अधिक मास के समापन पर श्रीनाथजी मंदिर में भव्य छप्पन भोग, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

उदयपुर के श्रीनाथजी मंदिर में अधिक मास के समापन पर भव्य छप्पन भोग मनोरथ आयोजित हुआ, जिसमें प्रभु को 351 प्रकार की भोग सामग्री अर्पित की गई। इस अवसर पर तिलकायत महाराज श्री सहित हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

उदयपुर स्थित पुष्टिमार्गीय प्रधान पीठ श्रीनाथजी मंदिर में चल रहे अधिक मास के समापन पर भव्य छप्पन भोग मनोरथ का आयोजन किया गया। अधिक ज्येष्ठ अमावस्या के पावन अवसर पर हुए इस विशेष मनोरथ में बड़ी संख्या में वैष्णव श्रद्धालुओं ने प्रभु के अलौकिक दर्शन का लाभ लिया। मंदिर परिसर दिनभर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा और भक्ति एवं उत्साह का वातावरण बना रहा।

राजभोग दर्शन के दौरान श्रीनाथजी प्रभु और लाडले लाल प्रभु को एक साथ विराजित कर विशेष छप्पन भोग अर्पित किया गया। इस मौके पर तिलकायत महाराज श्री, श्री विशाल बावा और श्री लाल बावा की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने प्रभु को भोग अर्पित कर आरती उतारी और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनोरथ संपन्न कराया।

351 प्रकार की भोग सामग्री हुई अर्पित

मंदिर प्रशासन के अनुसार अधिक मास के इस विशेष छप्पन भोग में प्रभु को 351 प्रकार की बालभोग सामग्री अर्पित की गई। इनमें दूधघर, शाकघर और अनसकड़ी सहित अनेक प्रकार के पारंपरिक व्यंजन और भोग शामिल रहे। इन भोग सामग्रियों को मंदिर के मणि कोठा, डोल तिबारी और रतन चौक में सजाया गया, जिसके बाद विधिवत भोग अर्पित कर श्रद्धालुओं के लिए दर्शन खोले गए।

मनोरथ के दौरान तिलकायत महाराज श्री, श्री विशाल बावा और श्री लाल बावा ने वल्लभ कुल के सदस्यों के साथ प्रभु की आरती की और भक्ति भाव से सेवा की। छप्पन भोग मनोरथ से जुड़े परिवार को सम्मानित करते हुए उन्हें ऊपरना ओढ़ाया गया तथा प्रसाद देकर आशीर्वाद प्रदान किया गया।

देश-विदेश से पहुंचे हजारों भक्त

अधिक मास के समापन पर आयोजित इस विशेष मनोरथ को देखने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। दर्शन के दौरान मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा और भक्तों ने प्रभु की मनोहारी झांकी के दर्शन कर स्वयं को धन्य अनुभव किया।

उष्णकाल को ध्यान में रखते हुए प्रभु का विशेष शृंगार भी किया गया। प्रभु को मलमल के वस्त्र धारण कराए गए और मस्तक पर घेरा एवं गोकर्ण सजाया गया। मंदिर में छप्पन भोग भाव वाली विशेष पिछवाई भी सजाई गई।

आभूषण सेवा में मोतियों की बनमाला, विभिन्न मालाएं, कर्णकुंडल तथा करकमलों में वेणु और वेत्र अर्पित किए गए। इसके साथ ही प्रभु के समक्ष पारंपरिक सजावट भी की गई। श्रद्धालुओं का मानना है कि अधिक मास में होने वाले ऐसे विशेष मनोरथ और दर्शन उन्हें आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति कराते हैं।

https://hindi.news18.com/news/dharm/special-adhik-maas-chhappan-bhog-offered-to-shrinathji-thousands-of-devotees-gather-for-divine-darshan-local18-ws-l-10574834.html