ग्रेट निकोबार पर बढ़ेगी भारतीय सेना की पकड़, चीन की समुद्री राह पर रहेगी पैनी नजर

देश के सबसे दक्षिणी द्वीप ग्रेट निकोबार को भारत एक बड़े रणनीतिक केंद्र के रूप में विकसित कर रहा है, जहां गहरे पानी का बंदरगाह, अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और आधुनिक राडार सिस्टम तैयार किए जा रहे हैं। मलक्का स्ट्रेट के नजदीक होने के कारण यह परियोजना चीन की समुद्री गतिविधियों पर निगरानी रखने में अहम भूमिका निभा सकती है।

भारत अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के ग्रेट निकोबार द्वीप को एक बड़े रणनीतिक केंद्र के रूप में आकार दे रहा है। देश के सबसे दक्षिणी छोर पर स्थित यह परियोजना सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। चीन के बढ़ते समुद्री प्रभाव को देखते हुए इस परियोजना की अहमियत और भी बढ़ जाती है।

चीन के सामने मजबूत होगी भारत की स्थिति

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यदि भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ता है, तो ग्रेट निकोबार भारत को रणनीतिक बढ़त दिला सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह इसका मलक्का स्ट्रेट के बेहद करीब होना है, जो दुनिया के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।

इस द्वीप पर भारत एक नया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, गहरे पानी का बंदरगाह और कई आधुनिक सुविधाएं विकसित कर रहा है। यह हवाई अड्डा सैन्य और नागरिक, दोनों प्रकार के विमानों के संचालन के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही उन्नत राडार प्रणाली लगाकर समुद्री हलचल पर निगरानी की क्षमता को भी मजबूत किया जा रहा है।

चीन की हर हलचल पर रहेगी निगाह

चीन का बड़ा हिस्सा तेल और व्यापारिक माल मलक्का मार्ग से ही गुजरता है, इसी कारण मलक्का स्ट्रेट उसके लिए बेहद अहम है। ऐसे में ग्रेट निकोबार में भारत की मजबूत मौजूदगी चीन की समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने और उसकी सप्लाई चेन को नियंत्रित करने में सहायक साबित हो सकती है।

द्वीप के गलाथिया खाड़ी क्षेत्र में एक बड़ा कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट तैयार किया जा रहा है। पूरा होने पर यह भारत के सबसे बड़े बंदरगाहों में शुमार हो सकता है। इससे भारत को सिंगापुर, मलेशिया और श्रीलंका के बंदरगाहों पर निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी।

नया शहर बसाने की तैयारी

सरकार इस क्षेत्र में एक नया शहर बसाने और वहां बड़ी आबादी को बसाने की योजना पर काम कर रही है। कुछ समर्थकों का मानना है कि आने वाले दशकों में ग्रेट निकोबार अगला हांगकांग बन सकता है। इस परियोजना से भारत को आर्थिक लाभ की भी उम्मीद है। जहाजों को ईंधन, मरम्मत, वेयरहाउसिंग और अन्य सेवाएं देकर भारत राजस्व कमा सकता है, साथ ही पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

हालांकि इस परियोजना को लेकर चिंताएं भी जताई जा रही हैं। ग्रेट निकोबार घने जंगलों, दुर्लभ जीव-जंतुओं और आदिवासी समुदायों का घर है। यहां रहने वाली शोम्पेन जनजाति दुनिया के सबसे अलग-थलग समुदायों में गिनी जाती है।

पर्यावरण को लेकर सवाल

पर्यावरण के जानकारों का कहना है कि बड़े पैमाने पर बनने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर जंगलों और समुद्री जीवों को नुकसान पहुंचा सकता है। तेल रिसाव, जहाजों की बढ़ती आवाजाही और सैन्य गतिविधियां भी पर्यावरण के लिए खतरा बन सकती हैं। कुछ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह इलाका भूकंप और सुनामी के जोखिम वाला क्षेत्र है, इसलिए विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी।

इन आशंकाओं के बावजूद सरकार का मानना है कि यह परियोजना देश की अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति को मजबूती देगी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) भी इस परियोजना को मंजूरी दे चुका है और इसे राष्ट्रीय हित से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बता चुका है।

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