विनोद कश्यप हत्याकांड: क्या भूमि विवाद बना वजह? भाई का दावा- 400 बीघा सरकारी जमीन पर कब्जा

उत्तराखंड के देहरादून स्थित विकासनगर में बीजेपी नेता विनोद कश्यप की निर्मम हत्या को कुछ स्थानीय लोग भूमि विवाद से जोड़ रहे हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मृतक के भाई का आरोप है कि क्षेत्र में 400 बीघा से अधिक सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा है।

उत्तराखंड के देहरादून स्थित विकासनगर क्षेत्र में बीजेपी नेता विनोद कश्यप की बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी है। कुछ स्थानीय लोग इस हत्या को क्षेत्र में चल रहे भूमि विवादों से जोड़कर देख रहे हैं, हालांकि इस बारे में अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस स्तर पर मामले की जांच जारी है।

अतिक्रमण और बदलती डेमोग्राफी को लेकर सुर्खियों में इलाका

देहरादून के पछवादून का बैरागीवाला और कुशालपुर क्षेत्र इन दिनों कानून व्यवस्था के साथ-साथ सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण और तेजी से बदलती जनसंख्या संरचना को लेकर चर्चा में है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की ओर से बड़े पैमाने पर सरकारी जमीनों पर कब्जे के आरोप लगाए जा रहे हैं।

स्थानीय लोगों का दावा है कि बैरागीवाला और कुशालपुर क्षेत्र में करीब 400 बीघा सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किया गया है। आरोप है कि इनमें लगभग 90 बीघा भूमि ऐसी भी है, जो कब्रिस्तान के लिए चिन्हित की गई थी। लोगों के मुताबिक वर्षों से जारी अतिक्रमण के कारण क्षेत्र का स्वरूप तेजी से बदला है और आबादी के ढांचे में भी बदलाव देखने को मिला है।

मृतक के भाई का आरोप

हत्या को कुछ स्थानीय लोग भूमि विवादों से जोड़कर देख रहे हैं, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मृतक विनोद कश्यप के भाई, जो सूचना के अधिकार (आरटीआई) के जरिए लगातार विभिन्न मामले उठाते रहे हैं, उनका आरोप है कि बाहरी राज्यों से लोगों को लाकर सरकारी जमीन पर कब्जा कराया गया।

उनका कहना है कि सरकारी भूमि पर कब्जे का दायरा 400 बीघा से भी अधिक हो सकता है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कई बार प्रशासन को शिकायतें दी जा चुकी हैं।

कब्रिस्तान की जमीन में गड़बड़ी का आरोप

भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला अध्यक्ष खालिद मंसूर ने दावा किया है कि क्षेत्र में कब्रिस्तान के लिए चिन्हित लगभग 90 बीघा भूमि में गड़बड़ी हुई है। उनका आरोप है कि संबंधित भूमि के प्रबंधन और उपयोग को लेकर गंभीर अनियमितताएं हुई हैं, जिसकी शिकायत संबंधित विभागों के साथ-साथ वक्फ बोर्ड से भी की गई है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।

पहले भी हटाया जा चुका है अतिक्रमण

उल्लेखनीय है कि कुछ वर्ष पहले हाईकोर्ट के आदेश के बाद विकासनगर क्षेत्र में शक्ति नहर के दोनों किनारों पर स्थित यूजेवीएनएल की भूमि से बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाया गया था। उस दौरान एक हजार से अधिक निर्माणों के साथ धार्मिक ढांचों को भी हटाया गया था।

विधायक ने व्यापक सत्यापन की बात कही

स्थानीय विधायक सहदेव पुंडीर का कहना है कि क्षेत्र में सरकारी भूमि और वहां बसे लोगों का व्यापक सत्यापन कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी चर्चा की जाएगी और जहां कहीं भी अवैध कब्जे पाए जाएंगे, वहां नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अब उठ रहे ये सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सरकारी भूमि पर वर्षों से कब्जे होते रहे, तो संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी रही। साथ ही यह देखना भी अहम होगा कि प्रस्तावित सत्यापन अभियान महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया बनकर रह जाता है या फिर इसके आधार पर जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई भी दिखाई देती है।

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