हंसी-हंसी में नशे से दूरी का संदेश, सिरोही के आशीष माली का 'चिंटू बंदर' बना युवाओं की प्रेरणा

सिरोही के युवा कलाकार आशीष माली हैंड पपेट 'चिंटू बंदर' के माध्यम से बच्चों और युवाओं को नशामुक्ति का संदेश दे रहे हैं। इस कला की प्रेरणा उन्हें संत प्रेमानंद जी महाराज से मिली।

सिरोही जिले के एक युवा कलाकार हैंड पपेट कला के सहारे बच्चों और युवाओं को नशे से दूर रहने तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। अपनी इस अनूठी प्रस्तुति के कारण उन्हें सोशल मीडिया पर भी खूब सराहना मिल रही है। सिरोही निवासी आशीष माली लंबे समय से हैंड पपेट शो के जरिए अपनी कला का प्रदर्शन कर लोगों की वाहवाही बटोर रहे हैं।

अपने हैंड पपेट 'चिंटू' नामक बंदर के माध्यम से वह बच्चों को हंसाते भी हैं और साथ ही उन्हें नशे से दूरी बनाने तथा स्वस्थ जीवन जीने के तरीके भी सिखाते हैं। माली स्कूल और कॉलेज के अलावा नशामुक्ति केंद्रों पर भी अपनी प्रस्तुतियां दे चुके हैं।

संत प्रेमानंद जी महाराज से मिली प्रेरणा

आशीष माली को इस कला की प्रेरणा संत प्रेमानंद जी महाराज से मिली थी। उन्होंने बताया कि प्रेमानंद जी महाराज के सत्संग के दौरान एक हैंड पपेट कलाकार की प्रस्तुति देखकर महाराज बेहद प्रसन्न हुए थे। प्रेमानंद जी के भक्ति भाव से आशीष को जीवन में सकारात्मकता मिली।

महाराज जी के विचारों से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने लोक कला, भजन-कीर्तन और हास्य व्यंग्य की एक विशिष्ट विधा को अपनाया। लगातार कड़ी मेहनत और अभ्यास के बाद आज उनकी प्रस्तुति में भक्ति के साथ-साथ सामाजिक संदेश और मनोरंजन का संगम देखने को मिलता है। इस कलात्मक बदलाव ने उन्हें स्थानीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाई है, जिससे उनकी कला अब समाज सुधार का एक सशक्त माध्यम बन चुकी है।

जयपुर-जोधपुर समेत कई शहरों में बिखेरा जलवा

आशीष माली के वीडियो और लाइव कार्यक्रम राजस्थान के कोने-कोने तक पहुंच चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर जयपुर और जोधपुर जैसे बड़े शहरों तक लोग उनके अंदाज को खूब पसंद करते हैं। दर्शकों का मानना है कि उनकी कला में हंसी भी है और सीख भी, यही वजह है कि हर आयु वर्ग के लोग इसे पसंद करते हैं।

माली बताते हैं कि प्रेमानंद जी महाराज ने उन्हें सिखाया कि कला का मकसद केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ना और सही दिशा देना भी है। इसी सोच के साथ वह अपनी कला के जरिए युवाओं तक नशामुक्ति का संदेश पहुंचा रहे हैं।

जनगणना जागरूकता और राजस्थानी संस्कृति का संवर्धन

आशीष माली ने हाल ही में प्रशासन की ओर से करवाई जा रही जनगणना में सहयोग करते हुए आम लोगों को इसके प्रति जागरूक करने के लिए एक हैंड पपेट के साथ वीडियो भी तैयार किया था, जिसे लोगों ने काफी पसंद किया।

उन्होंने कलाकारों को उचित मंच उपलब्ध कराने और राजस्थानी संस्कृति व कला को आगे बढ़ाने की मांग रखी, ताकि युवा अपनी प्रतिभा को सही मंच तक पहुंचा सकें। इस तरह आशीष न केवल सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, बल्कि राष्ट्रीय महत्व के प्रशासनिक कार्यों और कला के संरक्षण के लिए भी निरंतर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।

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