कर्नाटक में इन दिनों सत्ता परिवर्तन की हलचल जोरों पर है। लंबी खींचतान के बाद सिद्दारमैया आखिरकार मुख्यमंत्री पद छोड़ने पर राजी हुए, और अब डीके शिवकुमार की ताजपोशी की तैयारियां पूरे जोश के साथ चल रही हैं। नए मुख्यमंत्री के रूप में उनके शपथ ग्रहण से पहले राजनीतिक गलियारों में जितनी बात सत्ता हस्तांतरण को लेकर हो रही है, उतनी ही उनके ज्योतिष और वास्तु पर भरोसे को लेकर भी।
समय और मंच की दिशा में अंतिम समय में फेरबदल
सूत्रों की मानें तो शपथ ग्रहण समारोह के समय, मंच की दिशा और मुख्यमंत्री कक्ष की बैठक व्यवस्था तक में ज्योतिषीय सलाह के आधार पर बदलाव किए गए। बताया जा रहा है कि समारोह का समय पहले शाम 4 बजे तय किया गया था, जिसे बाद में बदलकर 4 बजकर 5 मिनट कर दिया गया। इसके साथ ही मंच की दिशा को लेकर भी आखिरी वक्त में फेरबदल हुआ।
कहा जा रहा है कि ये सभी बदलाव मशहूर ज्योतिषी और वास्तु विशेषज्ञ वीवी आराध्य की सलाह पर किए गए।
पहले भी मानते रहे हैं ज्योतिष की बात
डीके शिवकुमार लंबे समय से ज्योतिष और वास्तु में आस्था रखने वाले नेता माने जाते हैं। मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस नेतृत्व के साथ हुई अहम मुलाकातों में भी उन्होंने ज्योतिषीय परामर्श का ध्यान रखा था। सूत्रों के अनुसार, जब वह इस मुद्दे पर राहुल गांधी से मिलने पहुंचे थे, तब भी ज्योतिष की सलाह पर उन्होंने अपनी जेब में पांच रुपये का सिक्का रखा था।
मुख्यमंत्री कक्ष में बदली कुर्सी की दिशा
शपथ ग्रहण से एक दिन पहले वीवी आराध्य ने विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कक्ष का निरीक्षण किया। करीब आधे घंटे तक कक्ष का जायजा लेने के बाद उन्होंने कुछ बदलाव सुझाए। इनमें सबसे प्रमुख सुझाव मुख्यमंत्री की कुर्सी की दिशा से जुड़ा था। मौजूदा व्यवस्था में यह कुर्सी उत्तर दिशा की ओर रखी गई थी, लेकिन आराध्य ने इसे पूर्व दिशा की ओर करने की सलाह दी। माना जाता है कि नए कार्यों की शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा के लिहाज से पूर्व दिशा शुभ मानी जाती है।
धार्मिक मान्यता से जुड़ा सुझाव
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री कक्ष में अज्जय्या की तस्वीर लगाने की भी सलाह दी गई है। शिवकुमार तुमकुरु जिले के नोनाविनाकेरे स्थित प्रसिद्ध कडासिद्धेश्वर मठ के श्रद्धालु माने जाते हैं, जिसे अज्जय्या मठ के नाम से भी जाना जाता है। बीते तीन वर्षों से उपमुख्यमंत्री के रूप में वह जिस कक्ष का इस्तेमाल कर रहे थे, वहां भी अज्जय्या की तस्वीर लगी हुई थी।
दिशा और वास्तु का रखते हैं खास ध्यान
इतना ही नहीं, शपथ ग्रहण के दौरान भी शिवकुमार को पूर्व दिशा की ओर मुख करके शपथ लेने की सलाह दी गई थी। सूत्रों का कहना है कि वह दिशा और वास्तु से जुड़ी मान्यताओं पर विशेष ध्यान देते हैं। बताया जाता है कि वह अक्सर ज्योतिषीय सलाह के अनुरूप ही विधानसभा के उत्तर द्वार से प्रवेश करते हैं। कर्नाटक की राजनीति के शीर्ष पद तक पहुंचने के साथ ही उनकी ये मान्यताएं एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं।
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