केरल की राजधानी में सीपीआई-एम के भीतर गुटीय टकराव और गहरा गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने तिरुवनंतपुरम जिला सचिव के पद पर वी. जॉय को बनाए रखने के फैसले पर खुलकर नाराजगी जताई है। अपनी असहमति दर्शाते हुए शिवनकुट्टी बुधवार को जिले की एक महत्वपूर्ण बैठक से नदारद रहे।
उनकी अनुपस्थिति को पार्टी के उस निर्णय के विरोध के रूप में देखा गया, जिसके तहत जॉय को इस अहम जिम्मेदारी पर दोबारा लाया जा रहा है। सीपीआई-एम नेतृत्व ने हाल ही में तय किया था कि जॉय, जो विधायक भी हैं, जिला सचिव के पद पर बने रहेंगे।
एकेजी सेंटर की बैठक में लिया गया फैसला
यह निर्णय तिरुवनंतपुरम जिले के सीपीआई-एम राज्य समिति सदस्यों की एक अहम बैठक में लिया गया, जो पार्टी के राज्य सचिव एमवी. गोविंदन की अगुवाई में एकेजी सेंटर में आयोजित हुई। बैठक में पी. विजयन समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने भी हिस्सा लिया।
विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए जॉय ने कुछ समय के लिए सचिव पद छोड़ दिया था और इस दौरान राज्यसभा सांसद एए रहीम ने अंतरिम जिला सचिव की जिम्मेदारी संभाली थी। सीपीआई(एम) की संगठनात्मक परंपरा के मुताबिक विधायक आमतौर पर जिला सचिव का पद छोड़ देते हैं, लेकिन तिरुवनंतपुरम इकाई के भीतर मौजूद गहरे मतभेदों ने इस पूरे मामले को उलझा दिया है।
शिवनकुट्टी की बदलती सियासी हैसियत
ताजा विवाद की जड़ें शिवनकुट्टी की बदलती राजनीतिक स्थिति से भी जुड़ी हैं, जिन्हें कभी राजधानी जिले में सीपीआई-एम के सबसे बड़े नेताओं में गिना जाता था। हाल के चुनाव में वे अपनी नेमोम विधानसभा सीट पर भाजपा के राज्य अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर से हार गए।
विधायकी और मंत्री पद, दोनों हाथ से निकल जाने के बाद शिवनकुट्टी तिरुवनंतपुरम जिला सचिव की कुर्सी पाने के इच्छुक थे। सीपीआई-एम की 14 जिला कमेटियों में से इस पद को सबसे प्रभावशाली संगठनात्मक पदों में से एक माना जाता है।
बदलाव की उम्मीद को झटका
इस पद पर बैठने वाले व्यक्ति का राज्य की राजधानी में पार्टी के कामकाज पर काफी नियंत्रण रहता है। ऐसे में जॉय को ही पद पर कायम रखने का नेतृत्व का फैसला उन कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए निराशाजनक साबित हुआ होगा, जो जिला स्तर पर बदलाव की आस लगाए बैठे थे।
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