ईरान के साथ टकराव थमने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ध्यान एक बार फिर रूस-यूक्रेन युद्ध की ओर मुड़ गया है। ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर लंबी बातचीत में स्पष्ट किया कि यूक्रेन में जारी जंग को रोकना बेहद जरूरी है और वह इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब फ्रांस में जी-7 शिखर सम्मेलन शुरू होने वाला है और पूरी दुनिया की नजरें यूक्रेन युद्ध के भविष्य पर टिकी हैं।
ईरान डील पर लगी मुहर
लंबे इंतजार के बाद आखिरकार अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बन गई। भारतीय समय के अनुसार सोमवार तड़के इस समझौते की जानकारी देते हुए ट्रंप ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पर चल रही नाकेबंदी अब पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। इसके साथ ही पेट्रोल और गैस की किल्लत से जूझ रही दुनिया के सामने खड़ी एक बड़ी परेशानी भी टल जाएगी।
पुतिन से 55 मिनट की बातचीत
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने क्रेमलिन के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव के हवाले से बताया कि ट्रंप और पुतिन के बीच करीब 55 मिनट तक बातचीत चली। इस दौरान ट्रंप ने युद्धविराम की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि वह यूरोपीय देशों और यूक्रेन के साथ मिलकर कोई हल निकालने को तैयार हैं। उन्होंने संकेत दिया कि जी-7 सम्मेलन के दौरान भी इस मुद्दे पर अहम चर्चा हो सकती है।
ईरान से यूक्रेन तक पहुंची चर्चा
इस फोन कॉल का एक बड़ा हिस्सा ईरान को लेकर भी रहा। उशाकोव के मुताबिक भारतीय समय के अनुसार रविवार रात हुई बातचीत में ट्रंप ने पुतिन को बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता अंतिम चरण में है और कठिन बातचीत के बाद जल्द सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।
माना जा रहा है कि ईरान के साथ तनाव कम होने के बाद अब अमेरिका अपनी कूटनीतिक ऊर्जा यूक्रेन संकट पर केंद्रित करना चाहता है। यही कारण है कि ट्रंप ने पुतिन से बातचीत में यूक्रेन युद्ध को प्राथमिकता देने का संदेश दिया। अमेरिका की ओर से लंबे समय से मध्यस्थता के प्रयास जारी हैं, लेकिन बीते कुछ महीनों में ईरान संकट के चलते यह प्रक्रिया धीमी पड़ गई थी।
क्या बातचीत के लिए तैयार है रूस?
क्रेमलिन ने संकेत दिए हैं कि रूस बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं करना चाहता। ट्रंप और पुतिन की वार्ता के बाद यह जानकारी भी सामने आई कि अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर जल्द ही एक बार फिर रूस का दौरा कर सकते हैं। ये दोनों नेता पहले भी यूक्रेन शांति वार्ता में अहम भूमिका निभा चुके हैं।
हालांकि रूस अब भी अपने पुराने रुख पर कायम नजर आ रहा है। पुतिन का मानना है कि यूक्रेन और उसके यूरोपीय सहयोगी युद्ध को जानबूझकर लंबा खींच रहे हैं, जबकि कीव लगातार रूस पर नए हमले कर रहा है। ऐसे में शांति वार्ता की राह आसान नहीं मानी जा रही।
जेलेंस्की से भी हुआ संपर्क
खास बात यह रही कि पुतिन से बातचीत के अलावा ट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से भी संपर्क साधा। दोनों नेताओं के बीच युद्ध की मौजूदा स्थिति और शांति प्रक्रिया को लेकर चर्चा हुई। जेलेंस्की ने बाद में कहा कि उन्होंने ट्रंप के साथ शांति की संभावनाओं पर विस्तार से बात की और जी-7 सम्मेलन के दौरान आमने-सामने मुलाकात पर भी सहमति बनी है।
क्या अब थमेगी जंग?
रूस-यूक्रेन युद्ध को चार साल से अधिक का समय बीत चुका है। इसे रोकने के लिए कई दौर की बातचीत विफल हो चुकी है और दोनों पक्षों के बीच भरोसे की भारी कमी बनी हुई है। ऐसे में सिर्फ ट्रंप और पुतिन के बीच एक फोन बातचीत से तत्काल युद्धविराम की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी।
हालांकि यह जरूर माना जा रहा है कि अगर ईरान मुद्दे पर अमेरिका को कूटनीतिक सफलता मिलती है, तो ट्रंप प्रशासन यूक्रेन में भी किसी बड़े समझौते की कोशिश तेज कर सकता है। फिलहाल दुनिया की निगाहें फ्रांस में होने वाले जी-7 सम्मेलन पर टिकी हैं, जहां ट्रंप, जेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं के बीच होने वाली बातचीत से यूक्रेन युद्ध को लेकर कोई नई दिशा निकल सकती है।
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