गुरुग्राम में रिटायर्ड मेजर से बदसलूकी का आरोप, कारगिल युद्ध में निभाई थी देश की सेवा

गुरुग्राम के साइबर हब पर देर रात ट्रैफिक चेकिंग के दौरान रिटायर्ड मेजर हेमेंद्र कुमार सिंह ने पुलिस पर गंदी पाइप से शराब जांच, गलत रीडिंग और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है। मामले की शिकायत पुलिस आयुक्त से की गई है और जांच शुरू हो गई है।

गुरुग्राम के साइबर हब इलाके में देर रात हुई ट्रैफिक पुलिस की चेकिंग पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कारगिल युद्ध और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में देश की सेवा कर चुके एक रिटायर्ड मेजर ने पुलिस पर अपने और अपने परिवार के साथ जांच के नाम पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पहले गंदी और पहले से इस्तेमाल की जा चुकी पाइप से शराब की जांच की गई, जिसमें रीडिंग 91 एमजी आई, जबकि नई पाइप से दोबारा टेस्ट करने पर यह सिर्फ 13 एमजी निकली। पूरे प्रकरण की शिकायत पुलिस आयुक्त से की गई है और जांच शुरू हो चुकी है।

कैसे शुरू हुआ पूरा मामला

घटना शनिवार देर रात की है, जब गुरुग्राम के साइबर हब के पास ट्रैफिक पुलिस शराब पीकर वाहन चलाने वालों की जांच में जुटी थी। इसी दौरान सेक्टर-88 के रहने वाले और सेना से सेवानिवृत्त मेजर हेमेंद्र कुमार सिंह अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ घर लौट रहे थे। पुलिस ने जांच के लिए उनकी कार को भी रोक लिया।

गंदी पाइप और गलत रीडिंग का आरोप

मेजर हेमेंद्र कुमार सिंह के मुताबिक ब्रीद एनालाइजर मशीन में पहले से इस्तेमाल की हुई गंदी पाइप लगी थी। उन्होंने स्वच्छता का हवाला देते हुए नई डिस्पोजेबल पाइप लगाने की मांग की, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उनकी बात नहीं सुनी और उसी पाइप से जांच कराने का दबाव बनाया। उनका आरोप है कि इसी टेस्ट में मशीन ने अल्कोहल की रीडिंग 91 एमजी दिखाई, जो कानूनी सीमा से तीन गुना अधिक थी। रिटायर्ड मेजर का दावा है कि उन्होंने जीवन में कभी शराब नहीं पी, इसलिए उन्होंने तुरंत दोबारा जांच की मांग कर दी।

मोबाइल छीनने और दुर्व्यवहार का दावा

मेजर का कहना है कि जब वे डिजीलॉकर में अपना ड्राइविंग लाइसेंस दिखा रहे थे, उसी समय पुलिसकर्मियों ने उनका मोबाइल फोन भी छीन लिया। उन्हें इंटरसेप्टर वाहन में बैठे इंस्पेक्टर के पास ले जाया गया, जहां उन्होंने खुद को पूर्व सैन्य अधिकारी बताते हुए निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई, लेकिन आरोप है कि उनके साथ अभद्रता की गई।

नई पाइप से बदल गई तस्वीर

मामले ने उस वक्त नया रुख ले लिया जब कुछ पुलिसकर्मियों ने नई पाइप लगाकर दोबारा परीक्षण कराया। हैरानी की बात यह रही कि दोनों बार रीडिंग केवल 13 एमजी आई, जो पूरी तरह कानूनी सीमा के भीतर थी। इसके बावजूद मौके पर चालान रद्द नहीं किया गया और पीड़ित को ट्रैफिक टावर जाकर चालान निरस्त कराने की सलाह दी गई।

पत्नी ने की 112 पर कॉल

परिवार का आरोप है कि बिगड़ते हालात देखकर मेजर की पत्नी ने 112 पर फोन किया। स्थानीय पुलिस के मौके पर पहुंचते ही ट्रैफिक पुलिस की टीम वहां से रवाना हो गई। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान उनकी पत्नी और 9 तथा 14 साल की बेटियां रात करीब डेढ़ बजे तक सड़क पर खड़ी रहीं। घटना के कुछ वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें पूर्व मेजर की पत्नी रोती हुई दिखाई दे रही हैं।

जांच और कार्रवाई की मांग

पूर्व मेजर ने पुलिस आयुक्त को लिखित शिकायत सौंपते हुए पूरे मामले की विभागीय जांच की मांग की है। उन्होंने बॉडी-वॉर्न कैमरों की फुटेज की जांच, ब्रीथ एनालाइजर मशीन के लॉग और कैलिब्रेशन रिकॉर्ड की पड़ताल तथा दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग रखी है। फिलहाल इस मामले में पुलिस की ओर से कोई पक्ष सामने नहीं आया है।

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