अयोध्या के राम मंदिर के दानपात्रों से चढ़ावे की चोरी के खुलासे ने हर किसी को हैरान कर दिया है. नोटों की गिनती से जुड़े करीब 50 कर्मचारी संदेह के घेरे में आ गए हैं. इसी बीच इस प्रकरण में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नाम भी सुनाई देने लगा है और इनकी भूमिका की जांच की मांग उठ रही है. आइए जानते हैं कि आखिर वह कौन है जिसने इन दोनों नेताओं पर इतना बड़ा आरोप लगाया है.
संत समाज की तीखी प्रतिक्रिया
राम मंदिर का दान इस बार जिस वजह से चर्चा में है, वह देश के लिए शर्मनाक है. मंदिर को मिले चढ़ावे पर भी कुछ लोगों की नीयत खराब थी. जैसे ही यह सामने आया कि राम मंदिर के दान में घोटाला हुआ है, राजनीतिक और धार्मिक दोनों ही दायरों में बयानबाजी तेज हो गई. प्रदेश सरकार द्वारा मामले की पड़ताल के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किए जाने के बाद संत समाज भी खुलकर अपनी राय रख रहा है.
अयोध्या की तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य ने राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के पीछे एक बड़ी साजिश की आशंका जताई है. उन्होंने तो अखिलेश यादव और राहुल गांधी पर सीधे-सीधे गंभीर आरोप तक मढ़ दिए हैं.
आखिर है क्या पूरा मामला
रामलला के गर्भगृह और दर्शन पथ के समीप रखे दानपात्रों से जो भी नकदी निकाली जाती है, उसे राम जन्मभूमि परिसर के भीतर ही बने एक 'गोपनीय कक्ष' तक पहुंचाया जाता है. सुरक्षा कारणों से इस कमरे की वास्तविक स्थिति को बेहद गोपनीय रखा जाता है और यहां बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहता है. चढ़ावे की गिनती के लिए इस कमरे में कुल 50 कर्मचारी मौजूद रहते थे.
शुरुआती अनुमानों के अनुसार यह चोरी 200 करोड़ रुपये से अधिक की हो सकती है. नोटों की गिनती से जुड़े करीब 50 कर्मचारी शक के दायरे में हैं. पुलिस और जांच एजेंसियों ने अब तक 5 कर्मचारियों से करीब 2 करोड़ रुपये की नकदी, एक कार और 3 आईफोन बरामद किए हैं.
क्या बोले संत परमहंस
संत परमहंस आचार्य ने आरोप लगाया कि इस पूरे प्रकरण में राहुल गांधी और अखिलेश यादव की भूमिका की जांच होनी चाहिए. उनका कहना है कि कुछ छोटे कर्मचारियों को कथित तौर पर बहकाकर या प्रभावित कर इस तरह की घटना को अंजाम दिलाने की कोशिश की गई, ताकि बाद में राम मंदिर तथा केंद्र और राज्य सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके.
उन्होंने कहा कि यह एक सोची-समझी साजिश प्रतीत होती है, जिसका मकसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राम मंदिर ट्रस्ट को बदनाम करना है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामले की जांच अभी चल ही रही है, तब कुछ राजनीतिक नेताओं के बयान कई शंकाएं पैदा करते हैं. जिन लोगों ने राम मंदिर का दौरा तक नहीं किया, उन्हें इस घटना की इतनी जानकारी आखिर कैसे मिली, इसकी भी पड़ताल होनी चाहिए.
संत ने रखी ये मांग
संत ने प्रदेश सरकार और जांच एजेंसियों से आग्रह किया कि SIT निष्पक्ष और व्यापक तरीके से जांच करे तथा मामले के हर पहलू की तह तक जाए. उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए. साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि मामले से जुड़े सभी संभावित पहलुओं और आरोपों की गहराई से जांच हो, ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके.
हालांकि अब तक इन आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई आधिकारिक साक्ष्य सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है. मामले की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसियों की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा. ऐसे में सभी पक्षों के दावों और आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही संभव होगी.
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