मंदिरों में करोड़ों का चढ़ावा: राम मंदिर विवाद के बाद फिर उठे सुरक्षा और पारदर्शिता पर सवाल

राम मंदिर में दान राशि में हेरफेर के ताजा मामले ने धार्मिक स्थलों पर चढ़ावे की सुरक्षा को लेकर बहस छेड़ दी है। इससे पहले उज्जैन के महाकाल मंदिर समेत कई जगहों पर दान राशि को लेकर विवाद और चोरी के मामले सामने आ चुके हैं।

देश के बड़े धार्मिक स्थलों पर हर दिन श्रद्धालु करोड़ों रुपये का चढ़ावा अर्पित करते हैं। इसी राशि से मंदिरों की देखरेख और प्रबंधन का काम चलता है। लेकिन बीच-बीच में चढ़ावे और दान राशि में हेरफेर के आरोप सामने आते रहते हैं, जिससे व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो जाते हैं। हाल ही में राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े हेरफेर का मामला चर्चा में आया है। इससे पहले मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित प्रसिद्ध महाकाल मंदिर भी ऐसे ही विवादों के चलते सुर्खियों में रह चुका है।

महाकाल मंदिर में क्या हुआ था

हाल ही में महाकाल मंदिर में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोप लगा कि जलाधारी में रखी गई दान राशि को एक पुजारी और उसके साथ मौजूद प्रतिनिधि प्रसाद की थैली में रख रहे थे। यह मामला तब उजागर हुआ जब एक महिला श्रद्धालु को प्रसाद के पैकेट में नकदी मिली। इसके बाद इससे जुड़े पुजारी और अन्य लोगों के खिलाफ जांच शुरू की गई।

शिवराज सरकार के समय भी सामने आया था विवाद

महाकाल मंदिर में दान राशि को लेकर इससे पहले भी विवाद हो चुका है। साल 2022 में मंदिर परिसर के कुछ कर्मचारियों पर आरोप लगा था कि वे श्रद्धालुओं की ओर से जमा की गई राशि को दान पेटी में डालने के बजाय अपने पास रख लेते थे। जांच के बाद संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। उस समय मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की सरकार थी।

राम मंदिर मामले के बाद फिर गरमाई बहस

देश के बड़े मंदिरों में रोजाना लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं और बड़ी मात्रा में नकद दान, सोना-चांदी तथा अन्य सामग्री चढ़ाते हैं। ऐसे में दान राशि के संग्रह, गणना और सुरक्षा के लिए मजबूत व्यवस्था की जरूरत होती है, लेकिन ऐसी घटनाएं सामने आने पर कई बार इन व्यवस्थाओं पर सवाल उठते हैं।

राम मंदिर में सामने आए ताजा विवाद के बाद एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि धार्मिक संस्थानों में मिलने वाले चढ़ावे और दान राशि के प्रबंधन को और अधिक पारदर्शी कैसे बनाया जाए। श्रद्धालुओं का भरोसा बनाए रखने के लिए व्यवस्था को मजबूत करना समय की मांग है और इस दिशा में गंभीरता से काम होना चाहिए। आस्था से जुड़े ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों और प्रशासन की भूमिका सबसे अहम होती है।

उज्जैन में कब-कब सामने आए हेरफेर और चोरी के मामले

मध्य प्रदेश के उज्जैन में मंदिरों की दान राशि से जुड़े कुछ प्रमुख मामले इस प्रकार रहे हैं:

महाकाल मंदिर दान राशि हेरफेर मामला (मई 2026)

हाल ही में महाकाल मंदिर में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोप लगा कि जलाधारी (जल चढ़ाने वाला लौटा) में रखी गई दान राशि को एक पुजारी और उसके साथ मौजूद प्रतिनिधि प्रसाद की थैली में रख रहे थे। यह मामला तब सामने आया जब एक महिला श्रद्धालु को प्रसाद के पैकेट में नकदी मिली। इसके बाद इससे जुड़े पुजारी और अन्य लोगों के खिलाफ जांच शुरू हुई।

महाकाल मंदिर के कर्मचारियों पर कार्रवाई (2022)

महाकाल मंदिर में 3 कर्मचारियों पर दान राशि अपने पास रखने का आरोप लगा था। बताया गया कि वे राशि को दान पेटी में डालने के बजाय अपने पास रख लेते थे। इस घटना के बाद उन्होंने अपना अपराध भी स्वीकार कर लिया, जिसके बाद मंदिर प्रशासन ने उन कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया।

हिमानेश्वर महादेव मंदिर दान पेटी चोरी मामला (2026)

चिमनगंज मंडी क्षेत्र के हिमानेश्वर महादेव मंदिर में कुछ अज्ञात बदमाश दान पेटी का ताला तोड़कर नकदी चुरा ले गए। लोगों की सूचना पर पुलिस ने जांच शुरू की और सीसीटीवी फुटेज खंगाले। यह दान राशि की चोरी का मामला था।

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