शिवसेना (यूबीटी) में बगावत के आसार, सांसद नॉट रिचेबल और शिंदे दिल्ली में डटे... उद्धव ने चली ममता वाली चाल

उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसदों के फोन बंद होने और दिल्ली में एकनाथ शिंदे के डेरा डालने से पार्टी में टूट की आशंका तेज हो गई है। इसे रोकने के लिए उद्धव खेमे ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर ममता बनर्जी जैसी रणनीति अपनाई है।

महाराष्ट्र की सियासत एक बार फिर उबाल पर है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसदों के पार्टी से अलग होने की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। हालात यह हैं कि पार्टी के वरिष्ठ नेता तक अपने कई सांसदों से फोन पर संपर्क नहीं साध पा रहे। बताया जा रहा है कि कई सांसदों के मोबाइल बंद हैं और वे नॉट रिचेबल हो चुके हैं, जिसने मातोश्री की बेचैनी और बढ़ा दी है। खबर है कि उद्धव ठाकरे और दूसरे वरिष्ठ नेता खुद सांसदों को मनाने और पार्टी के साथ बनाए रखने में जुट गए हैं। इसी बीच दिल्ली में तेजी से बदलते समीकरणों ने महाराष्ट्र की राजनीति का पारा चढ़ा दिया है।

दिल्ली पहुंचे एकनाथ शिंदे, बागियों संग बैठक की चर्चा

शिवसेना (यूबीटी) में संभावित बिखराव को राजनीतिक हलकों में 'ऑपरेशन टाइगर' कहा जा रहा है। शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे कल रात ही दिल्ली पहुंच चुके हैं, जबकि उनके बेटे और शिवसेना संसदीय दल के नेता श्रीकांत शिंदे के आज दिल्ली पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। कहा जा रहा है कि श्रीकांत शिंदे संसद की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में शामिल होने राजधानी आ रहे हैं, लेकिन इन दोनों नेताओं के इस दौरे को इसी ऑपरेशन टाइगर से जोड़कर देखा जा रहा है।

सूत्रों का दावा है कि उद्धव गुट के कुछ सांसद आज सुबह करीब 8:30 बजे श्रीकांत शिंदे के दिल्ली स्थित आवास पर बैठक करेंगे, जिसमें पिता-पुत्र दोनों मौजूद रहेंगे। चर्चा है कि इसके बाद कुछ सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी मुलाकात कर सकते हैं। माना जा रहा है कि पहले लोकसभा में एक अलग संसदीय समूह बनाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी और फिर उस समूह को शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में मिला दिया जाएगा।

किन सांसदों के नाम सुर्खियों में

सियासी गलियारों में जिन सांसदों के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं, उनमें संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टीकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय जाधव शामिल हैं। इसके अलावा राजाभाऊ वाजे का नाम भी संभावित बागियों की सूची में जोड़ा जा रहा है। हालांकि इनमें से कुछ सांसदों ने सार्वजनिक रूप से पार्टी छोड़ने से इनकार किया है। नासिक के सांसद राजाभाऊ वाजे और मुंबई नॉर्थ ईस्ट के सांसद संजय दीना पाटिल का कहना है कि वे उद्धव ठाकरे के साथ मजबूती से खड़े हैं।

उद्धव खेमे ने अपनाई ममता वाली रणनीति

इन तमाम अटकलों के बीच शिवसेना (यूबीटी) ने ममता बनर्जी जैसी चाल चली है। पार्टी के वरिष्ठ सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि पार्टी के किसी भी सांसद द्वारा अलग गुट बनाने या किसी अन्य दल में विलय के दावे को मान्यता न दी जाए। ठीक इसी तरह का पत्र पहले ममता बनर्जी की टीएमसी भी स्पीकर ओम बिरला को लिख चुकी है।

