OPINION: अखिलेश के अपने ही दांव को सीएम योगी ने 'बुलडोजर' रफ्तार से किया चकनाचूर!

अदिति यादव पर सोशल मीडिया की आपत्तिजनक पोस्ट के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ के तुरंत एफआईआर वाले एक्शन ने सपा की पूरी सियासी रणनीति को पलट दिया, जिससे अखिलेश यादव बैकफुट पर आ गए।

उत्तर प्रदेश की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप कोई नई बात नहीं है, मगर सोशल मीडिया से शुरू हुआ एक ताजा विवाद देखते ही देखते सूबे के सबसे बड़े राजनीतिक टकराव में बदल गया। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा के मुद्दे पर लगातार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को घेरने की रणनीति बना रहे थे। लेकिन सीएम योगी ने एक झटके में सपा प्रमुख के बुने इस चक्रव्यूह को ध्वस्त कर दिया।

अखिलेश यादव ने अपनी बेटी पर हुई अभद्र टिप्पणी को लेकर इशारों-इशारों में सीएम योगी और पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा था- 'जिनका खुद का परिवार नहीं, वो परिवार का दर्द क्या समझेंगे।' मगर जैसे ही सीएम योगी की नजर सोशल मीडिया पर अखिलेश की बड़ी बेटी अदिति यादव को निशाना बनाकर डाली गई आपत्तिजनक और भ्रामक पोस्ट पर पड़ी, उन्होंने तत्काल एफआईआर दर्ज करने के आदेश दे दिए। सीएम ने कहा- 'बेटी बेटी होती है, चाहे वह किसी की भी बेटी क्यों न हो, बेटी पर अभद्र टिप्पणी बर्दाश्त नहीं।'

विवाद की शुरुआत

9 जून को सोशल मीडिया पर भरत कुमार पटेल नाम के एक यूजर के हैंडल से अखिलेश यादव की बेटी अदिति यादव को लेकर एक बेहद भ्रामक और मॉर्फ्ड तस्वीर के साथ पोस्ट साझा की गई। अदिति यादव लंदन की यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में राजनीति की पढ़ाई कर रही हैं। इस पोस्ट में उन पर झूठे और मनगढ़ंत आपराधिक आरोप मढ़े गए थे। अखिलेश यादव ने बेटी पर की गई इस अभद्र टिप्पणी को एक साजिश करार दिया।

अखिलेश यादव ही नहीं, बल्कि पूरी समाजवादी पार्टी इस मुद्दे पर भाजपा और योगी सरकार को घेरने की तैयारी में जुटी थी, तभी 'बुलडोजर बाबा' ने इतना अप्रत्याशित और कड़ा रुख अपना लिया कि विपक्ष के सारे तरकश खाली हो गए।

योगी आदित्यनाथ का 'सरप्राइज' एक्शन

पोस्ट के वायरल होते ही समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश फैल गया। पार्टी इसे भाजपा समर्थित आईटी सेल की करतूत बताकर सरकार के खिलाफ बड़ा माहौल खड़ा करने की योजना बना रही थी। लेकिन जैसे ही यह मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में आया, उन्होंने राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को किनारे रखते हुए कानून का राज स्थापित करने का संदेश दिया।

उन्होंने तुरंत यूपी पुलिस की साइबर सेल को एफआईआर दर्ज करने और आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजने का आदेश दिया। कानपुर कमिश्नरेट की साइबर सेल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए भारतीय न्याय संहिता की धारा 79 और 336 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया।

मंच से योगी का बयान

इसके तुरंत बाद आजमगढ़ की एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने मंच से जो कहा, उसने पूरी बाजी पलट दी। उन्होंने कहा-

मैंने पिछले दिनों देखा कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर अखिलेश यादव की बेटी के खिलाफ गलत टिप्पणियां कर रहे थे। जैसे ही यह मेरे संज्ञान में आया, मैंने तत्काल पुलिस से कहा कि इसमें एफआईआर दर्ज कराओ। बेटी तो बेटी होती है और अपमानजनक टिप्पणी किसी के खिलाफ भी स्वीकार नहीं की जाएगी। हम उस संस्कार में पले-बढ़े हैं जहां माना जाता है कि गांव की बेटी सबकी बेटी होती है।

सपा की नसीहत पर तीखा पलटवार

सपा ने इसे मुद्दा बनाते हुए कहा था कि 'चेलों को समझाओ, नहीं तो हम समझाएंगे'। हालांकि सीएम योगी ने अपने कड़े स्टैंड के साथ ही अखिलेश यादव पर तीखा राजनीतिक पलटवार भी किया और उन्हें अपने कार्यकर्ताओं की भाषा पर लगाम कसने की नसीहत दे डाली।

सीएम योगी ने साफ कहा कि अखिलेश जी दूसरों को तो खूब उपदेश देते हैं, मगर अपने 'चेले-चपाटों' को भी भाषा सुधारने की ट्रेनिंग दें। तंज कसते हुए उन्होंने कहा, 'बेहतर होगा कि आप उन्हें समझा लें, और अगर वे फिर भी न समझें, तो उन्हें हमारे हवाले कर दें। हम उन्हें अच्छे से समझा देंगे।'

एक तीर से दो शिकार

यूपी चुनाव से ठीक पहले योगी आदित्यनाथ ने इस कदम से 'एक तीर से दो शिकार' किए हैं। पहला, उन्होंने फौरन एफआईआर करवाकर यह साबित किया कि महिला सुरक्षा और सम्मान के मामले में उनकी सरकार बिना किसी भेदभाव के काम करती है। दूसरा, उन्होंने अखिलेश यादव को रक्षात्मक रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया, क्योंकि अब समाजवादी पार्टी के पुराने बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट्स को लेकर भाजपा उन पर हमलावर हो गई है।

यही वजह है कि जो मुद्दा सरकार को घेरने के लिए तैयार किया जा रहा था, उसे 'बुलडोजर बाबा' की तेज, प्रशासनिक और राजनीतिक सूझबूझ ने एक ही झटके में चकनाचूर कर दिया।

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