भारत में रसोई गैस की कीमत भले ही आपको ऊंची लगती हो, लेकिन पड़ोसी देश पाकिस्तान के हालात देखकर वहां के लोगों पर सहज ही तरस आ जाता है। दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान का घरेलू सिलेंडर भारत के सिलेंडर से वजन में हल्का होने के बावजूद उसका सरकारी दाम भारत से लगभग साढ़े तीन गुना अधिक है। बीते एक साल में वहां गैस की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है।
आज पाकिस्तान में आम परिवार के लिए घर का चूल्हा जलाना भी मुश्किल हो गया है। जहां भारत में घरेलू एलपीजी सिलेंडर करीब 913 रुपये में मिल रहा है, वहीं ठीक उसी समय पाकिस्तान में इससे कम वजन वाला सिलेंडर सरकारी दाम पर करीब 3,000 रुपये और खुले बाज़ार में 5,500 रुपये से भी ऊपर बिक रहा है। ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट बंद किए जाने के बाद से वहां एलपीजी की कीमतें आसमान छू रही हैं। हालात इस कदर बिगड़े कि लोग सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन तक कर चुके हैं।
वजन कम, फिर भी कीमत आसमान पर
अगर भारत और पाकिस्तान के सिलेंडरों की तुलना करें तो वजन और दाम दोनों में ज़मीन-आसमान का फर्क नज़र आता है। भारत में घरों में इस्तेमाल होने वाले सामान्य सिलेंडर का वजन 14.2 किलोग्राम होता है, जबकि पाकिस्तान का घरेलू सिलेंडर सिर्फ 11.8 किलोग्राम का होता है, जिसे वहां की आम भाषा में 12 किलो वाला सिलेंडर कहा जाता है। कम वजन होने के बावजूद वहां के लोगों को इसकी बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।
जून 2026 में भारत में सिलेंडर का सरकारी दाम 913 भारतीय रुपये है। वहीं पाकिस्तान में लोगों को सरकारी रेट पर भी लगभग 3,000 से 3,589 पाकिस्तानी रुपये देने पड़ रहे हैं। प्रति किलो के हिसाब से देखें तो भारत में गैस करीब 64 रुपये किलो पड़ती है, जबकि पाकिस्तान में यह 254 से 304 रुपये किलो तक बैठती है। ब्लैक मार्केट में तो यह दाम 4,500 से 5,500 पाकिस्तानी रुपये से भी ज़्यादा निकल चुका है। दोनों देशों की मुद्रा अलग है, फिर भी वहां के लोगों की आमदनी के हिसाब से यह खर्च उनकी जेब पर भारी बोझ साबित हो रहा है।
एक साल में कितनी बढ़ी गैस की कीमत?
पाकिस्तान में गैस की कीमतों पर नज़र रखने वाली सरकारी संस्था ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी के आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक साल में वहां एलपीजी के दाम बेहद तेज़ी से चढ़े हैं। मई 2025 में जो सिलेंडर करीब 2,100 रुपये का था, वह जनवरी 2026 तक 2,592 रुपये का हो गया, यानी एक साल में ही कीमतों में 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
इसके बाद मार्च 2026 में दाम बढ़कर करीब 2,664 रुपये तक पहुंचे और अप्रैल 2026 में तो जैसे कीमतों में आग ही लग गई। अप्रैल महीने में सरकारी दाम उछलकर 3,589 रुपये पर पहुंच गया, जो महज एक महीने में करीब 35 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी थी। इस उछाल की बड़ी वजह यह रही कि होर्मुज संकट के चलते दुनिया की सबसे बड़ी तेल एवं गैस कंपनियों में से एक सऊदी अरामको ने अपने रेट 44% तक बढ़ा दिए। हालांकि मई 2026 में मामूली राहत मिली और सरकारी दाम घटकर 2,950 से 3,000 रुपये के बीच आ गया।
थाली महंगी, चढ़ गए चपाती के दाम
