सर्विस सेक्‍टर की रफ्तार 6 महीने में सबसे तेज, विदेशी ऑर्डर घटे फिर भी घरेलू मांग ने दिलाई बढ़त

एचएसबीसी इंडिया के आंकड़ों के अनुसार मई में भारत के सर्विस सेक्‍टर की पीएमआई 59.8 पर पहुंच गई, जो पिछले 6 महीने में सबसे ऊंचा स्‍तर है। घरेलू मांग में तेजी इस वृद्धि की मुख्‍य वजह रही, हालांकि वैश्विक ऑर्डर और कारोबारी भरोसे पर दबाव बना रहा।

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे टकराव का असर दुनियाभर की नौकरियों और कारोबारी गतिविधियों पर पड़ा है। मैन्‍युफैक्‍चरिंग उत्‍पादों की मांग घटने के साथ ही सेवा क्षेत्र में भी सुस्‍ती के संकेत मिले हैं, लेकिन इस कमजोर माहौल के बावजूद भारत का सर्विस सेक्‍टर मई महीने में तेज गति से आगे बढ़ता दिखा। हालत यह रही कि इस सेक्‍टर की रफ्तार पिछले 6 महीने में सबसे ज्‍यादा रही।

एचएसबीसी इंडिया के सर्विसेज परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्‍स (PMI) के मुताबिक मई में देश के सेवा क्षेत्र की ग्रोथ का सूचकांक 59.8 पर रहा, जो बीते 6 महीने में सबसे ऊंचा है। एसएंडपी ग्‍लोबल की ओर से जारी इन आंकड़ों से साफ है कि घरेलू मांग में बढ़ोतरी के चलते भारत के प्रमुख सेवा क्षेत्र में मई के दौरान 6 महीने की सबसे तेज वृद्धि दर्ज हुई।

इस अवधि में ग्‍लोबल ऑर्डर पिछले साल के औसत से कम बने रहे और कारोबारी भरोसा लगातार दूसरे महीने नीचे आया। इसके बावजूद सर्विस पीएमआई मई में बढ़कर 59.8 पर पहुंच गई, जबकि अप्रैल में यह 58.8 थी। यह आंकड़ा शुरुआती अनुमान 58.9 से भी अधिक रहा। बता दें कि 50 से ऊपर का स्‍तर वृद्धि और इससे नीचे का स्‍तर गिरावट दर्शाता है। भारत का सर्विस PMI 2021 के मध्‍य से ही लगातार 50 के पार बना हुआ है।

नए ऑर्डर से बढ़ी सेवाओं की मांग

एचएसबीसी के आंकड़े बताते हैं कि नवंबर, 2025 के बाद देश में नए ऑर्डर सबसे तेजी से बढ़े हैं। ई-कॉमर्स, इंटरटेनमेंट और आईटी क्षेत्र में नए ऑर्डर में सबसे ज्‍यादा इजाफा देखने को मिला। इसके साथ ही निर्यात ऑर्डर में भी बढ़त दिखी, जो अप्रैल में 5 महीने के निचले स्‍तर पर आने के बाद मई में तेजी से ऊपर चढ़े।

हालांकि अमेरिका के साथ ट्रेड डील अभी तक न होने की वजह से यहां बहुत ज्‍यादा ग्रोथ नहीं दिख रही। यही कारण रहा कि भर्तियां तो जारी रहीं, लेकिन उनकी रफ्तार धीमी रही। सर्वे में शामिल 7 फीसदी से कम कंपनियों ने ही नई भर्ती की बात कही, जिससे पता चलता है कि सेवा क्षेत्र में वृद्धि के बावजूद नौकरियों में उतनी तेजी नहीं आ रही है।

कंपनियों की लागत में मिली राहत

सेवा क्षेत्र की कंपनियों को कीमतों के मोर्चे पर भी लगातार दूसरे महीने राहत मिली है। मार्च में इन कंपनियों की इनपुट लागत 45 महीने में सबसे ज्‍यादा थी, जो अप्रैल और मई में घटी। इसका लाभ ग्राहकों तक भी पहुंचा है।

लागत में कमी के बावजूद बिजनेस आउटलुक 62.3 से गिरकर 61.9 पर आ गया। यह लगातार दूसरा महीना रहा जब कारोबारी गतिविधियों में सुस्‍ती के संकेत मिले। इससे जाहिर होता है कि लागत कम होने के बाद भी कंपनियां ज्‍यादा सतर्कता के साथ कदम बढ़ा रही हैं।

कम्‍पोजिट पीएमआई में भी तेजी

एचएसबीसी के अनुसार सेवा और मैन्‍युफैक्‍चरिंग दोनों को मिलाकर तैयार होने वाला कम्‍पोजिट पीएमआई भी मई में बढ़ता नजर आया। इस दौरान यह सूचकांक 59.3 पर पहुंच गया, जो अप्रैल में 58.2 था। सेवा क्षेत्र में आई तेजी के चलते मई में कम्‍पोजिट पीएमआई का आंकड़ा 6 महीने में सबसे ऊंचा रहा। खास बात यह है कि यह उछाल उस समय आया है जब मई में मैन्‍युफैक्‍चरिंग पीएमआई कमजोर रहा।

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