गर्मियों का मौसम शुरू होते ही जिस एक चीज का सबसे बेसब्री से इंतजार रहता है, वह है ‘फलों का राजा’ आम। और जब आम की बात हो, तो उत्तर प्रदेश के मलीहाबाद के मशहूर दशहरी का जिक्र छूट ही नहीं सकता। लखनऊ के पास बसे मलीहाबाद का दशहरी आम अपनी मिठास, बेहतरीन स्वाद, पतली गुठली और लाजवाब खुशबू के कारण दुनिया भर में पहचाना जाता है। राहत की बात यह है कि मंडियों से लेकर मोहल्ले के बाजारों तक मलीहाबादी दशहरी की आमद शुरू हो चुकी है और ठेले-दुकानें पीले-हरे आमों से सजने लगी हैं।
लेकिन जैसे-जैसे इसकी मांग बढ़ती है, बाजार में बढ़ते मुकाबले और मुनाफे के चक्कर में कई बार दूसरे आमों को भी ‘मलीहाबादी दशहरी’ बताकर बेच दिया जाता है। ऐसे में एक आम-प्रेमी के तौर पर यह जान लेना बेहद जरूरी है कि असली मलीहाबादी दशहरी की पहचान कैसे की जाए। यहां कुछ आसान और घरेलू तरीके बताए जा रहे हैं, जिनसे आप असली और नकली का फर्क चुटकियों में समझ जाएंगे।
रंग से पहचान: न बहुत पीला, न बहुत हरा
अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि जो आम पूरी तरह चटख पीला हो, वही सबसे अच्छा होगा। असली धोखा यहीं होता है। असली मलीहाबादी दशहरी का रंग हल्के हरेपन के साथ पीला होता है और यह एकदम से गाढ़ा पीला नहीं दिखता।
ध्यान दें: अगर कोई आम पूरी तरह एक समान और चमकीले पीले रंग का दिखे, तो समझ जाइए कि उसे ‘कैल्शियम कार्बाइड’ जैसे केमिकल से पकाया गया है। प्राकृतिक रूप से पका दशहरी आम कहीं से हल्का हरा और कहीं से हल्का पीला नजर आएगा।
खुशबू ही सबसे बड़ी पहचान
मलीहाबादी आम की सबसे बड़ी खासियत उसकी जादुई खुशबू है। अगर आम असली है, तो उसे नाक के पास ले जाने की भी जरूरत नहीं पड़ती—उसकी महक दूर से ही दिल जीत लेती है। असली दशहरी के डंठल यानी ऊपरी हिस्से के पास से एक सोंधी, मीठी और प्राकृतिक खुशबू आती है।
इसके उलट, अगर आम को केमिकल से पकाया गया हो, तो या तो उसमें कोई खुशबू नहीं आएगी, या फिर दवा जैसी अल्कोहलिक और तीखी गंध महसूस होगी।
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