मेरठ की हरिया लस्सी: जिसका स्वाद चखने के लिए लोग कतार में खड़े रहने को भी तैयार

मेरठ के लालकुर्ती बाजार में पिछले 60 सालों से बिक रही 'हरिया की लस्सी' अपनी शुद्धता और मलाईदार स्वाद के लिए मशहूर है, जिसे चखने के लिए ग्राहकों को कई बार करीब 30 मिनट तक इंतजार करना पड़ता है।

तपती गर्मी में जब कुछ ठंडा और मलाईदार पीने को मिल जाए तो पूरा दिन तरोताजा हो जाता है। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के लालकुर्ती बाजार में सजने वाली 'हरिया की लस्सी' का स्वाद कुछ ऐसा ही है, जिसके दीवाने आम लोगों से लेकर बड़े-बड़े वीआईपी और नेताओं तक हैं। बीते 60 सालों से अपनी शुद्धता और बेमिसाल स्वाद के दम पर चर्चित इस दुकान की लस्सी इतनी गाढ़ी होती है कि लोग इसे पीते नहीं, बल्कि खाते हैं।

गर्मी में असली स्वाद की तलाश

गर्मी के मौसम में हर कोई ठंडी चीजों की तलाश में रहता है, और ऐसे में एक गिलास बढ़िया लस्सी मिल जाए तो बात ही कुछ और होती है। हालांकि आज के दौर में असली और स्वाद से भरपूर लस्सी आसानी से नहीं मिलती। अगर आप मेरठ में हैं और किसी शानदार लस्सी की तलाश में हैं, तो क्रांतिधरा मेरठ का मशहूर लालकुर्ती बाजार आपकी यह तलाश पूरी कर सकता है, जहां 'हरिया की लस्सी' ने सालों से लोगों को अपना मुरीद बना रखा है।

1965 में पड़ी थी नींव

दुकान के मालिक सुधीर कुमार बताते हैं कि उनके पिता हरिश्चंद्र जी ने साल 1965 में लस्सी बनाने का यह काम शुरू किया था। शुरुआत में उन्होंने खुद भी कभी कल्पना नहीं की थी कि छोटे स्तर पर शुरू हुआ यह सिलसिला एक दिन इतनी बड़ी पहचान बन जाएगा। आज उनकी लस्सी सिर्फ मेरठ शहर ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों और जनपदों में बड़े चाव से पसंद की जाती है।

शुद्धता ही सबसे बड़ी पूंजी

सुधीर कुमार के अनुसार इस समय मेरठ शहर के भीतर उनकी तीन दुकानें चल रही हैं, जहां हर वक्त लोग लस्सी का लुत्फ उठाते नजर आते हैं। उनकी लस्सी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह मलाईदार दही, सूखे मेवों और मावे से भरपूर होती है। असली स्वाद और शुद्धता बरकरार रखने के लिए वे बाहर से सामान मंगाने के बजाय अपनी देखरेख में खुद शुद्ध दही जमाते हैं और मावा भी स्वयं तैयार करते हैं, ताकि क्वालिटी में कहीं कोई कमी न रह जाए।

हाथ की फेंटाई से मशीनों तक का सफर

उन्होंने बताया कि जब उनके पिता ने यह काम शुरू किया था, तब पूरी लस्सी हाथों से फेंटकर बनाई जाती थी। लेकिन बदलते समय के साथ अब काम को आसान और बेहतर बनाने के लिए आधुनिक मशीनों का सहारा भी लिया जाता है। इन मशीनों के जरिए दही, मावा और चीनी को बेहतरीन तरीके से मिलाया जाता है, जिससे लस्सी गाढ़ी और लाजवाब बनती है।

कुल्हड़ में दोगुना हुआ स्वाद

मशीनों से अच्छी तरह तैयार होने के बाद इस गाढ़ी लस्सी को मिट्टी के पारंपरिक कुल्हड़ में डालकर ग्राहकों को परोसा जाता है। मिट्टी के कुल्हड़ की वजह से इसका स्वाद और भी निखर जाता है। यही कारण है कि बीते 60 सालों से न सिर्फ मेरठ बल्कि आसपास के इलाकों के लोग भी यहां खिंचे चले आते हैं। चूंकि लालकुर्ती बाजार मेरठ का एक बड़ा और प्रमुख बाजार है, इसलिए यहां दूसरे जिलों से भी बड़ी तादाद में लोग खरीदारी करने पहुंचते हैं।

क्वालिटी पर पैनी नजर

लालकुर्ती बाजार आने वाले लोग खरीदारी पूरी करने के बाद हरिया की दुकान पर लस्सी का आनंद लेना कभी नहीं भूलते। सुधीर कुमार बताते हैं कि उनका सबसे बड़ा ध्यान हमेशा इसी बात पर रहता है कि जिस शुद्धता और गुणवत्ता के दम पर उन्होंने बाजार में यह खास पहचान बनाई है, वह कभी कमजोर न पड़े। इसी क्वालिटी को बनाए रखने के लिए वे खुद और उनका बेटा पूरी मेकिंग तथा साफ-सफाई पर लगातार कड़ी नजर रखते हैं।

नेताओं और वीआईपी के बीच भी लोकप्रिय

यह लस्सी राजनीतिक गलियारों और बड़े नेताओं के बीच भी खासी पसंद की जाती है। शहर में कोई बड़ी राजनीतिक रैली हो या कोई सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजन, वहां आने वाले वीआईपी मेहमानों के लिए इस दुकान से विशेष तौर पर लस्सी मंगवाई और भेजी जाती है। इसका स्वाद चखने के बाद हर कोई तारीफ किए बिना नहीं रह पाता।

कैसे पहुंचें यहां

अगर आप भी इस लाजवाब लस्सी का स्वाद चखना चाहते हैं और दिल्ली की ओर से आ रहे हैं, तो यहां पहुंचना बेहद आसान है। आप नमो भारत ट्रेन पकड़कर सीधे 'बेगमपुल स्टेशन' पर उतर सकते हैं और वहां से लालकुर्ती बाजार की ओर बढ़ते हुए हरिया लस्सी की दुकान तक पहुंच सकते हैं। यहां भीड़ ज्यादा होने के कारण आपको अपनी लस्सी के लिए करीब 30 मिनट तक इंतजार भी करना पड़ सकता है। इसके अलावा लोग चाहें तो ऑनलाइन माध्यम से भी इसका ऑर्डर दे सकते हैं।

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