रेगिस्तानी इलाकों में हरियाली बढ़ाने और प्रकृति संरक्षण को नई दिशा देने के लिए अब पारंपरिक पौधारोपण के साथ-साथ सीड बॉल्स तकनीक भी कारगर साबित हो रही है। मिट्टी, जैविक खाद और बीजों से बनी ये छोटी-छोटी गोलियां बारिश के साथ जमीन में पहुंचकर अपने आप अंकुरित हो जाती हैं, जिससे कम संसाधनों में ज्यादा पौधे तैयार किए जा सकते हैं। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए जोधपुर के जुड़ गांव के पर्यावरण प्रेमी भजनलाल विश्नोई ने 363 शहीदों की स्मृति में खेजड़ी उद्यान विकसित करने की अनूठी पहल शुरू की है।
प्राकृतिक विधि से तैयार कीं खेजड़ी की सीड बॉल्स
भजनलाल विश्नोई ने खेजड़ी के संरक्षण के लिए पारंपरिक और प्राकृतिक तरीका अपनाया। उन्होंने करीब 100 वर्ष पुरानी खेजड़ी के खोखों (फलों) को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर पूरी रात पानी में भिगोया। इसके बाद इन बीजों को देसी जैविक खाद, मुरड़ और पीली मिट्टी के साथ मिलाकर हाथों से छोटी-छोटी गोलियों का रूप दिया। माना जाता है कि यह विधि बीजों को प्राकृतिक रूप से सुरक्षित रखने और उनके बेहतर अंकुरण में मददगार होती है।
बिना किसी कृत्रिम साधन के बनाई गई इन सीड बॉल्स में स्थानीय मिट्टी और जैविक तत्वों का इस्तेमाल किया गया, ताकि पौधों के विकास के लिए अनुकूल वातावरण मिल सके।
गवाई नाड़ी के पास रोपे बीज, हरित भविष्य की आस
तैयार की गई सीड बॉल्स को गवाई नाड़ी के निकट सार्वजनिक भूमि पर एक निश्चित दूरी पर रोपा गया। इस स्थान का चयन इसलिए किया गया, ताकि वर्षा जल और प्राकृतिक नमी की वजह से खेजड़ी के पौधों को बेहतर विकास का मौका मिल सके।
खेजड़ी राजस्थान की जीवनदायिनी वृक्ष प्रजातियों में गिनी जाती है, जो मरुस्थलीय क्षेत्रों में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ पशुओं के लिए चारा और लोगों को छाया देती है। भजनलाल विश्नोई की यह पहल ग्रामीण क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने, जैव विविधता को संरक्षित करने और प्रकृति के प्रति लोगों की जिम्मेदारी को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
घर पर ऐसे बनाएं सीड बॉल्स
सीड बॉल्स बनाना बेहद आसान और कम खर्चीला तरीका है, जिसके जरिए कोई भी व्यक्ति पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दे सकता है। इसके लिए सबसे पहले स्थानीय पौधों या पेड़ों के बीज एकत्र करें।
- 5 भाग बारीक मिट्टी, 3 भाग देसी जैविक खाद और 1 भाग बीज को आपस में मिलाएं।
- थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए मिश्रण से छोटे-छोटे गोल आकार की बॉल्स तैयार करें।
- इन बॉल्स को 2 से 3 दिन तक छाया में सुखाएं।
- सूखने के बाद इन्हें किसी खाली जमीन, नाड़ी, पहाड़ी क्षेत्र या सार्वजनिक स्थान पर फैला दें।
बारिश या नमी मिलते ही ये बीज अपने आप अंकुरित होने लगते हैं और धीरे-धीरे पौधे का रूप ले लेते हैं।
https://hindi.news18.com/news/rajasthan/jodhpur-a-unique-initiative-to-create-a-khejri-garden-in-memory-of-363-martyrs-in-jodhpur-local18-10570492.html