इस भयंकर महंगाई का सीधा असर पाकिस्तान के आम लोगों की थाली पर पड़ा है। गैस महंगी होने के कारण कराची जैसे बड़े शहरों में तंदूर और ढाबा चलाने वालों ने रोटी और चपाती के दाम काफी बढ़ा दिए हैं। अब वहां एक साधारण हल्की रोटी 25 रुपये में, भारी रोटी 30 रुपये में और चपाती 20 रुपये में मिल रही है।
पाकिस्तान के कई इलाके ऐसे हैं जहां सुई गैस यानी पाइप वाली नेचुरल गैस की सप्लाई नहीं है। ऐसी जगहों पर रहने वाले लोगों के पास एलपीजी सिलेंडर खरीदने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर दुकानदार उन्हें सरकारी रेट से 50 से 60 प्रतिशत ज़्यादा दाम पर गैस बेच रहे हैं। इस संकट को लेकर सिंध प्रांत समेत देश के कई हिस्सों में लोग सड़कों पर उतरकर विरोध जता चुके हैं।
पाकिस्तान में एलपीजी एसोसिएशन के महासचिव साजिद खान का कहना है कि देश में गैस की कोई असली कमी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि बाहर से गैस मंगाने वाले कुछ बड़े व्यापारियों और दुकानदारों ने जानबूझकर बाज़ार में किल्लत दिखाई, ताकि वे ब्लैक मार्केट में ऊंचे दामों पर गैस बेचकर मोटा मुनाफा कमा सकें। उन्होंने सरकार से ऐसे जमाखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की और बताया कि कई जगहों पर मजबूर लोगों को 16,000 से 18,200 रुपये तक में सिलेंडर बेचे जाने की खबरें भी आ रही हैं।
होर्मुज संकट ने बढ़ाई पाकिस्तान की मुश्किल
पाकिस्तान अपनी ज़रूरत की 99 प्रतिशत एलपीजी और एलएनजी कतर तथा यूएई जैसे देशों से पानी के जहाज़ों के ज़रिए मंगाता है, जबकि भारत लगभग 90% गैस बाहर से आयात करता है। पाकिस्तान या भारत आने वाले सभी जहाज़ होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुज़रते हैं। जनवरी 2026 तक पाकिस्तान के पास ज़रूरत से ज़्यादा गैस मौजूद थी, क्योंकि वहां सोलर पैनलों के व्यापक इस्तेमाल से गैस की मांग काफी घट गई थी और सरकार तो अपनी अतिरिक्त गैस दूसरे देशों को बेचने की तैयारी में थी।
लेकिन 28 फरवरी 2026 को जैसे ही होर्मुज का यह समुद्री रास्ता बंद हुआ, पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ गईं। जहाज़ों की आवाजाही रुकने से देश में अचानक भारी किल्लत हो गई। मार्च 2026 के आखिर में खुद पाकिस्तान के पेट्रोलियम सचिव ने माना कि देश के पास केवल 5 दिनों की एलपीजी और सिर्फ 7 दिनों का तेल बचा है।
इस आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ की सरकार को कई कड़े कदम उठाने पड़े। ऊर्जा और ईंधन बचाने के लिए सरकार ने हफ्ते में सिर्फ 4 दिन सरकारी दफ्तर खोलने का फैसला किया। स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए, कई निजी क्षेत्रों में वर्क फ्रॉम होम लागू किया गया और बाज़ारों व दुकानों के खुलने के समय में भी कटौती कर दी गई।
भारत ने कैसे संभाला संकट
दूसरी ओर, भारत ने इस संकट को बहुत समझदारी से संभाला। सरकार ने होर्मुज संकट के बावजूद घरेलू सिलेंडर के दाम मार्च 2026 में केवल 60 रुपये बढ़ाए और तब से कीमत 913 रुपये पर ही टिकी हुई है। भारत ने अमेरिका और कनाडा जैसे वैकल्पिक देशों से गैस मंगाना शुरू किया और अपनी घरेलू रिफाइनरियों में उत्पादन 25 प्रतिशत तक बढ़ा दिया, जिससे देश में गैस का अच्छा-खासा स्टॉक तैयार हो गया। इसके उलट, पाकिस्तान के पास न तो कोई इमरजेंसी स्टॉक था और न ही गैस मंगाने का कोई दूसरा ज़रिया, यही वजह है कि आज वहां की जनता इस गंभीर संकट से जूझ रही है।
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