साढ़े तीन किलो वजन और 3800 रुपये दाम: जानिए आमों की मल्लिका 'नूरजहां' का जलवा, देश-विदेश में भारी मांग

मध्य प्रदेश के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र की दुर्लभ 'नूरजहां' किस्म इस सीजन में सुर्खियों में है, जहां अब तक का सबसे बड़ा फल 3.30 किलोग्राम वजन का रहा और 3,800 रुपये में बिका। राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात समेत कई राज्यों से इसकी जबरदस्त मांग आ रही है।

आम के मौसम में देश में मौजूद तमाम किस्मों के बीच 'आमों की मल्लिका' कहलाने वाली 'नूरजहां' की चर्चा हर बार खास रहती है। इस बार भी यह दुर्लभ प्रजाति लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों से इसकी भारी मांग सामने आ रही है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसका वजन 3.30 किलोग्राम तक पहुंच जाता है और कीमत 3,000 रुपये से भी ऊपर रहती है।

क्यों कहलाती है 'आमों की मल्लिका'

मध्य प्रदेश के आलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में उगाई जाने वाली 'नूरजहां' किस्म इन दिनों चर्चा में बनी हुई है। उत्पादकों का कहना है कि मौजूदा मौसम में इस दुर्लभ प्रजाति के अब तक के सबसे बड़े फल का वजन 3.30 किलोग्राम दर्ज किया गया, जिसे 3,800 रुपये में बेचा गया। उनके मुताबिक पेड़ों पर लगे कुछ बड़े फलों का वजन इस महीने के अंत तक चार किलोग्राम तक पहुंच सकता है।

उत्पादक की जुबानी

इंदौर से करीब 250 किलोमीटर दूर स्थित कट्ठीवाड़ा क्षेत्र के आम उत्पादक भरतराज सिंह जादव ने बताया कि इस मौसम में नूरजहां की फसल अच्छी रही है। उन्होंने कहा कि उनके बाग में अब तक का सबसे बड़ा नूरजहां आम 3.30 किलोग्राम वजन का रहा, जिसे उन्होंने 3,800 रुपये में बेचा।

जादव के अनुसार उनके बाग में नूरजहां के पेड़ों पर अभी कई फल लटके हुए हैं, जिनका असली वजन तोड़ने के बाद ही पता चलेगा। उन्होंने बताया कि उनके यहां इस किस्म के दो पुराने और 11 नए 'ग्राफ्टेड' यानी कलम लगाकर तैयार किए गए पेड़ हैं। नए पेड़ों पर भी फल आना शुरू हो गया है और आने वाले समय में उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है।

विदेशों तक पहुंची नूरजहां की महक

भरतराज सिंह जादव के मुताबिक इन दिनों मध्य प्रदेश के साथ-साथ राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात से नूरजहां की मांग आ रही है। हाल ही में तमिलनाडु से भी इसके फलों को लेकर पूछताछ हुई है। उन्होंने बताया कि इस सीजन में उनके बाग के नूरजहां आम संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका और स्पेन तक पहुंचे हैं। हालांकि इनका सीधा निर्यात नहीं किया गया, बल्कि लोग अपने परिचितों के जरिये इन्हें विदेश ले गए।

कीमती फसल की कड़ी सुरक्षा

जादव ने बताया कि उनके बाग में अलग-अलग किस्मों के करीब 2,500 आम के पेड़ हैं। बाग की रखवाली के लिए 10 गार्ड तैनात किए गए हैं, क्योंकि नूरजहां की ऊंची कीमत के चलते इस पर खास निगरानी रखनी पड़ती है। उन्होंने यह भी बताया कि नूरजहां की खेती में किसी रासायनिक पदार्थ का इस्तेमाल नहीं किया जाता।

चार किलो तक हो सकता है वजन

कट्ठीवाड़ा के एक अन्य आम उत्पादक शिवराज जादव ने बताया कि उनके बाग में नूरजहां के छह पेड़ हैं। इन पेड़ों पर इस समय करीब तीन किलोग्राम वजन के कई फल लगे हुए हैं, जबकि कुछ बड़े फल अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुए हैं। उन्हें उम्मीद है कि कुछ आमों का वजन चार किलोग्राम तक पहुंच सकता है।

जनवरी से जून तक का सफर

उत्पादकों के अनुसार नूरजहां के पेड़ों पर जनवरी से बौर आना शुरू होता है और जून तक इसके फल पककर बिक्री के लिए तैयार हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि कुछ दशक पहले नूरजहां आम का अधिकतम वजन 4.50 किलोग्राम तक होता था, जो अब घटकर आमतौर पर 3.50 से 3.80 किलोग्राम के बीच रह गया है।

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