जगदलपुर केंद्रीय जेल में 10 दिन में तीन कैदियों की मौत, कांग्रेस ने उठाए सवाल और मांगी न्यायिक जांच

जगदलपुर केंद्रीय जेल में बीते 10 दिनों के भीतर तीन बंदियों की मौत हो चुकी है, जिनमें ताजा मामला दुष्कर्म के आरोपी सुदु कश्यप का है। कांग्रेस ने जेल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में न्यायिक जांच की मांग की है।

जगदलपुर के केंद्रीय जेल में इन दिनों हड़कंप का माहौल है। बीते 10 दिनों के भीतर यहां तीन कैदियों की मौत हो जाने से जेल प्रबंधन और वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे ताजा मामला बलात्कार के एक आरोपी की मौत से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि कैदी का ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ गया था, जिसके बाद उसे इलाज के लिए डिमरापाल मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया।

कौन था मृतक कैदी

मृतक की पहचान सुदु कश्यप (60) के रूप में हुई है। वह बस्तर जिले के मारडूम थाना क्षेत्र अंतर्गत कर्रेकोट नयापारा का निवासी था। सुदु बलात्कार के एक मामले में आरोपी था और 28 अक्टूबर 2025 से जगदलपुर के केंद्रीय जेल में बंद था।

इलाज के दौरान तोड़ा दम

मिली जानकारी के अनुसार, 6 जून की रात सुदु कश्यप की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उसका ब्लड प्रेशर काफी बढ़ गया। रात करीब 11:40 बजे उसे तत्काल डिमरापाल मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। अस्पताल में चिकित्सकों ने उसका इलाज किया, लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं आया। आखिरकार रविवार 7 जून की शाम करीब 7:45 बजे इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

10 दिन में तीन मौतें

केंद्रीय जेल में बीते 10 दिनों के अंदर लगातार तीन बंदियों की मौत होने से जेल की चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

  1. महिला कैदी की खुदकुशी: कुछ दिन पहले अपने चाचा की हत्या के मामले में बंद एक महिला कैदी ने बैरक में फांसी लगाकर अपनी जान दे दी थी।
  2. बाथरूम में गिरने से मौत: नक्सल मामले में बंद रमेश कुंजाम (33) की भी मौत हो गई थी। बताया गया कि वह बाथरूम में गिर पड़ा था, जिससे उसे गंभीर चोट आई।
  3. सुदु कश्यप की मौत: अब ब्लड प्रेशर बढ़ने के चलते तीसरे कैदी की जान चली गई।

कांग्रेस ने की न्यायिक जांच की मांग

कांग्रेस ने इन तीनों मौतों को जेल प्रशासन की लापरवाही करार देते हुए मांग की है कि इनकी न्यायिक जांच हाईकोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में कराई जाए। पार्टी ने दोषी जेल अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें निलंबित करने की मांग भी की है। इसके साथ ही मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए मुआवजा देने और 7 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग रखी गई है।

फिलहाल बस्तर पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है।

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