उच्च शिक्षा और समाज सेवा का अनोखा संगम
बिहार के पूर्णिया जिले में रहने वाले पंकज कुमार ने यह साबित कर दिखाया है कि अगर मन में समाज सेवा का जज्बा हो, तो परिस्थितियां कभी बाधा नहीं बनतीं। नेवालाल चौक के पास रहने वाले पंकज पूर्णिया यूनिवर्सिटी से पीजी (पोस्ट ग्रेजुएशन) की पढ़ाई कर रहे हैं। अपनी शिक्षा का खर्च उठाने और आत्मनिर्भर बनने के लिए वह शहर की सड़कों पर टोटो चलाते हैं। वह ऐप सेवा रैपिडो के माध्यम से अपनी गाड़ी की बुकिंग लेते हैं। हालांकि, पंकज का काम केवल सवारी ढोने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह इसके साथ-साथ समाज के कमजोर वर्ग की निस्वार्थ भाव से मदद भी कर रहे हैं।
खाली वक्त में लाचार और दिव्यांगों के लिए मुफ्त सेवा
रैपिडो पर किसी सवारी की बुकिंग पूरा करने के बाद जब पंकज को बीच में खाली समय मिलता है, तो वह उस समय का सही इस्तेमाल जरूरतमंदों की मदद में करते हैं। पंकज अपने खाली टोटो में राह चलते लाचार लोगों, दिव्यांगों और छोटे बच्चों को बैठाते हैं और उन्हें उनके गंतव्य तक मुफ्त यात्रा की सुविधा देते हैं। इसके अतिरिक्त, वह राह में मिलने वाले छात्रों को भी बिना किसी शुल्क के उनके स्कूल तक पहुंचाते हैं। अपनी इस सेवा भावना और प्रतिदिन के अनुभवों की वह नियमित रूप से ब्लॉगिंग भी करते हैं।
चार भाइयों और पिता का ऑटो चालक परिवार
पंकज के इस सेवा भाव के पीछे उनका परिवार और उनकी संघर्षपूर्ण पृष्ठभूमि है। पंकज बताते हैं कि उनके परिवार में पिता और चार भाई हैं, और सभी लोग ऑटो चलाकर ही अपने परिवार का जीवन-यापन करते हैं। ऑटो चालकों के परिवार से आने के कारण पंकज को भी इस काम में कोई झिझक नहीं हुई। आर्थिक तंगी के कारण जीवन-यापन के लिए उन्होंने टोटो चलाना शुरू किया था, लेकिन उन्होंने इसे केवल मजबूरी नहीं बनने दिया, बल्कि अपनी पढ़ाई और समाज सेवा का जरिया बना लिया।
रोजाना 1500 रुपये की कमाई और सोशल मीडिया से मदद
पंकज के काम करने और कमाई करने का अंदाज भी काफी अलग है। टोटो चलाकर वह रोजाना करीब 1500 रुपये तक की कमाई कर लेते हैं। इसके अलावा, वह जो सामाजिक कार्य करते हैं, उसकी वीडियो बनाकर इंटरनेट पर साझा करते हैं। इस सोशल मीडिया से होने वाली कमाई भी उन्हें आर्थिक रूप से काफी संबल प्रदान करती है। पंकज का कहना है कि पढ़ाई के साथ उन्हें कभी किसी नौकरी को करने की ख्वाहिश नहीं रही।
खुद के रोजगार में खुशी और नया अंदाज
पंकज अपने इस काम से बेहद खुश और संतुष्ट हैं। उनका कहना है कि अपने अलग और अनोखे अंदाज में टोटो चलाने में उन्हें बहुत मजा आता है। इस काम से जहां एक तरफ उन्हें रोजाना सम्मानजनक आय हो जाती है, वहीं दूसरी तरफ बचपन से चला आ रहा समाज सेवा का सपना भी पूरा हो रहा है। वह कहते हैं कि उन्हें बचपन से ही लोगों की मदद करने का शौक था, और आज अपने इस वाहन के जरिए वह गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त राइड देकर अपने इस सपने को बखूबी निभा रहे हैं।
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