उत्तर प्रदेश में संचालित सभी मदरसों के लिए अब आधार से जुड़ी बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को पूरी तरह से जरूरी बना दिया गया है। उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड ने इस बाबत प्रदेश के समस्त जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को सख्त दिशा-निर्देश भेजे हैं।
क्या है नई व्यवस्था
नए नियम के तहत मदरसों में पढ़ाने वाले शिक्षकों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों के साथ-साथ छात्रों को भी प्रतिदिन अपनी उपस्थिति बायोमेट्रिक प्रणाली के माध्यम से दर्ज करानी होगी।
इससे पहले प्रदेश के सिर्फ अनुदानित मदरसों में ही स्टाफ की बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य थी, मगर वह आधार कार्ड से नहीं जुड़ी हुई थी। अब इस नई व्यवस्था में उपस्थिति को सीधे आधार से लिंक कर दिया गया है।
जल्द से जल्द काम पूरा करने के निर्देश
जिन मदरसों में अब तक यह मशीन या सिस्टम स्थापित नहीं हो सका है, वहां अधिकारियों को तत्काल आवश्यक उपकरण लगाकर इस प्रणाली को शीघ्र शुरू करने के आदेश दिए गए हैं।
सरकार ने यह कदम क्यों उठाया
इस निर्णय के पीछे राज्य सरकार की मुख्य मंशा मदरसों के संचालन में पारदर्शिता लाना, जवाबदेही सुनिश्चित करना और शिक्षकों व छात्रों की दैनिक उपस्थिति को पक्का करना है। बोर्ड ने अधिकारियों से यह भी कहा है कि वे पूरी व्यवस्था पर लगातार नजर रखें और किसी भी तकनीकी दिक्कत को तुरंत दूर करें।
फर्जीवाड़े के मामलों के बाद सख्ती
यह आदेश हाल में सामने आई हाजिरी संबंधी धांधली की घटनाओं के बाद आया है। अप्रैल के अंत में बाराबंकी के एक मदरसे का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें कथित रूप से उंगलियों के बजाय 'प्लास्टिक कार्ड' की मदद से शिक्षकों की झूठी उपस्थिति दर्ज की जा रही थी।
इससे पूर्व जौनपुर में भी इसी तरह का एक प्रकरण उजागर हुआ था, जहां मदरसे के प्रबंधक के परिजनों के अंगूठे के निशान का इस्तेमाल कर फर्जी हाजिरी लगाई जा रही थी।
अब रुकेगा फर्जीवाड़ा
अब तक केवल ऑफलाइन रिकॉर्ड रखे जाने और आधार आधारित 'फेस ऑथेंटिकेशन' न होने के कारण कुछ लोग इस व्यवस्था का गलत लाभ उठा रहे थे। आधार से जुड़ जाने के बाद अब इस प्रकार की धांधली पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सकेगी।
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