डॉक्टर बनने चला था बाड़मेर का अभिनव, बदला फैसला और JEE एडवांस में पाई शानदार 420वीं रैंक

बाड़मेर के सेतराऊ गांव के अभिनव धनदे ने 11वीं में बायोलॉजी छोड़कर गणित चुना और पहले ही प्रयास में JEE एडवांस में ऑल इंडिया 420वीं रैंक हासिल की। रोजाना करीब 15 घंटे की सेल्फ स्टडी को वे अपनी कामयाबी का आधार मानते हैं।

बाड़मेर के सेतराऊ गांव के अभिनव धनदे ने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाने वाली IIT-JEE में बेहतरीन प्रदर्शन कर अपने जिले का नाम रोशन किया है। कभी डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले इस होनहार छात्र ने सिर्फ एक फैसले से अपनी राह बदली और पहले ही प्रयास में JEE एडवांस परीक्षा में ऑल इंडिया 420वीं रैंक हासिल कर ली। अभिनव अपनी इस सफलता का श्रेय नियमित सेल्फ स्टडी और अनुशासित दिनचर्या को देते हैं।

उन्होंने यह साबित कर दिया कि कामयाबी सिर्फ साधनों से नहीं, बल्कि मजबूत इरादों और लगातार मेहनत से भी पाई जा सकती है।

डॉक्टर का सपना छोड़ चुना नया रास्ता

अभिनव सहायक आचार्य बाबूलाल धनदे और एडवोकेट ज्योति धनदे के बेटे हैं। उनकी यह उपलब्धि उन छात्रों के लिए मिसाल है जो अपने करियर को लेकर दुविधा में रहते हैं। अभिनव बताते हैं कि 11वीं कक्षा में उन्होंने पहले साइंस बायोलॉजी विषय चुना था और डॉक्टर बनने का इरादा रखा था।

हालांकि पढ़ाई शुरू होने के करीब एक महीने बाद ही उन्हें अपनी असल रुचि का अंदाजा हो गया। इसके बाद उन्होंने बायोलॉजी छोड़कर साइंस मैथेमेटिक्स विषय अपनाया और IIT में दाखिले का लक्ष्य तय कर लिया। इसी दिशा में लगातार जुटे रहकर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया।

मामा से मिली प्रेरणा

अभिनव के मुताबिक, IITian बनने की प्रेरणा उन्हें अपने मामा महिपाल सेजू से मिली। मामा को देखकर ही उनके मन में IIT में पढ़ने की चाह जागी। इसके बाद उन्होंने पूरी लगन और अनुशासन के साथ तैयारी शुरू कर दी।

नियमित अध्ययन, समय प्रबंधन और निरंतर अभ्यास को उन्होंने अपनी कामयाबी का आधार बनाया। उनका मानना है कि सही दिशा में लगातार कोशिश करते रहने से कोई भी लक्ष्य पाया जा सकता है।

15 घंटे की सेल्फ स्टडी बनी कुंजी

अभिनव बताते हैं कि JEE एडवांस की तैयारी के दौरान पढ़ाई उनकी पहली प्राथमिकता बन गई थी। परीक्षा से पहले करीब 22 दिनों तक वे एक ही कमरे में रहकर तैयारी में जुटे रहे और इस दौरान मोबाइल तथा दूसरी गैरजरूरी गतिविधियों से पूरी तरह दूरी बनाए रखी।

पिछले एक वर्ष से वे सामाजिक कार्यक्रमों और पारिवारिक आयोजनों में भी शामिल नहीं हुए। उनके अनुसार, रोजाना करीब 15 घंटे की सेल्फ स्टडी और लगातार अभ्यास के दम पर ही उन्होंने ऑल इंडिया 420वीं रैंक हासिल की।

खुद की कंपनी खड़ी करने का सपना

अभिनव का सपना है कि भविष्य में वे तकनीक के क्षेत्र में अपना स्टार्टअप शुरू करें और उसे एक सफल यूनिकॉर्न कंपनी के रूप में आगे बढ़ाएं। उनका कहना है कि भारत में नवाचार और तकनीक के क्षेत्र में असीम संभावनाएं मौजूद हैं।

IIT से उच्च शिक्षा पाने के बाद वे ऐसी तकनीक और उत्पाद तैयार करना चाहते हैं जो लोगों की समस्याओं का हल देने के साथ-साथ रोजगार के नए मौके भी पैदा करें। उनका मानना है कि नौकरी करने के बजाय अपनी कंपनी खड़ी कर देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम में योगदान देना ही उनका बड़ा लक्ष्य है।

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