हिंदू पंचांग के अनुसार हर तीन वर्ष में आने वाला पुरुषोत्तम मास, जिसे अधिक मास भी कहा जाता है, बेहद पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। इस बार पुरुषोत्तम मास का समापन 15 जून 2026 को हो रहा है और इसी दिन एक विरला योग बन रहा है, क्योंकि इस मास का अंतिम दिन सोमवती अमावस्या के साथ जुड़ गया है। ज्योतिष के जानकार बताते हैं कि ऐसा दुर्लभ संयोग लगभग 30 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आया है। आध्यात्मिक उन्नति और पितरों की कृपा पाने के लिए यह दिन सर्वोत्तम बताया गया है।
विष्णु और पितृ कृपा का दुर्लभ मेल
ज्योतिषाचार्य पं. धीरज शर्मा के अनुसार पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु को समर्पित होता है, जबकि सोमवती अमावस्या पितरों की शांति और मोक्ष से जुड़ी मानी जाती है। इन दोनों का एक ही दिन पड़ना शुभ संकेत है। उनका कहना है कि इस विशेष दिन किए गए जप, तप, दान और अनुष्ठान का फल साधारण दिनों की तुलना में कई गुना अधिक मिलता है।
यदि किसी कारणवश आप पवित्र नदियों में स्नान नहीं कर पा रहे हैं, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाकर स्नान करना अत्यंत शुभ माना गया है। स्नान के बाद पितरों का स्मरण कर प्रार्थना करना कल्याणकारी होता है।
पीपल के वृक्ष का उपाय और उसका महत्व
ज्योतिष शास्त्र में अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष की पूजा का विशेष विधान बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन दोपहर के समय पीपल की जड़ में कच्चे दूध में काले तिल मिलाकर अर्पित करना चाहिए। चूंकि पीपल के पेड़ में त्रिदेवों का वास माना जाता है, इसलिए यहां दूध और तिल चढ़ाने से पितृ दोष का शमन होता है और घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
इसके साथ ही शाम के समय पीपल के नीचे घी का दीपक जलाना यानी दीपदान करना सुख-समृद्धि के द्वार खोलने वाला माना गया है।
भगवान शिव की आराधना और अन्य उपाय
सोमवती अमावस्या पर भगवान शिव की पूजा अत्यंत लाभकारी मानी जाती है। श्रद्धालुओं को शिवलिंग पर जल और कच्चा दूध अर्पित करना चाहिए। पूरे दिन “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और भाग्य का उदय होता है।
इस दिन जरूरतमंदों को भोजन कराना, पक्षियों को दाना देना और गौ माता को ग्रास खिलाना भी पुण्यदायी बताया गया है। ये छोटे-छोटे उपाय जीवन में शांति और परिवार की खुशहाली के लिए बेहद प्रभावी माने जाते हैं।
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