छत्तीसगढ़ सहित देश के कई हिस्सों में तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों की हड़ताल का व्यापक असर सामने आ रहा है। राज्य में शुरू हुए इस आंदोलन की वजह से राजस्व विभाग से जुड़े तमाम जरूरी काम पूरी तरह ठहर गए हैं। सुशासन की रीढ़ माने जाने वाले तहसील कार्यालयों में कामकाज ठप पड़ने से आम लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
कौन-कौन से काम पूरी तरह रुके
हड़ताल के चलते जमीन से जुड़े नामांकन यानी म्यूटेशन, बंटवारा और रिकॉर्ड सुधार जैसे काम पूरी तरह बंद हो गए हैं। इसके साथ ही आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र भी नहीं बन पा रहे हैं। स्कूल और कॉलेजों में दाखिले का समय नजदीक है, ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी छात्रों और उनके अभिभावकों को झेलनी पड़ रही है।
सरकारी योजनाओं पर भी असर
इस आंदोलन से सरकार की कई अहम योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। डिजिटल क्रॉप सर्वे प्रोजेक्ट ‘एग्रीस्टेक’ समेत कई फ्लैगशिप कार्यक्रमों का काम रुक गया है। ग्रामीण इलाकों में लगने वाले शिविर भी बंद हैं, जिससे लोगों की शिकायतों का निपटारा नहीं हो पा रहा। तहसील दफ्तरों में सन्नाटा पसरा हुआ है और रोजमर्रा के काम अटक गए हैं।
कितने अधिकारी हड़ताल पर
जानकारी के मुताबिक, प्रदेश में करीब 456 तहसीलदार और नायब तहसीलदार हड़ताल पर हैं। सामान्य दिनों में यहां रोजाना लगभग 300 मामले निपटाए जाते हैं, लेकिन हड़ताल के कारण यह पूरा कामकाज ठप पड़ गया है।
विवाद के बाद भड़का आंदोलन
यह हड़ताल सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो और नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी के बीच हुए विवाद के बाद शुरू हुई। इसी घटना के बाद राजस्व अधिकारियों ने काम बंद करने का फैसला लिया। संघ का कहना है कि अगर आरोपियों की गिरफ्तारी जल्द नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
संघ ने उठाए पुलिस कार्रवाई पर सवाल
छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के प्रोविंशियल हेड कृष्ण कुमार लहरे ने पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि कार्रवाई में हो रही देरी से अधिकारियों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है। इस हड़ताल के चलते जहां आम लोगों के जरूरी काम रुक गए हैं, वहीं सरकार की योजनाओं पर भी गंभीर असर पड़ा है।
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