सरगुजा में गर्भवतियों के लिए जानलेवा बना अस्पताल तक का सफर, माताओं और नवजातों की जा रही जान

सरगुजा संभाग में जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाओं को अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है, जिससे रास्ते में ही कई माताओं और नवजातों की मौत हो रही है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी और रेफरल व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

सरगुजा संभाग की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर कठघरे में है। जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से बड़ी तादाद में गर्भवती महिलाओं को अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा जा रहा है। दूरदराज के इलाकों से समय पर इलाज न मिल पाने के कारण कई महिलाओं और नवजात शिशुओं की रास्ते में ही जान जाने के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसी स्थिति में स्थानीय अस्पतालों की व्यवस्था, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और पूरे रेफरल तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में बदहाल स्थिति

सरगुजा संभाग के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत लगातार चिंता का कारण बनी हुई है। सामान्य प्रसव से लेकर जटिल डिलीवरी तक के मामलों में मरीजों को जिला अस्पतालों और उप स्वास्थ्य केंद्रों से सीधे अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। इस वजह से कई बार महिलाओं को समय पर समुचित उपचार नहीं मिल पाता।

लंबा सफर बन रहा जानलेवा

दूरस्थ गांवों से अंबिकापुर तक पहुंचने में कई-कई घंटे लग जाते हैं। खराब सड़कें, समय पर एंबुलेंस न मिलना और इलाज में होने वाली देरी कई गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए जानलेवा साबित हो रही है।

बढ़ती मृत्यु दर बनी चिंता

आंकड़ों के अनुसार 100 में से 5 माताओं की जान जा रही है, वहीं शिशुओं की मृत्यु दर में भी इजाफा देखा जा रहा है। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में हो रही यह बढ़ोतरी संभाग की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन गई है।

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