जमुई का शातिर साइबर ठग चढ़ा पुलिस के हत्थे: किराए के बैंक खातों से करता था करोड़ों का खेल, 122 मामलों का खुलासा

बिहार के जमुई में पुलिस ने एक बड़े साइबर अपराधी को धर दबोचा है, जो किराए पर बैंक खाते लेकर धोखाधड़ी का जाल बिछाता था। आरोपी के खिलाफ देश भर में 122 से अधिक साइबर क्राइम की शिकायतें दर्ज हैं।

बिहार पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी

बिहार के जमुई जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में पुलिस को एक बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है। जिले के झाझा थाना क्षेत्र के बुढ़ीखार गांव से पुलिस ने एक ऐसे साइबर ठग को गिरफ्तार किया है, जिसकी हरकतों ने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है। पकड़ा गया आरोपी रंजन उर्फ सचिन दास है, जो लंबे समय से साइबर फ्रॉड के मामलों में वांछित था। यह पूरी कार्रवाई बिहार की साइबर अपराध और सुरक्षा इकाई तथा जमुई साइबर थाना पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा अंजाम दी गई है।

किराए पर बैंक खाते लेकर करता था गोरखधंधा

पुलिस की शुरुआती जांच में इस शातिर अपराधी की ठगी का अनोखा तरीका सामने आया है। रंजन सीधे तौर पर अपने नाम का इस्तेमाल करने के बजाय लोगों को लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था। इतना ही नहीं, वह पहले से चल रहे लोगों के बैंक खातों को भी किराए पर ले लेता था। इन खातों का इस्तेमाल वह साइबर ठगी से कमाई गई अवैध रकम को मंगवाने और उसे ठिकाने लगाने के लिए करता था। आरोपी ने इस तरह के कई खातों का जाल फैला रखा था ताकि पुलिस उसे आसानी से ट्रैक न कर सके।

ठगी के लिए आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल

पूछताछ और छानबीन में पता चला है कि यह आरोपी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का अहम हिस्सा है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क को तोड़ने और इसमें शामिल अन्य साथियों की तलाश में जुटी है। रंजन का गिरोह मुख्य रूप से निम्नलिखित तरीकों से लोगों को शिकार बनाता था:

  • ऑनलाइन लोन दिलाने का झांसा देकर ठगी करना।
  • लॉटरी लगने के नाम पर लोगों से पैसे ऐंठना।
  • फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल कर कॉल करना।
  • क्यूआर कोड और एपीके (APK) फाइल भेजकर खाता खाली करना।
  • ठगी की रकम को तेजी से अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करना।
  • ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से काले धन को सफेद करने की कोशिश करना।

भारी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य बरामद

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के ठिकाने से कई महत्वपूर्ण सामान जब्त किए हैं, जो उसकी साइबर ठगी की गतिविधियों की पुष्टि करते हैं। बरामद सामान की सूची काफी लंबी है, जिसमें शामिल हैं:

  • तीन मोबाइल फोन।
  • एक एचपी लैपटॉप।
  • तीन वाई-फाई डिवाइस।
  • एयरटेल पेमेंट्स बैंक का एक बायोमेट्रिक डिवाइस।
  • नौ बैंक खातों की पासबुक।
  • चार चेकबुक और दो एटीएम कार्ड।
  • तीन क्यूआर कोड स्कैनिंग कार्ड।
  • इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्किंग से जुड़े कई उपकरण।
  • फर्जी उद्यम पंजीकरण से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज।

राष्ट्रीय स्तर पर 122 से अधिक शिकायतें

पुलिस जांच में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि आरोपी केवल एक छोटे इलाके तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरे देश में उसका आतंक था। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल यानी NCRP के आंकड़ों के अनुसार, रंजन के मोबाइल नंबर पर 75 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हैं। इसके अलावा, उसके द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे बैंक खातों में से एक के खिलाफ 24 और दूसरे के खिलाफ 23 धोखाधड़ी के मामले दर्ज मिले हैं। इस तरह आरोपी के नाम कुल 122 से ज्यादा साइबर अपराध के रिकॉर्ड सामने आए हैं।

जांच का दायरा और आगे की कार्रवाई

फिलहाल, साइबर पुलिस की टीम बरामद किए गए सभी डिजिटल साक्ष्यों की गहन तकनीकी और वित्तीय पड़ताल कर रही है। पुलिस उन सभी लाभार्थियों के खातों की भी जांच कर रही है जिनमें ठगी की रकम ट्रांसफर की गई थी। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि इस गिरोह के तार देश के अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। इस नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए जांच का दायरा बढ़ाया गया है और जल्द ही अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।

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