एक साधारण दरोगा शायद ही अपने पूरे सेवाकाल में किसी IAS या IPS अधिकारी के साथ इत्मीनान से बैठकर चाय की चुस्की ले पाता हो। लेकिन भोजपुर जिले के बागमझौवा गांव के रिटायर्ड दरोगा अनिल सिंह की कहानी कुछ अलग ही है। हर सुबह वे अपने IAS बेटे और IPS बहू के साथ चाय पीते हैं, और आज उनका परिवार पूरे जिले में कामयाबी की मिसाल बन गया है।
अफसरों वाला गांव
बिहार के भोजपुर जिले का यह छोटा सा गांव बागमझौवा आज पूरे प्रदेश में IAS-IPS की खान के नाम से पहचाना जाता है। इसी गांव के रिटायर्ड सब-इंस्पेक्टर अनिल सिंह अपने परिवार की उपलब्धियों पर गर्व महसूस करते हैं। उनकी यह कहानी सिर्फ किस्मत की नहीं, बल्कि संस्कार, परिश्रम और शिक्षा की ताकत का प्रतीक बन चुकी है।
परिवार के हर सदस्य ने बनाई पहचान
अनिल सिंह ने वर्षों तक पुलिस विभाग में दरोगा के रूप में सेवाएं दीं। उनकी पत्नी पुष्पा देवी एक साधारण गृहिणी हैं, मगर बच्चों को संस्कार और शिक्षा देने में उनकी भूमिका सबसे अहम मानी जाती है।
बड़े बेटे अपूर्व कुमार सिंह इस समय दिल्ली में चुनाव आयोग में IAS अधिकारी के तौर पर तैनात हैं। उनकी पत्नी सीमा तोमर दिल्ली पुलिस में ACP के पद पर कार्यरत हैं। परिवार के दूसरे बेटे अतुल सिंह ने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है, जबकि उनकी पत्नी रौशनी सिंह एक निजी बैंक में अधिकारी हैं। वहीं परिवार के सदस्य सुनील कुमार सिंह और उनकी पत्नी मुखिया निक्की देवी भी गांव और समाज में अपना खास स्थान रखते हैं।
'पहले सैल्यूट करता था, अब साथ चाय पीता हूं'
लोकल 18 से बातचीत के दौरान रिटायर्ड दरोगा अनिल सिंह भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि वे खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं, पर उनकी किस्मत से कहीं ज्यादा अहम उनके बच्चों की मेहनत और लगन है, जिसके दम पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया।
मैंने अपने जीवन भर IPS अधिकारियों को सैल्यूट किया, लेकिन कभी सोचा नहीं था कि एक दिन मेरी बहू खुद IPS अधिकारी बनेगी और बेटा IAS अफसर। अब मैं गर्व से अपने बेटे और बहू को सैल्यूट करता हूं।
गांव के लोगों का कहना है कि अनिल सिंह ने हमेशा अपने बच्चों को अनुशासन, पढ़ाई और ईमानदारी का पाठ पढ़ाया। शायद यही वजह है कि आज उनका परिवार पूरे भोजपुर के लिए प्रेरणा बन चुका है।
सीमा तोमर की सफलता की कहानी
सीमा तोमर ने NIT श्रीनगर से केमिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2023 की आरक्षित सूची में 86वीं रैंक हासिल की थी और फिलहाल दिल्ली में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर कार्यरत हैं। ससुर अनिल सिंह बताते हैं कि सीमा की लगातार अनुशासित मेहनत और समर्पण ने ही उन्हें सिविल सेवा परीक्षा में कामयाबी दिलाई। उन्होंने भूगोल को वैकल्पिक विषय के रूप में चुना था और कड़ी मेहनत के बल पर यह उपलब्धि अर्जित की।
युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत
भोजपुर का बागमझौवा गांव इससे पहले भी कई IAS और IPS अधिकारी देश को दे चुका है। यही कारण है कि लोग अब इसे अफसरों वाला गांव भी कहने लगे हैं। यहां के युवाओं के लिए अनिल सिंह का परिवार किसी प्रेरणास्रोत से कम नहीं है, और गांव के बच्चे अब इस परिवार को देखकर बड़े सपने देखने लगे हैं।
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