एक्सप्लेनर: देश में मानसून आखिर कब दस्तक देगा, देरी की असली वजह क्या और IMD बार-बार तारीख क्यों बढ़ा रहा है

IMD ने पहले 26 मई को केरल में मानसून पहुंचने की बात कही थी, लेकिन अरब सागर के ऊपर पश्चिमी हवाओं की रफ्तार बेहद कम होने से इसकी शुरुआत अटकी हुई है। मानसून के आगमन की तारीख अब तक तीन बार आगे खिसक चुकी है।

राजधानी दिल्ली समेत देश के कई इलाकों में बीते तीन दिनों के दौरान बारिश दर्ज की गई है। इसे देखकर कयास लगाए जाने लगे कि पूरे देश में जल्द ही मानसूनी बारिश का दौर शुरू हो जाएगा। लेकिन असलियत इन अनुमानों से बिल्कुल अलग है। इस बार मानसून अपने सामान्य समय से पिछड़ चुका है और अभी तक केरल तक नहीं पहुंच सका है।

इस साल मई के महीने में पूरे देश में भीषण गर्मी का सामना करना पड़ा। इसके चलते उत्तर भारत में हीट डोम की स्थिति बन गई और धरती की सतह से पानी भाप बनकर ऊपर उठा। इन्हीं से बने बादल अब बरस रहे हैं। इससे लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत जरूर मिली है, मगर यह मानसून की बारिश नहीं है।

मानसून आखिर होता क्या है?

जब पश्चिमी हवाएं अरब सागर से नमी समेटकर भारत के स्थलीय इलाकों तक पहुंचती हैं, तो पूरे देश में बारिश का सिलसिला शुरू होता है। यह क्रम तकरीबन चार महीने तक जारी रहता है और इसी को मानसून कहा जाता है। इसकी शुरुआत केरल से होती है। केरल पहुंचने के एक महीने बाद यह पूरे देश में फैल जाता है और हर ओर झमाझम बारिश होती है।

IMD मानसून के आने का फैसला कैसे करता है?

मौसम विभाग तीन शर्तें एक साथ पूरी होने पर ही मानसून के आगमन की घोषणा करता है। इसके लिए केरल के कम से कम 60% मौसम स्टेशनों पर लगातार बारिश होना, अरब सागर के ऊपर एक तय रफ्तार से पश्चिमी हवाओं का बहना और पर्याप्त मात्रा में बादलों का मौजूद होना जरूरी है।

फिलहाल केरल में बारिश हो रही है और बादल भी पर्याप्त मात्रा में हैं, मगर पश्चिमी हवाओं की गति बेहद धीमी बनी हुई है। यही वजह है कि मौसम विभाग ने अब तक देश में मानसून के आगमन की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

तीन बार आगे खिसक चुकी है तारीख

मौसम विभाग ने अपने पहले अपडेट में कहा था कि मानसून 26 मई तक केरल पहुंच जाएगा, लेकिन बाद में इस तारीख को बढ़ाकर पहले 28 मई और फिर 1 जून कर दिया गया। अब आईएमडी का कहना है कि 3 जून से पहले मानसून के आने की कोई संभावना नहीं है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि इसमें और भी देरी हो सकती है।

अगर मानसून 8 जून तक केरल पहुंच जाए, तो उसे देरी से आया नहीं माना जाता। इसके बाद देश के बाकी हिस्सों में भी लगातार बारिश का दौर शुरू होता है और जुलाई के पहले सप्ताह तक मानसून पूरे देश को अपनी चपेट में ले लेता है।

बंगाल की खाड़ी का चक्रवात बढ़ा रहा मुश्किल

बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवात के चलते देश के पूर्वी हिस्सों में बारिश हुई है। उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों में तेज हवाएं भी चल रही हैं। हालांकि इस चक्रवात के कारण पश्चिमी हवाएं और कमजोर पड़ रही हैं। मानसून लेट हो रहा है और अल नीनो का खतरा भी लगातार गहराता जा रहा है।

आईएमडी ने पहले अनुमान लगाया था कि इस बार 92 फीसदी बारिश होगी, जो सामान्य से 8 फीसदी कम है, लेकिन अब मौसम विभाग का कहना है कि इस बार महज 90 फीसदी बारिश के आसार हैं। 1 जून से पश्चिमी हवाओं के तेज होने की संभावना है। ऐसा होने पर अगले दो-तीन दिनों में मानसून केरल पहुंच सकता है।

अल नीनो की आहट बढ़ा रही चिंता

अमेरिका से लेकर भारत तक कई मौसम वैज्ञानिक और एजेंसियां यह दावा कर चुके हैं कि इस साल अल नीनो के बनने की आशंका बहुत ज्यादा है। सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच अल नीनो का असर दिखाई देगा। अल नीनो वह स्थिति होती है, जब प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इस स्थिति में भारत में बारिश कम होती है, खासकर अगस्त, सितंबर और नवंबर के महीनों में। साथ ही ठंड के मौसम में होने वाली बारिश यानी मावठा भी नहीं हो पाती।

देश की बड़ी आबादी खेती-किसानी से जुड़े कामों में लगी हुई है और भारत में 50 फीसदी से ज्यादा किसान मानसून की बारिश पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में मानसून का देरी से आना और अल नीनो के बनने के हालात का लगातार मजबूत होना चिंता बढ़ाने वाला है।

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