पैतृक संपत्ति बेचकर नकद में 50 लाख लिए, तो क्या टैक्स भरना होगा? जानें क्या कहता है आयकर कानून

पैतृक संपत्ति की बिक्री से मिली बड़ी रकम को आयकर रिटर्न में दिखाना अनिवार्य है, अन्यथा आपको भारी जुर्माने और नोटिस का सामना करना पड़ सकता है। नकद लेनदेन से जुड़ी सीमाओं और कैपिटल गेन टैक्स के नियमों को विस्तार से समझें।

संपत्ति बिक्री और टैक्स का पेचीदा गणित

आयकर विभाग के नियम अक्सर आम लोगों के लिए उलझन का विषय बन जाते हैं। सरकार भले ही व्यवस्था को सुगम बनाने का दावा करती है, लेकिन तकनीकी बारीकियों से अनजान होने के कारण कई बार लोग अनजाने में बड़ी भूल कर बैठते हैं। सोशल मीडिया पर हाल ही में एक मामला सामने आया, जिसमें एक व्यक्ति ने साझा किया कि उनकी माताजी ने अपनी पैतृक संपत्ति बेचकर 50 लाख रुपये नकद ले लिए। जानकारी के अभाव में उन्होंने बिल्डर की बात मानकर यह नकद लेनदेन कर लिया। जब उन्होंने बाद में अपने कर सलाहकार से इस बारे में चर्चा की, तब उन्हें नियमों की जटिलता का एहसास हुआ। यदि आप भी संपत्ति बेच रहे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि इस पर टैक्स के नियम कैसे काम करते हैं और नकद लेनदेन पर आयकर विभाग की क्या शर्तें हैं।

आयकर रिटर्न में जानकारी देना क्यों जरूरी है

विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि पैतृक संपत्ति की बिक्री से प्राप्त राशि को आप अपनी सामान्य आय की तरह नहीं दिखा सकते। इसे आयकर रिटर्न यानी ITR में 'कैपिटल गेन' के तहत दिखाना कानूनी अनिवार्यता है। यदि आपकी कोई अन्य आय नहीं है और आप सिर्फ इसी संपत्ति की बिक्री का विवरण दे रहे हैं, तो आपको इसके लिए ITR-2 फॉर्म का चयन करना होगा। यदि आप इन पैसों का ब्यौरा ITR में नहीं देते हैं, तो आपको कर चोरी के मामले में आयकर विभाग के नोटिस का सामना करना पड़ सकता है। अतः इसे छिपाने की भूल न करें।

कैपिटल गेन टैक्स की गणना कैसे होती है

पैतृक संपत्ति पर टैक्स की गणना करते समय इसके वास्तविक मूल्य को समझना जरूरी है। टैक्स की राशि तय करने के लिए बिक्री मूल्य में से संपत्ति की लागत घटाई जाती है। इसमें संपत्ति के मूल मालिक द्वारा इसे खरीदते समय किए गए खर्चों और बाद में किए गए सुधार या अन्य संबंधित खर्चों को शामिल किया जाता है। इसके बाद जो शेष राशि बचती है, उस पर ही कर की गणना की जाती है। इस प्रक्रिया में मार्केट वैल्यू यानी बाजार मूल्य का भी आकलन किया जाता है, ताकि वास्तविक मुनाफे का सही आंकड़ा निकल सके।

होल्डिंग पीरियड और टैक्स की दरें

संपत्ति पर कितना टैक्स लगेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि इसे कितने समय तक रखा गया है। नियम यह है कि संपत्ति के पिछले मालिक ने इसे जितने समय तक अपने पास रखा था, उस अवधि को वर्तमान मालिक के होल्डिंग पीरियड में जोड़ दिया जाता है। इसी से यह तय होता है कि यह लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) है या शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन। अधिकांश मामलों में पैतृक संपत्ति लॉन्ग टर्म कैटेगरी में आती है।

  • यदि संपत्ति 23 जुलाई, 2024 से पहले खरीदी गई थी, तो उस पर 20 फीसदी की दर से टैक्स लगता है और आपको इंडेक्सेशन यानी महंगाई समायोजन का लाभ भी मिलता है।
  • 23 जुलाई, 2024 के बाद खरीदी या बेची गई संपत्तियों के मामले में नियम बदल गए हैं। अब इस पर 12.5 फीसदी की दर से टैक्स देय है, लेकिन इसमें महंगाई दर के अनुसार इंडेक्सेशन की छूट का लाभ नहीं मिलता।

नकद लेनदेन पर सरकार की सख्ती

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संपत्ति के सौदों में 20 हजार रुपये से ज्यादा का नकद लेनदेन करना आयकर कानून के प्रावधानों के विरुद्ध है। आयकर अधिनियम की धारा 269SS के तहत किसी भी अचल संपत्ति के लेनदेन में 20 हजार रुपये से अधिक की नकद राशि लेना या देना प्रतिबंधित है। यदि कोई इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उसे आयकर विभाग का नोटिस मिल सकता है और भारी दंड का प्रावधान भी है। हालांकि, यदि आप इस राशि को सही तरीके से टैक्स दायरे में लाकर इसका खुलासा कर देते हैं, तो नोटिस मिलने की संभावना कम हो जाती है। अंततः, बड़ी राशि का लेनदेन हमेशा बैंक माध्यम से करना ही सुरक्षित और कानूनी रूप से सही तरीका है।

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