जहानाबाद में भी अब पूरे बिहार की तरह मछली पालन ने मजबूती से जड़ें जमा ली हैं। स्वाद के शौकीनों की मांग पूरी करने के साथ-साथ यह कारोबार जिले के लोगों को रोजगार और अच्छी कमाई दोनों दे रहा है। यही वजह है कि अब हर बजट वाला व्यक्ति अपनी पसंद की मछली का स्वाद ले सकता है।
गांव-शहर हर ओर दिख रहे तालाब
बिहार में मत्स्य पालन दिन-ब-दिन बढ़ रहा है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक हर तरफ तालाब ही तालाब नजर आने लगे हैं। यह कारोबार अब सिर्फ संपन्न लोगों का सहारा नहीं रहा, बल्कि गरीब तबके की आजीविका का भी बड़ा जरिया बन चुका है।
कुछ समय पहले तक बाजार में बिकने वाली मछलियां या तो दूसरे राज्यों से मंगाई जाती थीं या फिर मौसम के हिसाब से ही उपलब्ध होती थीं। लेकिन प्रदेश भर के युवाओं ने इस क्षेत्र में जिस तरह से काम किया है, उससे बाहरी राज्यों पर निर्भरता काफी घट गई है। अब हर बाजार में कई किस्म की मछलियां स्थानीय युवा खुद उत्पादन कर पहुंचा रहे हैं।
जिले में फैलता मछली पालन का दायरा
जहानाबाद जिला भी मछली पालन के मामले में पीछे नहीं है। यहां के किसान बड़े स्तर पर मछली पालन कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह मछली की लगातार बनी रहने वाली मांग है। हर बाजार में मछली की भरपूर मांग रहती है और इन बाजारों में अलग-अलग प्रकार की मछलियां मौजूद रहती हैं।
हालांकि बहुत कम लोगों को यह पता होता है कि बाजार में मौजूद मछलियों में किसका क्या रेट है, कौन सी मछली महंगी बिकती है और कौन सी सस्ती।
लोकल बाजार में मछलियों के दाम
पिछले 5 साल से मछली पालन के क्षेत्र में काम कर रहे भारथू के किसान दुर्गेश कुमार बताते हैं कि इस कारोबार का दायरा तेजी से बढ़ा है। उनके मुताबिक आज के समय में सिर्फ उनके गांव में ही 250 बीघा से ज्यादा तालाब हैं और यहां के किसान इस व्यवसाय से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।
दुर्गेश कहते हैं कि लोकल बाजार में कुछ मछलियां काफी महंगी मिलती हैं तो कुछ की कीमत बजट फ्रेंडली रहती है। बजट फ्रेंडली मछलियों में पैंगेसियस (जासर) शामिल है, जिसकी कीमत 150 से 180 रुपए प्रति किलो तक रहती है। इसी श्रेणी में रोहू भी आती है, जिसका दाम 250 रुपए प्रति किलो है।
कोई 100 रुपए किलो तो कोई 500 के पार
दुर्गेश आगे बताते हैं कि पोठही और केवई जैसी मछलियां 50 से 100 रुपए प्रति किलो तक मिल जाती हैं। वहीं देसी मांगुर, सिंघी और झींगा जैसी मछलियों की कीमत 500 रुपए प्रति किलो से अधिक होती है। ये मछलियां भी अब बाजार में आसानी से मिलने लगी हैं, क्योंकि इस कारोबार का बाजार पहले के मुकाबले काफी बढ़ चुका है।
जैसे-जैसे मछलियों का बाजार बढ़ रहा है, उसी हिसाब से अब मछली पालकों का ध्यान भी ज्यादा मुनाफा देने वाली मछलियों की ओर शिफ्ट होने लगा है।
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