धान की खेती में सतर्कता की जरूरत
छत्तीसगढ़ के विभिन्न इलाकों में इस समय खरीफ सत्र की धान की रोपाई का काम काफी तेजी से किया जा रहा है। कृषि कार्य के दौरान किसान अक्सर कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनका सीधा असर धान की कुल पैदावार पर पड़ता है। कृषि विज्ञान केंद्र बालोद के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ एआर गौर के अनुसार, रोपाई के दौरान बरती गई थोड़ी सी सावधानी न केवल फसल की सेहत सुधार सकती है, बल्कि उत्पादन में आने वाली बड़ी गिरावट से भी बचा सकती है। यदि किसान इन वैज्ञानिक सुझावों को नजरअंदाज करते हैं, तो उन्हें धान की उपज में 15 प्रतिशत तक का भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
पौध की सही उम्र का चुनाव
धान की फसल की बेहतर शुरुआत के लिए नर्सरी में तैयार पौधों की उम्र का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। डॉ गौर ने स्पष्ट किया है कि थरहा तैयार होने के बाद 20 से 25 दिन की अवधि के भीतर ही रोपाई कर लेना सबसे अच्छा माना जाता है। कई किसान जाने-अनजाने में 25 से 30 दिन या उससे भी अधिक पुराने पौधों का इस्तेमाल करते हैं। उम्रदराज पौधों को रोपने से उनकी शुरुआती बढ़वार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिसका अंत में कम उत्पादन के रूप में खामियाजा भुगतना पड़ता है।
रोपाई का सही तरीका और दूरी
अक्सर देखा जाता है कि किसान एक स्थान पर जरूरत से ज्यादा पौधों को रोपित कर देते हैं। एक जगह पर 3 से 4 पौधे लगाना गलत अभ्यास है, जबकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से 2 से 3 पौधे ही पर्याप्त होते हैं। इसके साथ ही रोपाई के दौरान पौधे से पौधे के बीच कम से कम 10 सेंटीमीटर की निश्चित दूरी बनाए रखना अनिवार्य है। उचित दूरी सुनिश्चित करने से पौधों को पर्याप्त हवा, सूर्य का प्रकाश और मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व सुलभ होते हैं, जिससे पौधों का विकास पूरी तरह स्वस्थ होता है।
जड़ों का उपचार और गहराई
धान की रोपाई से पहले जड़ों का उपचार करना सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक है, जिसे अधिकांश किसान छोड़ देते हैं। जड़ों को रोपाई से पहले किसी उपयुक्त फफूंदनाशक या नैनो डीएपी से उपचारित करना बेहद फायदेमंद होता है। इससे पौधे न केवल रोगों से सुरक्षित रहते हैं, बल्कि उनकी वृद्धि भी तेज गति से होती है। इसके अलावा, रोपाई की गहराई पर भी ध्यान देना चाहिए। पौधों को जमीन में 5 से 6 सेंटीमीटर की उचित गहराई पर लगाना चाहिए। बहुत गहरी रोपाई या बहुत सतही रोपाई से जड़ों का विकास बाधित होता है, जो अंत में फसल की पैदावार को कम कर देता है।
उर्वरकों का सही प्रबंधन
उर्वरकों के इस्तेमाल को लेकर भी किसानों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। जिन किसानों को सुपर फॉस्फेट और पोटाश जैसे उर्वरकों की आवश्यकता होती है, उन्हें इनका प्रयोग हमेशा रोपाई की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही कर लेना चाहिए। रोपाई के बाद इनका उपयोग करने से पौधों को पोषक तत्वों का पूरा लाभ नहीं मिल पाता है।
यूरिया के इस्तेमाल के मामले में विशेष सावधानी जरूरी है। यूरिया का पहला छिड़काव रोपाई के 7 से 10 दिन बाद किया जाना चाहिए। रोपाई के तुरंत बाद यूरिया का उपयोग कदापि न करें। विशेषज्ञों का सुझाव है कि यदि यूरिया के साथ जिंक सल्फेट को मिलाकर उपयोग किया जाए, तो इससे पौधों को पोषण का दोहरा लाभ मिलता है और फसल की समग्र बढ़वार में जबरदस्त सुधार देखने को मिलता है। इन वैज्ञानिक मानकों का पालन करके किसान अपनी मेहनत का बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।
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