लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के यूरोलॉजी विभाग में वित्तीय गड़बड़ियों और दवा घोटाले को लेकर प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। यहां कैंसर की दवाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर हेराफेरी की जा रही थी और दिवंगत हो चुके मरीजों के नाम पर दवाओं की खपत दर्शाई गई। प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपये की अनियमितता की आशंका जताए जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन सक्रिय हुआ और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई शुरू कर दी।
तीन संविदाकर्मी तत्काल बर्खास्त
इस मामले में कुल चार लोगों पर गाज गिरी है, जिनमें तीन संविदाकर्मी शामिल हैं। प्रशासन ने इन तीनों संविदाकर्मियों को तत्काल प्रभाव से सेवा से हटा दिया है। वहीं एक स्थायी कर्मचारी, चीफ फार्मासिस्ट अरशद वसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने और निलंबन की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। इसके साथ ही संविदाकर्मियों की आपूर्ति करने वाली एजेंसी से भी नुकसान की राशि वसूलने की तैयारी है।
दो करोड़ रुपये से अधिक की गड़बड़ी का अंदेशा
प्रशासन की अंतरिम जांच रिपोर्ट के आधार पर यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष को भी उनके पद से हटा दिया गया है। शुरुआती पड़ताल में अब तक 2 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले की आशंका सामने आई है।
दवाओं की खरीद और खपत में गंभीर खामियां
जांच में पता चला कि असाध्य योजना के अंतर्गत कैंसर की दवाओं की खरीद और उनकी खपत में गंभीर अनियमितताएं की गईं। आरोप है कि कई दिवंगत मरीजों के नाम पर दवाओं की खपत दिखाई गई। रजिस्टर में किडनी के मरीजों को कैंसर रोगी के रूप में दर्शाकर दवाओं के बिल तैयार किए गए।
मृतकों के नाम पर महीनों तक बनते रहे बिल
सूत्रों के मुताबिक, जिन मरीजों की मृत्यु दिसंबर में हो चुकी थी, उनके नाम पर जनवरी, फरवरी, मार्च और अप्रैल तक दवाओं के बिल बनाए जाते रहे। अब तक करीब 40 मरीजों के मामलों में इस तरह की गड़बड़ी के संकेत मिल चुके हैं।
प्रशासन ने पुलिस को भेजा पत्र
केजीएमयू प्रशासन ने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच और एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस को पत्र भेज दिया है। पुलिस और प्रशासनिक जांच पूरी होने के बाद घोटाले की असल राशि और इसमें संलिप्त अन्य लोगों की भूमिका भी उजागर हो सकती है।
किन लोगों पर हुई कार्रवाई
जिन कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है, उनके नाम और पद सामने आ चुके हैं। इनमें तीन संविदाकर्मी और एक स्थायी कर्मचारी शामिल है।
- प्रकाश सिंह (यूरोलॉजी विभाग, संविदाकर्मी)
- हेमंत श्रीवास्तव (एलपी काउंटर IPD, संविदाकर्मी)
- सचिन तिवारी (यूरोलॉजी विभाग, संविदाकर्मी)
- अरशद वसी (चीफ फार्मासिस्ट, एलपी काउंटर IPD, स्थायी कर्मचारी)
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