पत्र में कहा गया है कि शिवसेना यूबीटी एक ही राजनीतिक दल है और कानून की नजर में वही मान्य है। पार्टी का तर्क है कि संसद में किसी दल का अस्तित्व मूल राजनीतिक दल से ही आता है, इसलिए अलग-अलग गुट बनाकर उसी पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का दावा नहीं किया जा सकता। सावंत ने लिखा है कि संविधान की दसवीं अनुसूची में 2003 के संशोधन के बाद अलग गुट बनाने का प्रावधान खत्म हो चुका है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी सांसद की वैधता राजनीतिक दल से आती है, न कि केवल संसदीय दल से। उनका आग्रह है कि यदि कोई समूह खुद को अलग गुट बताए तो उसे किसी प्रकार की मान्यता, सुविधा या विशेष दर्जा न दिया जाए।

मातोश्री की बैठक से गहराया सस्पेंस

इससे पहले उद्धव ठाकरे ने रविवार को मातोश्री में अपने सभी नौ लोकसभा सांसदों की बैठक बुलाई थी, लेकिन नौ में से सिर्फ चार सांसद ही व्यक्तिगत रूप से पहुंचे। बाकी सांसदों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या फोन के जरिए हिस्सा लिया। इसके बाद राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगे कि आखिर कई सांसद खुद क्यों नहीं पहुंचे। पार्टी ने इसे सामान्य बताया, जबकि विरोधी खेमा इसे असंतोष का संकेत करार दे रहा है।

संजय देशमुख की मुलाकात से बढ़ीं अटकलें

इसके बाद सोमवार को शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय देशमुख की दिल्ली में केंद्रीय मंत्री और शिंदे गुट के नेता प्रतापराव जाधव से मुलाकात ने अटकलों को और हवा दी। हालांकि दोनों नेताओं ने सफाई दी कि यह मुलाकात सिर्फ क्षेत्रीय विकास कार्यों को लेकर थी और इसका कोई राजनीतिक मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए। इसके बावजूद सियासी गलियारों में इसे संभावित बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है।

शिंदे गुट ने खोले दरवाजे

महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और शिंदे गुट के नेता प्रताप सरनाईक ने इशारा किया है कि अगर उद्धव गुट के सांसद या विधायक एकनाथ शिंदे के नेतृत्व पर भरोसा जताते हैं तो उनका स्वागत किया जाएगा। सरनाईक ने कहा कि जो नेता बालासाहेब ठाकरे के विचारों में यकीन रखते हैं और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में काम करना चाहते हैं, उनके लिए शिवसेना के दरवाजे खुले हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ऐसे नेताओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

संजय राउत का पलटवार

दूसरी ओर, दिल्ली पहुंचे शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने टूट की खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के सांसदों को खरीदने की कोशिश हो रही है। राउत का दावा है कि कुछ लोगों को अपने पक्ष में करने के लिए करोड़ों रुपये की पेशकश की जा रही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि महाराष्ट्र के सांसदों को खरीदने के लिए प्रति सांसद 15 करोड़ रुपये तक की पेशकश की जा रही है। राउत ने यह भी कहा कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और सभी सांसद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में विश्वास जताते हैं।

चौथी बरसी से ठीक पहले बढ़ी सरगर्मी

शिवसेना (यूबीटी) में टूट की यह चर्चा ऐसे समय तेज हुई है, जब ठीक चार साल पहले वर्ष 2022 में इसी दौर में एकनाथ शिंदे ने बगावत की थी। उस बगावत ने शिवसेना को दो हिस्सों में बांट दिया था और महाराष्ट्र की राजनीति का चेहरा ही बदल दिया था। अब सवाल यह है कि क्या इतिहास खुद को दोहराने जा रहा है या फिर उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी को एकजुट रखने में कामयाब रहेंगे। फिलहाल दिल्ली में चल रही बैठकों और बंद मोबाइल फोन वाले सांसदों ने महाराष्ट्र की राजनीति का सस्पेंस और गहरा कर दिया है।

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