हिमाचल प्रदेश में हर वर्ष हजारों लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा देते हैं। इसी कड़ी में अब कांगड़ा के एक जांबाज सपूत का नाम भी जुड़ गया है। भारतीय नौसेना के मरीन कमांडो और शौर्य चक्र विजेता अमित सिंह राणा (32) की कार करीब 500 फीट गहरी खाई में गिरने से उनकी दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा सोमवार रात को हुआ, जबकि वे उसी दिन सुबह ही छुट्टी पर अपने घर लौटे थे।
कैसे हुआ हादसा
यह दुर्घटना ज्वालामुखी क्षेत्र के खुंडियां स्थित लाहड़ू में देर रात घटी। जानकारी के अनुसार अमित राणा अपने एक मित्र से मिलकर रात के समय घर लौट रहे थे। इसी दौरान लाहड़ू के खतरनाक मोड़ पर उनकी गाड़ी अनियंत्रित हो गई और करीब 500 फीट गहरी खाई में जा गिरी। यह हादसा रात करीब 11 बजे हुआ।
स्थानीय लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद लगभग 12 बजे उन्हें खाई से बाहर निकाला और खुंडियां अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस जिला देहरा के एसपी मयंक चौधरी ने इस हादसे की पुष्टि की है। मंगलवार को पैतृक गांव में पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। ज्वालामुखी के विधायक संजय रत्न ने भी उनके निधन पर गहरा शोक जताया है।
4 साल के मासूम के सिर से उठा पिता का साया
अमित सिंह राणा अपनी दो बहनों के इकलौते भाई थे। वे अपने पीछे माता-पिता, पत्नी और 4 साल के मासूम बेटे को छोड़ गए हैं। इस असमय निधन से परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और समूचे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
बहादुरी की मिसाल थी अमित राणा की कहानी
अमित राणा की वीरगाथा हर किसी का सीना गर्व से चौड़ा कर देती है। वर्ष 2018 में जम्मू-कश्मीर में 'ऑपरेशन रक्षक' के तहत तैनाती के दौरान उन्होंने कई बड़े आतंकवाद विरोधी अभियानों में भागीदारी निभाई। बेहद जोखिम भरी परिस्थितियों में उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर आतंकियों के ठिकानों पर सटीक कार्रवाई को अंजाम दिया।
बताया जाता है कि लगातार चलाए गए अभियानों में उन्होंने 8 आतंकवादियों को मार गिराने में अहम भूमिका निभाई। घने जंगलों और दुर्गम इलाकों में संचालित इन ऑपरेशनों में उन्होंने अदम्य साहस, सूझबूझ और बेहतरीन नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया।
2021 में मिला था शौर्य चक्र
इसी असाधारण वीरता के लिए वर्ष 2021 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें 'शौर्य चक्र' से सम्मानित किया था। यह पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए गौरव का क्षण था। कांगड़ा जिले के ज्वालामुखी से आई यह खबर बेहद पीड़ादायक है, क्योंकि देवभूमि ने अपने एक वीर सपूत को खो दिया है।
क्रैश बैरियर की कमी पर उठे सवाल
हादसे के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। जिस स्थान पर यह दुर्घटना हुई, वहां न तो क्रैश बैरियर लगा था और न ही कोई पैरापिट मौजूद था। लोगों का कहना है कि यह मोड़ पहले से ही बेहद खतरनाक रहा है और बरसात के मौसम में यहां फिसलन और बढ़ जाती है।
स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि यदि समय रहते सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर लिए गए होते तो संभवतः यह हादसा टाला जा सकता था। उन्होंने प्रशासन से तत्काल प्रभाव से आवश्यक सुरक्षा उपाय करने की मांग की है।
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