उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर तीसरे मोर्चे को लेकर सरगर्मी बढ़ गई है। पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद के बीच लखनऊ में हुई मुलाकात ने इन अटकलों को और हवा दे दी है। राजनीतिक हलकों में कहा जा रहा है कि मौर्य, चंद्रशेखर और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी को अपने तीसरे मोर्चे का हिस्सा बनाना चाहते हैं।
नए अवसरों की तलाश में मौर्य
कभी बहुजन समाज पार्टी में नंबर दो की हैसियत रखने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य इन दिनों राजनीति में नई संभावनाएं तलाशने में लगे हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने भाजपा का साथ छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थामा था। फिलहाल वे अपनी सियासी जमीन मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं। 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले मौर्य एक बार फिर नए समीकरणों में अपनी जगह बनाने में लगे हुए हैं।
इसी कड़ी में उन्होंने नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद से मुलाकात की, जिसके कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। दरअसल, चंद्रशेखर आजाद 2027 के चुनाव से पहले अपने संभावित प्रत्याशियों के इंटरव्यू ले रहे हैं और इसी दौरान मौर्य ने उनसे भेंट की।
तीसरे मोर्चे में एंट्री की कवायद
इस मुलाकात के बाद सियासी गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई कि मौर्य, चंद्रशेखर की पार्टी और असदुद्दीन ओवैसी को अपने तीसरे मोर्चे में जोड़ना चाहते हैं। चंद्रशेखर आजाद पहले ही साफ कर चुके हैं कि उनकी पार्टी किसी बड़े दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी। ऐसे में मौर्य की उनसे मुलाकात को एक नया सियासी संकेत माना जा रहा है।
स्वामी प्रसाद मौर्य का भी कहना है कि जो भी बहुजन की बात करेगा, उसे साथ लाने का प्रयास किया जाएगा। इसी आधार पर कयास लगाए जा रहे हैं कि मौर्य के तीसरे मोर्चे में चंद्रशेखर आजाद और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी की एंट्री हो सकती है।
तीन दशक का राजनीतिक सफर
स्वामी प्रसाद मौर्य करीब तीन दशक से उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्हें पडरौना सीट से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद समाजवादी पार्टी ने उन्हें एमएलसी बनाया, मगर रामचरितमानस पर उनके लगातार बयानों के चलते पार्टी के भीतर मतभेद उभरने लगे। आखिरकार 2024 में उन्होंने सपा और एमएलसी दोनों पदों से इस्तीफा दे दिया।
इसके बाद मौर्य ने अपना अलग राजनीतिक दल खड़ा किया। राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी बनाने के बाद उन्होंने 9 छोटे दलों के साथ गठबंधन कर लोक मोर्चा नाम से एक थर्ड फ्रंट तैयार किया।
वोट बैंक साधने की रणनीति
कहा जा रहा है कि मौर्य इस थर्ड फ्रंट में आजाद समाज पार्टी और AIMIM को भी शामिल कराना चाहते हैं। उनकी मंशा जनता के सामने एक तीसरा विकल्प पेश करने की है। साथ ही इसके जरिए दलित, पिछड़ा वर्ग खासकर कोइरी समाज और मुस्लिम वोट बैंक को एकजुट करने की कोशिश भी की जा रही है।
माना जा रहा है कि चंद्रशेखर आजाद के मोर्चे में आने से दलित वोट बैंक को साधना आसान होगा, वहीं AIMIM के जुड़ने से मुस्लिम मतदाताओं को भी मोर्चे से जोड़ने में मदद मिलेगी।
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