24 साल की उम्र में निर्देशक बनकर रचा इतिहास, राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीता, पर अमिताभ के साथ काम करने का सपना रह गया अधूरा

‘दृश्यम’, ‘मदारी’ और ‘मुंबई मेरी जान’ जैसी फिल्मों के निर्देशक निशिकांत कामत ने सिनेमा पर गहरी छाप छोड़ी, लेकिन अमिताभ बच्चन को निर्देशित करने की उनकी ख्वाहिश कभी पूरी नहीं हो सकी।

हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाने वाले निर्देशक, लेखक और अभिनेता निशिकांत कामत को आज भी उनकी बेहतरीन फिल्मों के लिए याद किया जाता है। ‘दृश्यम’, ‘मदारी’, ‘मुंबई मेरी जान’ और ‘फोर्स’ जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने दर्शकों के दिलों में खास जगह बना ली। उनकी फिल्मों की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि उनमें मनोरंजन के साथ-साथ समाज की सच्चाई और आम आदमी की भावनाएं भी झलकती थीं। हालांकि एक ख्वाहिश ऐसी रही, जो उनके जीवन में अधूरी रह गई—वह अमिताभ बच्चन को निर्देशित करना चाहते थे, पर यह मौका उन्हें कभी नहीं मिला।

दादर में जन्म और थिएटर से शुरुआत

निशिकांत कामत का जन्म 17 जून 1970 को महाराष्ट्र के दादर में हुआ था। बचपन से ही उन्हें फिल्मों का गहरा शौक था और खासतौर पर अमिताभ बच्चन के वह बहुत बड़े प्रशंसक थे, जिनकी लगभग हर फिल्म वह देखा करते थे। पढ़ाई के दिनों में उनका झुकाव थिएटर की ओर बढ़ता गया। दिलचस्प बात यह रही कि एक बार वह सिर्फ नाटक की रिहर्सल देखने पहुंचे थे, लेकिन वहीं उन्हें मंच पर काम करने का अवसर मिल गया। यहीं से उनका थिएटर सफर शुरू हुआ और धीरे-धीरे यह शौक उनका जुनून बन गया।

महज 24 साल में बन गए निर्देशक

थिएटर में काम करते-करते उनका रुझान फिल्म निर्माण की तरफ बढ़ने लगा। करियर की शुरुआत उन्होंने दूरदर्शन के एक मराठी धारावाहिक में सहायक के रूप में की। इसी दौरान उन्होंने एडिटिंग सीखी और महज 22 साल की उम्र में एडिटर बन गए। कुछ साल एडिटिंग करने के बाद 24 साल की उम्र में उन्हें निर्देशन का पहला मौका मिला। बाद में टीवी की दुनिया छोड़कर उन्होंने लेखन पर ध्यान केंद्रित किया और कई साल तक स्क्रिप्ट लिखने का काम किया।

राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मान

साल 2005 में निशिकांत कामत ने मराठी फिल्म ‘डोम्बीवली फास्ट’ का निर्देशन किया। यह फिल्म बड़ी हिट साबित हुई और इसे राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। इस कामयाबी ने उन्हें मराठी सिनेमा के चर्चित निर्देशकों की कतार में ला खड़ा किया। मराठी फिल्मों में सफलता के बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा का रुख किया। साल 2008 में आई ‘मुंबई मेरी जान’ ने 2006 के मुंबई ट्रेन ब्लास्ट के बाद आम लोगों की जिंदगी पर पड़े असर को बेहद संवेदनशील ढंग से पर्दे पर उतारा। इसके बाद उन्होंने ‘फोर्स’, ‘दृश्यम’, ‘रॉकी हैंडसम’ और ‘मदारी’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। खासतौर पर ‘दृश्यम’ ने उन्हें देशभर में नई पहचान दिलाई और यह उनके करियर की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल हो गई।

निर्देशक ही नहीं, अच्छे अभिनेता भी

निशिकांत सिर्फ बेहतरीन निर्देशक ही नहीं, बल्कि एक अच्छे अभिनेता भी थे। उन्होंने ‘404’, ‘रॉकी हैंडसम’, ‘डैडी’, ‘जूली 2’ और ‘भावेश जोशी’ जैसी फिल्मों में अभिनय किया। ‘रॉकी हैंडसम’ में उनका निभाया खलनायक का किरदार दर्शकों को खूब भाया था।

अधूरा रह गया एक सपना

इतनी सफलता हासिल करने के बावजूद उनके मन में एक ख्वाहिश हमेशा बाकी रही। वह अमिताभ बच्चन को अपनी फिल्म में निर्देशित करना चाहते थे। बचपन से जिनकी फिल्में देखकर उन्होंने सिनेमा को समझा, उन्हीं के साथ काम करना उनका सपना था, मगर यह सपना कभी पूरा नहीं हो पाया। 17 अगस्त 2020 को निशिकांत कामत का निधन हो गया। वह लंबे समय से लिवर की बीमारी से जूझ रहे थे और महज 50 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। हालांकि उनकी फिल्में और उनका काम आज भी उन्हें दर्शकों के बीच जीवित रखे हुए हैं।

https://hindi.news18.com/news/entertainment/bollywood-nishikant-kamat-birthday-special-amitabh-bachchan-directing-dream-remained-unfulfilled-drishyam-maker-life-story-ws-kl-10576641.html