राम मंदिर दान विवाद: एक और रामभक्त ने थाने पहुंचकर दी तहरीर, चार लोगों पर लगाए गंभीर आरोप

अयोध्या राम मंदिर में कथित दान चोरी के मामले में राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे संतोष दुबे ने थाना रामजन्मभूमि में तहरीर देकर चार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने एसआईटी जांच पर अविश्वास जताते हुए तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।

श्री राम जन्मभूमि अयोध्या में स्थित रामलला के दरबार में कथित दान चोरी के मामले ने अब नया रुख ले लिया है। राम मंदिर आंदोलन में लंबे समय तक सक्रिय रहे संतोष दुबे ने थाना रामजन्मभूमि में एक तहरीर सौंपी है, जिसमें राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कई लोगों के नाम भी दर्ज कराए गए हैं। उन्होंने तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए चार लोगों को इस मामले में सीधे तौर पर आरोपी ठहराया है।

तहरीर देने की वजह

संतोष दुबे का कहना है कि प्रभु राम के दान पात्र में हुई चोरी का मामला यूं तो कई सौ करोड़ रुपये तक का है, लेकिन हाल ही में सामने आया साढ़े सात और सात करोड़ रुपये का प्रकरण पूरे देश को झकझोर देने वाला है। उन्होंने बताया कि वे बचपन से इस आंदोलन से जुड़े रहे हैं।

उन्होंने अपने संघर्ष को याद करते हुए कहा कि 2 नवंबर 1990 को आंदोलन के दौरान उन्हें चार गोलियां लगी थीं और 6 दिसंबर 1992 को ढांचा गिराते समय वे घायल हो गए थे। उनके शरीर में 17 जगह हड्डियां टूटी थीं यानी 17 फ्रैक्चर हुए थे और वे कई महीनों तक कोमा में रहे। उनके अनुसार जिस मंदिर के लिए इतना बलिदान दिया, वहां राम की मर्यादा को भंग किया जाना और दान को लूटा जाना उन्हें गहरी पीड़ा देता है।

जानकारी कैसे मिली

संतोष दुबे ने बताया कि यह मामला मीडिया के माध्यम से सामने आने के बाद उन्होंने अपने स्तर पर भी पड़ताल कराई। उन्होंने अपने लोगों को सच्चाई जानने के लिए लगाया। उनके मुताबिक रामजन्मभूमि में काम करने वाले कर्मचारियों ने बताया कि यह सब नियमित रूप से होता रहा है और इसमें कई लोग शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि टिन्नू यादव और चंपत राय जैसे लोग इस तरह के गलत काम में लिप्त हैं। उन्होंने कहा कि बाद में महिपाल सिंह का नाम भी सामने आया और बृजभूषण सिंह का बयान भी आया, जिससे यह मामला धीरे-धीरे बढ़ता चला गया।

एसआईटी जांच पर सवाल

ट्रस्ट के अनुरोध पर योगी सरकार द्वारा गठित एसआईटी कमेटी पर सवाल उठाते हुए संतोष दुबे ने कहा कि ट्रस्ट का अनुरोध बड़ा है या हिंदू समाज का स्वाभिमान। उन्होंने ट्रस्ट को 12-14 लोगों का समूह बताते हुए कहा कि हिंदू समाज सनातन व्यवस्था और वैदिक परंपराओं का प्रतिनिधित्व करता है।

उन्होंने एसआईटी जांच पर अविश्वास जताते हुए कहा कि देश में एसआईटी, सीबीसीआईडी और आईबी जैसी एजेंसियों ने लाखों जांचें कीं, लेकिन परिणाम कुछ नहीं निकला। उनका आरोप था कि इन सब पर दबाव बना दिया जाता है और मामले मैनेज कर लिए जाते हैं। उनका मानना है कि अब एसआईटी की आवश्यकता नहीं है और ये चारों सीधे तौर पर अपराधी हैं।

चार लोगों के खिलाफ शिकायत

संतोष दुबे ने बताया कि जिन चार लोगों के खिलाफ उन्होंने तहरीर दी है, उनमें चंपत राय बंसल, अनिल मिश्रा, गोपाल राव और उनका ड्राइवर टिन्नू यानी राम शंकर यादव शामिल हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि कभी गरीब रहे ये लोग इतने बड़े आदमी कैसे बन गए।

अपनी स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वे इस आंदोलन से इन लोगों से भी पहले से जुड़े हुए हैं, फिर भी आज वे एक टूटे मकान में रहते हैं और उनके पास आज तक कोई चार पहिया वाहन तक नहीं है।

पुलिस कार्रवाई न होने पर रुख

संतोष दुबे ने कहा कि उन्हें अयोध्यावासी होने के नाते पूरी दुनिया को मुंह दिखाने में शर्म आ रही है कि राम के नाम पर लूट हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस कार्रवाई नहीं करती तो यह बहुविकल्पीय देश है। उन्होंने बताया कि अगले दिन वे सरयू मैया को एक ज्ञापन और पत्र सौंपेंगे, जिसमें आरोपियों के सर्वनाश की प्रार्थना की जाएगी।

क्या होना चाहिए

संतोष दुबे के अनुसार मुख्यमंत्री, जो पहले हर सप्ताह यहां आते थे, अब नहीं आ रहे, उन्हें फिर से आना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि मुख्यमंत्री एसएसपी को बुलाकर चारों आरोपियों को पहले जेल भेजने और जांच बाद में कराने का निर्देश दें। उनका कहना था कि कई घटनाओं में इसी तरह कार्रवाई होती है।

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