कहा जाता है कि मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, क्योंकि उड़ान पंखों से नहीं बल्कि हौसलों से भरी जाती है। इस बात को सरहदी बाड़मेर जिले के छोटे से गांव देवका के रहने वाले हंसराज पुरी गोस्वामी ने सच कर दिखाया है। बेहद साधारण परिवार, सीमित साधन और कदम-कदम पर खड़ी आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने REET लेवल-1 (शिक्षक भर्ती परीक्षा) में पूरे राजस्थान में प्रथम रैंक हासिल कर एक नई मिसाल कायम की है। उनकी यह उपलब्धि आज प्रदेश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।
पिता गुजरात में करते हैं मजदूरी
हंसराज की इस ऐतिहासिक कामयाबी के पीछे संघर्ष की एक लंबी और भावुक कहानी छिपी है। उनके पिता शांतपुरी गोस्वामी लकड़ी के हस्तशिल्प से जुड़े एक साधारण कारीगर हैं। गांव में रोजगार के सीमित अवसरों के चलते वे परिवार का पेट पालने के लिए गुजरात जाकर मजदूरी करते हैं। घर की माली हालत मजबूत न होने के बावजूद पिता ने कभी बेटे की पढ़ाई के रास्ते में आर्थिक तंगी को आड़े नहीं आने दिया।
परिवार ने कई अभावों और कठिनाइयों का सामना किया, मगर शिक्षा के प्रति उनका भरोसा कभी कमजोर नहीं पड़ा। पिता के इसी त्याग को हंसराज ने अपनी ताकत बनाया और पहले ही प्रयास में प्रदेश टॉपर बन गए।
14 महीने स्मार्टफोन से दूरी, रोज 12 घंटे पढ़ाई
हंसराज पुरी ने अपनी इस सफलता का सबसे बड़ा श्रेय माता-पिता के आशीर्वाद, परिवार के अटूट सहयोग और सक्सेस पॉइंट संस्थान के मार्गदर्शन को दिया है। उन्होंने बताया कि परीक्षा की तैयारी के दौरान वे रोजाना 10 से 12 घंटे पूरी एकाग्रता के साथ नियमित अध्ययन करते थे।
आज के डिजिटल दौर में जहां ज्यादातर युवा सोशल मीडिया में उलझे रहते हैं, वहीं हंसराज ने REET की 14 महीने की कड़ी तैयारी के दौरान स्मार्टफोन को छुआ तक नहीं। इस पूरे सफर में वे सिर्फ एक साधारण की-पैड फोन इस्तेमाल करते रहे, ताकि उनका ध्यान पढ़ाई से जरा भी न भटके।
आरएएस का सपना छोड़ चुनी REET की राह
हंसराज का असली सपना प्रशासनिक अधिकारी (आरएएस) बनने का था। लेकिन आरएएस की उच्च स्तरीय तैयारी और बेहतर कोचिंग के लिए उन्हें जयपुर जाना पड़ता, जिसका भारी-भरकम खर्च एक मजदूर परिवार के लिए किसी भी हाल में उठाना संभव नहीं था।
अपनी आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जिम्मेदारियों को समझते हुए हंसराज ने समय रहते अपना लक्ष्य बदला और पूरा ध्यान REET की नियमित तैयारी पर लगा दिया। इसी एकाग्रता का नतीजा रहा कि उन्होंने इस कठिन परीक्षा में 300 में से 243 अंक हासिल कर मेरिट में सबसे पहला स्थान पाया और बाड़मेर जिले का नाम पूरे राजस्थान में रोशन कर दिया।
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