आटा, मैदा, सूजी और बेसन: इनमें सबसे सेहतमंद कौन और किससे होता है शरीर को सबसे ज्यादा नुकसान?

रोजमर्रा के खानपान में इस्तेमाल होने वाले आटा, मैदा, सूजी और बेसन में पोषण के लिहाज से कौन बेहतर है, इस पर डाइटिशियन की राय। फाइबर और प्रोटीन के मामले में गेहूं का आटा और बेसन सबसे आगे, जबकि अल्ट्रा प्रोसेस्ड होने के कारण मैदा सबसे नुकसानदायक माना गया है।

रोटी, पराठा, ब्रेड, समोसा, हलवा, चीला और ढोकला जैसे तमाम स्वादिष्ट व्यंजन आटा, मैदा, सूजी और बेसन से ही तैयार होते हैं। इनमें गेहूं का आटा सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाता है, वहीं जंक फूड में मैदा का खूब उपयोग होता है। ऐसे में अक्सर यह सवाल मन में आता है कि इन चारों में सेहत के लिहाज से सबसे अच्छा विकल्प कौन-सा है और किसका ज्यादा सेवन शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है।

नोएडा स्थित डाइट मंत्रा क्लीनिक की फाउंडर और डाइटिशियन कामिनी सिन्हा के अनुसार, किसी भी चीज की गुणवत्ता इस पर निर्भर करती है कि उसमें फाइबर, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स कितनी मात्रा में हैं। यह भी मायने रखता है कि वह ब्लड शुगर को कितनी तेजी से बढ़ाती है और पाचन तंत्र पर उसका कैसा असर पड़ता है। ज्यादातर लोग रोजाना आटा और मैदा का सेवन करते हैं, जबकि सूजी और बेसन भी समय-समय पर खूब इस्तेमाल होते हैं। चारों चीजों में पोषक तत्वों की मात्रा अलग-अलग होने के कारण ही इन्हें हेल्दी या अनहेल्दी माना जाता है।

गेहूं का आटा सेहत के लिए कैसा है

डाइटिशियन के मुताबिक, साबुत गेहूं का आटा पोषण के मामले में सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है। इसमें फाइबर, बी-विटामिन, आयरन, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट पर्याप्त मात्रा में मौजूद रहते हैं। फाइबर पाचन को दुरुस्त रखता है, कब्ज की शिकायत को कम करता है और लंबे समय तक पेट भरा होने का अहसास कराता है। रोजाना रोटी खाने वालों के लिए गेहूं का आटा मैदा की तुलना में बेहतर है, क्योंकि यह ब्लड शुगर को तेजी से नहीं बढ़ाता और वजन को भी नियंत्रण में रखता है।

प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत है बेसन

एक्सपर्ट बताती हैं कि बेसन चने की दाल से तैयार होता है और इसमें गेहूं के आटे की तुलना में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है। यही वजह है कि बेसन से बना चीला या दूसरे व्यंजन हेल्दी स्नैक माने जाते हैं। बेसन की एक खासियत यह भी है कि यह ग्लूटेन-फ्री होता है। जिन लोगों को ग्लूटेन से जुड़ी समस्या होती है, उनके लिए यह बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। इसमें मौजूद प्रोटीन और फाइबर भूख को काबू में रखने में मदद करते हैं, जिससे ओवरईटिंग से बचाव होता है।

सूजी आटे जितनी पौष्टिक नहीं

डाइटिशियन कामिनी का कहना है कि सूजी भी गेहूं से ही बनती है, लेकिन इसे तैयार करने की प्रक्रिया में अनाज के कुछ हिस्से अलग हो जाते हैं, जिससे इसमें फाइबर की मात्रा घट जाती है। इसी कारण पोषण के मामले में सूजी को साबुत आटे से नीचे रखा जाता है। हालांकि सूजी ज्यादा नुकसानदायक नहीं है। इससे बने उपमा या इडली जैसे व्यंजन हल्के और आसानी से पचने वाले होते हैं। जिन लोगों को डायबिटीज है या जो वजन घटाने की कोशिश में हैं, उन्हें सूजी कम खानी चाहिए।

मैदा क्यों है सबसे ज्यादा नुकसानदायक

एक्सपर्ट साफ कहती हैं कि मैदा अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स की श्रेणी में आता है। इसे बनाते समय गेहूं का चोकर और जर्म पूरी तरह हटा दिया जाता है, जिससे अधिकांश फाइबर, विटामिन और मिनरल्स नष्ट हो जाते हैं। इसके बाद मैदा मुख्य रूप से सिर्फ स्टार्च का स्रोत रह जाता है। मैदा से बनी चीजें जैसे व्हाइट ब्रेड, पेस्ट्री, पिज्जा बेस और कई बेकरी उत्पाद जल्दी पच जाते हैं, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है। फाइबर की कमी की वजह से पेट जल्दी खाली महसूस होता है और बार-बार भूख लगती है। लंबे समय तक अधिक मात्रा में मैदा खाने से मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस और मेटाबॉलिक समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

आखिर सबसे हेल्दी विकल्प कौन-सा

डाइटिशियन के अनुसार, अगर पोषण, फाइबर, प्रोटीन और सेहत पर असर के आधार पर तुलना की जाए तो गेहूं का आटा और बेसन सबसे बेहतर विकल्प माने जा सकते हैं। गेहूं का आटा रोजमर्रा की डाइट के लिए संतुलित रहता है, जबकि बेसन अतिरिक्त प्रोटीन और फाइबर देता है। सूजी को सीमित मात्रा में अपनी डाइट में शामिल किया जा सकता है, लेकिन मैदा का सेवन जितना कम हो, उतना ही अच्छा माना जाता है। विशेषज्ञ हमेशा कम प्रोसेस्ड और अधिक फाइबर वाले विकल्प चुनने की सलाह देते हैं।

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