखाने के बजाय, घर के फर्श पर सूती कपड़े पर फैलाकर रखें।
- यदि पंखा उपलब्ध हो, तो उसे चालू कर दें, जिससे बीज जल्दी और समान रूप से सूख सकें।
बीज उपचार: रोगमुक्त और स्वस्थ फसल की कुंजी
बीज सूखने के बाद उन्हें उपचारित करना फसल को रोगों से बचाने के लिए आवश्यक है:
- सूखे हुए बीजों को जीवन अमृत या स्यूडोमोनास से उपचारित करें।
- इस उपचार से बीज में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और रोगजनक तत्व नष्ट हो जाते हैं।
- उपचारित बीज रोगों से सुरक्षित रहता है और उसकी अंकुरण क्षमता भी बेहतर होती है।
अधिक पैदावार और स्वस्थ फसल का दावा
जदूनंदन प्रसाद वर्मा का कहना है कि इस विधि से तैयार किए गए बीज का अंकुरण काफी अच्छा होता है और इससे उगने वाले पौधे स्वस्थ रहते हैं। फसल में रोगों का खतरा कम हो जाता है, जिसका सीधा असर खेती में बेहतर उत्पादन और अधिक पैदावार के रूप में दिखाई देता है। कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले बीज तैयार करने की यह तकनीक किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।
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