यूं ही नहीं हुई सहमति: ईरान ने अमेरिका के आगे रखीं ये 14 शर्तें, जिन्हें मानने को राजी हुए ट्रंप

108 दिन की हिंसा के बाद ईरान और अमेरिका स्थायी युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं और 19 जून को जिनेवा में पीस डील पर हस्ताक्षर होंगे। ईरानी मीडिया के मुताबिक इस समझौते के पीछे 14 शर्तें हैं, जिनमें तेल पर लगी पाबंदियां हटाना और अरबों डॉलर जारी करना शामिल है।

108 दिन तक चले खूनी टकराव के बाद आखिरकार ईरान और अमेरिका स्थायी युद्धविराम के लिए तैयार हो गए हैं। दोनों देशों के बीच जारी जंग अब थम चुकी है और दुनिया पर लगी तेलबंदी हटाए जाने का वक्त आ गया है। खबरों के मुताबिक 19 जून (शुक्रवार) को स्विट्ज़रलैंड के शहर जिनेवा में दोनों पक्ष शांति समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर करेंगे।

तेल पर लगी रोक हटे और नाकेबंदी का अंत हो

इसी बीच ईरानी मीडिया ने अमेरिका के साथ हुए इस समझौते से जुड़ी 14 शर्तों की जानकारी सार्वजनिक की है। इन रिपोर्टों के अनुसार, अंतिम दौर की बातचीत तब तक आरंभ नहीं होगी, जब तक 12 अरब डॉलर जारी नहीं किए जाते, तेल पर लगी पाबंदियां नहीं हटतीं और नाकेबंदी पूरी तरह खत्म नहीं हो जाती।

ईरान की ओर से रखी गईं ये 14 शर्तें

  1. ईरान के तेल, पेट्रोकेमिकल्स और इनसे संबंधित निर्यात पर लगाई गई पाबंदियां हटाई जाएंगी।
  2. ईरान को अपने वित्तीय संसाधनों तक दोबारा पूरी पहुंच मिलेगी।
  3. 60 दिनों की बातचीत के दौरान ईरान के फ्रीज़ किए गए 24 अरब डॉलर जारी किए जाएंगे, जिनमें से 12 अरब डॉलर बातचीत शुरू होने से पहले ही दे दिए जाएंगे।
  4. अमेरिका और उसके सहयोगियों को ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की योजनाएं पेश करनी होंगी।
  5. लेबनान समेत हर मोर्चे पर युद्ध तत्काल और स्थायी रूप से बंद किया जाएगा।
  6. अमेरिका ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने और उसकी संप्रभुता का सम्मान करने का वचन देगा।
  7. अमेरिका द्वारा लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी 30 दिनों के भीतर पूरी तरह हटा दी जाएगी।
  8. अमेरिकी सेनाएं ईरान से सटे इलाकों से वापस लौट जाएंगी।
  9. होर्मुज स्ट्रेट को ईरान की व्यवस्था के तहत 30 दिनों के भीतर फिर से खोला जाएगा।
  10. परमाणु विवाद सुलझाने और पाबंदियां पूरी तरह हटाने पर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए 60 दिनों की बातचीत शुरू होगी।
  11. ईरान परमाणु हथियार न बनाने की अपनी NPT प्रतिबद्धता को दोबारा दोहराएगा।
  12. अमेरिका बातचीत के दौरान क्षेत्र में सेना न बढ़ाने और नई पाबंदियां न लगाने पर राजी होगा।
  13. एक निगरानी तंत्र पूरी प्रक्रिया पर नज़र रखेगा और किसी भी अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव से मंज़ूरी दिलाई जाएगी।
  14. ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और रेसिस्टेंस ग्रुप को मिलने वाले समर्थन पर कोई बातचीत नहीं की जाएगी।

क्या इस समझौते से नेतन्याहू संतुष्ट हैं?

सबसे अहम सवाल यही है कि क्या इस डील से इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू खुश हैं। दरअसल ईरान की शर्तों में सबसे ऊपर लेबनान का नाम है, जबकि महज 24 घंटे पहले इजरायल ने बेरूत में एक बार फिर बमबारी की है। ऐसे में देखना होगा कि क्या ट्रंप नेतन्याहू को मना पाएंगे और क्या इजरायली सेना लेबनान से पीछे हटेगी।

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