उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के एक युवा किसान ने वह कर दिखाया है जिसकी कभी इलाके में कल्पना नहीं की जाती थी। गोंडा निवासी सुशील निषाद ने पारंपरिक खेती की राह से हटकर नाशपाती की बागवानी की ओर रुख किया और इसमें कामयाबी हासिल की। उनकी यह पहल अब आसपास के किसानों के बीच चर्चा का विषय बन चुकी है। नाशपाती की खेती से उन्हें ठीक-ठाक कमाई हो रही है, जिससे उनका हौसला और बढ़ गया है।
पारंपरिक फसलों से बागवानी की ओर रुख
सुशील बताते हैं कि पहले वह परंपरागत फसलें उगाते थे, लेकिन उनसे होने वाली आमदनी सीमित ही रहती थी। इसी दौरान उन्होंने कुछ नया करने की ठानी और बागवानी की दिशा में कदम बढ़ाया। पूरी जानकारी जुटाने के बाद उन्होंने नाशपाती की खेती शुरू करने की योजना बनाई।
विशेषज्ञों से सलाह और पूरी तैयारी
नाशपाती की खेती शुरू करने से पहले सुशील ने इसके बारे में बारीकी से जानकारी इकट्ठा की। उन्होंने विशेषज्ञों से राय ली और यह समझा कि इस फसल के लिए किस तरह की मिट्टी और जलवायु अनुकूल रहती है। पूरी तैयारी कर लेने के बाद उन्होंने अपने खेत में नाशपाती के पौधे रोपे।
मेहनत से बदली धारणा
सुशील के अनुसार, शुरुआत में लोगों को यकीन नहीं था कि गोंडा जैसे इलाके में नाशपाती की सफल खेती संभव है। लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत और सही तकनीक के दम पर इस सोच को बदल दिया। समय-समय पर पौधों की देखभाल, सिंचाई और पोषण पर खास ध्यान दिया गया, जिसका बेहतर नतीजा सामने आया। सुशील कहते हैं कि इन दिनों उनकी नाशपाती में फल आ चुका है।
सभी 50 पौधे सुरक्षित
सुशील निषाद बताते हैं कि उन्होंने 50 पौधे लगाए थे और सभी सुरक्षित बचे हुए हैं। उनकी योजना आगे इसे और बढ़ाने की है, क्योंकि नाशपाती आमदनी का एक अच्छा विकल्प है और बाजार में इसकी मांग भी बनी रहती है।
बागवानी से दोहरा फायदा
सुशील का मानना है कि अगर किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागवानी और नई फसलों को अपनाएं तो उनकी कमाई बढ़ सकती है। उनका कहना है कि खेत के चारों ओर नाशपाती लगाने से यह बाड़ का भी काम करती है, जिससे छुट्टा जानवर खेत में नहीं घुस पाते।
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