खूब सराहना के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर पिटी 'मैं वापस आऊंगा', क्या ओटीटी पर पलटेगी बाजी?

इम्तियाज अली की 'मैं वापस आऊंगा' को क्रिटिक्स और दर्शकों की तारीफ तो मिली, पर भारत में फिल्म महज 6.75 करोड़ रुपये ही जुटा सकी। अब निगाहें ओटीटी रिलीज पर टिकी हैं।

इम्तियाज अली के निर्देशन में बनी फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' रिलीज होते ही समीक्षकों और दर्शकों, दोनों की वाहवाही बटोरने में कामयाब रही। क्रिटिक्स ने जहां इसे सराहनीय रिव्यू दिए, वहीं आम दर्शकों ने भी फिल्म की जमकर तारीफ की। इसके बावजूद कमाई के मोर्चे पर यह फिल्म बुरी तरह नाकाम साबित हुई है। सेकनिल्क के आंकड़ों के अनुसार, 'मैं वापस आऊंगा' अब तक भारत से केवल 6.75 करोड़ रुपये ही कमा सकी है।

शुरुआती दिन ही फीके रहे

वेदांग रैना, शारवरी वाघ और दिलजीत दोसांझ की मुख्य भूमिका वाली यह फिल्म रिलीज के साथ ही बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही। पहले दिन फिल्म ने 1.15 करोड़ रुपये कमाए, जबकि दूसरे दिन यह आंकड़ा 1.85 करोड़ रुपये रहा। तीसरे दिन फिल्म ने 2.50 करोड़ और चौथे दिन सिर्फ 1.25 करोड़ रुपये का कारोबार किया। इस तरह भारत में फिल्म की कुल कमाई अब तक 6.75 करोड़ रुपये तक ही पहुंच सकी है। वहीं इसका वर्ल्डवाइड कलेक्शन करीब 8 करोड़ रुपये के आसपास बताया जा रहा है। तारीफों और बेहतर समीक्षाओं के बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कोई कमाल नहीं दिखा सकी। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इसे खूब सराहा, मगर इसका असर कमाई पर नहीं पड़ा। अब देखना यह होगा कि ओटीटी पर रिलीज के बाद इस फिल्म की किस्मत बदल पाती है या नहीं।

क्या है फिल्म की कहानी?

फिल्म की कहानी भारत-पाक विभाजन की पृष्ठभूमि पर बुनी गई है, जब एक मुल्क को रातों-रात बांट दिया गया। इसके चलते लाखों लोग बेघर हो गए और पूरे देश में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। लोगों को अचानक अपना घर छोड़कर जाना पड़ा और ऐसी कई घटनाएं घटीं, जिनका असर पीढ़ियों तक परिवारों और लोगों पर बना रहा। कहानी 95 साल के ईशर सिंह ग्रेवाल (नसीरुद्दीन शाह) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनके जेहन में सरगोधा शहर की यादें बसी हैं—वह शहर जिसे उन्हें विभाजन के समय छोड़ना पड़ा था। जैसे-जैसे डिमेंशिया उनके अतीत की स्मृतियों को धुंधला करता जाता है और वे हकीकत से जुदा होने लगती हैं, उनका पोता निरवैर (दिलजीत दोसांझ) उस पीड़ा की तह तक जाने की कोशिश करता है जो ताउम्र उनके दादा को सालती रही। फिल्म दर्शकों को युवा ईशर (वेदांग रैना) किन्नू की यादों के सहारे अतीत में ले जाती है, जो विभाजन, आजादी और अपनी दुनिया के बिखरने के बीच अफसाना (शारवरी) से मोहब्बत करने लगता है।

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