खंडवा को मूंदी से जोड़ने वाली 38 किलोमीटर लंबी सड़क एक बार फिर चर्चा और सवालों के घेरे में आ गई है। बीते 13 वर्षों में इस मार्ग के रखरखाव पर करीब 30 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, इसके बावजूद आज भी इसकी हालत जर्जर बनी हुई है। बारिश का मौसम शुरू होने से पहले ही सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे उभर आए हैं, जिससे राहगीरों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
प्रदर्शनकारियों ने दंडवत प्रणाम कर जताया विरोध
इसी मुद्दे को लेकर स्थानीय निवासियों के साथ एनएसयूआई, यूथ कांग्रेस और कांग्रेस के नेताओं ने सड़क पर उतरकर विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारी दंडवत प्रणाम करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे और जल्द से जल्द सड़क निर्माण कराने की मांग रखी।
देरी से 153 करोड़ की परियोजना पहुंची 193 करोड़ पर
इस सड़क के निर्माण के लिए 153 करोड़ रुपये की लागत से घोषणा की गई थी, लेकिन इसे अमल में लाने में इतना समय बीत गया कि अब इसकी अनुमानित लागत बढ़कर 193 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। परियोजना में लगातार हो रही देरी ने लागत में इस इजाफे को जन्म दिया है, जिस पर प्रदर्शनकारियों ने सवाल खड़े किए।
जिले की वीआईपी सड़क, फिर भी उपेक्षा
खंडवा-मूंदी मार्ग को जिले की वीआईपी सड़क माना जाता है। इसी रास्ते से मंत्री, सांसद और विधायक आते-जाते हैं, क्योंकि यह सड़क जिला मुख्यालय को राजधानी भोपाल से भी जोड़ती है। बावजूद इसके सड़क की दुर्दशा देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि आम नागरिकों को रोजाना कितनी परेशानियों से जूझना पड़ता होगा। जगह-जगह बने गड्ढों के कारण वाहन चालक हादसों के खतरे के बीच सफर करने को मजबूर हैं।
बढ़ रहा मेंटेनेंस का बोझ, आम हुए हादसे
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि खराब सड़क के चलते वाहनों के रखरखाव पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है और दुर्घटनाएं अब आम बात हो गई हैं। मार्ग के खस्ताहाल होने से वाहन या तो खराब हो जाते हैं या फिर हादसे का शिकार बन जाते हैं।
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