गांव की प्यास बुझाने निकले दो किसान, फसल छोड़ी पर 5 हजार लोगों को दे रहे पानी

खंडवा के बांगड़दा गांव में दो किसानों ने इस बार गर्मी की फसल छोड़कर अपने कुएं पंचायत की टंकी से जोड़ दिए, जिससे करीब 4 से 5 हजार लोगों को लगातार पीने का पानी मिल रहा है।

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के बांगड़दा गांव में हर साल गर्मी की दस्तक के साथ ही पानी की किल्लत गहराने लगती थी। मार्च का महीना आते-आते नलकूप दम तोड़ देते और गांव के हजारों लोगों को पीने के पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ता था। लेकिन इस बार गांव के दो किसानों ने ऐसी पहल की, जिसने पूरे गांव की तस्वीर ही बदल कर रख दी।

तेज गर्मी के इस दौर में जब लोग पानी की एक-एक बूंद को तरस रहे हैं, वहीं बांगड़दा में करीब 4 से 5 हजार लोगों तक लगातार पानी पहुंच रहा है। यह सब मुमकिन हुआ है गांव के दो किसानों की निस्वार्थ भावना और त्याग की वजह से, जिन्होंने अपने निजी फायदे को किनारे रखकर पूरे गांव की प्यास बुझाने का बीड़ा उठाया।

एक चर्चा से शुरू हुई बदलाव की कहानी

गांव में जब पानी का संकट गंभीर रूप लेने लगा, तब सरपंच राजसिंह पटेल ने किसान लोकेश गुर्जर से इस बारे में बात की। हालात की गंभीरता को भांपते हुए लोकेश ने अपने परिवार और खासकर अपनी मां सुशीला देवी से सलाह-मशविरा किया और एक बड़ा निर्णय ले लिया।

लोकेश ने इस बार अपने खेत में गर्मी की फसल नहीं बोई और अपने कुएं को पंचायत के ओवरहेड टैंक से जोड़ दिया, ताकि गांव को पानी मिल सके। इसके बाद गांव के एक और किसान जगदीश पटेल भी आगे आए और उन्होंने भी अपने कुएं से पानी देने का फैसला किया। इन दोनों किसानों के कुओं से गांव की टंकियों में लगातार पानी की आपूर्ति हो रही है, जिससे पूरे गांव को बड़ी राहत मिल रही है।

आर्थिक नुकसान भी उठाया

बीते तीन महीने से इन कुओं का पानी लगातार गांव की प्यास बुझा रहा है। खास बात यह है कि इन किसानों ने अपनी फसल तक छोड़ दी, जिसकी वजह से उन्हें आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। इसके बावजूद उन्होंने अपने हित से ऊपर गांव के हित को तरजीह दी।

गांव के निवासी रविंद्र सोलंकी कहते हैं कि अगर ये दोनों किसान आगे नहीं आते, तो इस साल हालात बेहद खराब हो सकते थे। आज जो पानी उन्हें मिल रहा है, वह किसी अमृत से कम नहीं है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि इस भीषण गर्मी में, जब पानी मिलना मुश्किल हो जाता है, ऐसे समय में इन दोनों किसानों ने जो किया है, वह जीवन भर याद रखा जाएगा। पूरे गांव के लोग खुद को इन किसानों का ऋणी मानते हैं।

'जब भी संकट आएगा, मदद करते रहेंगे'

लोकेश गुर्जर की मां सुशीला देवी का कहना है कि जब भी गांव में पानी का संकट खड़ा होगा, वे इसी तरह आगे आकर मदद करती रहेंगी। यह पहल सिर्फ पानी की समस्या का हल नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक बड़ी सीख भी है कि अगर लोग मिलकर सोचें और आगे आएं, तो किसी भी बड़ी मुश्किल का समाधान निकाला जा सकता है।

बांगड़दा गांव की यह कहानी आज पूरे क्षेत्र में एक मिसाल बन चुकी है, जहां दो किसानों ने यह साबित कर दिखाया कि असली खेती सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इंसानियत और सेवा में भी होती है।

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