साइबर अपराधियों के निशाने पर बैंक के ग्राहक
आज के दौर में साइबर अपराधों का दायरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। अब केवल बैंक खातों में जमा रकम ही नहीं, बल्कि ग्राहकों की गोपनीय व्यक्तिगत जानकारियां भी साइबर अपराधियों के लिए मुख्य लक्ष्य बन गई हैं। अभी कुछ ही समय पहले अक्टूबर महीने में देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक यानी SBI के ग्राहकों का निजी डेटा डार्क वेब पर सार्वजनिक होने का मामला सामने आया था। अब इसी कड़ी में एक और बड़ा नाम जुड़ गया है। AU स्मॉल फाइनेंस बैंक पर साइबर हमला होने और ग्राहकों का डेटा चोरी होने की गंभीर आशंका जताई जा रही है। एक हैकर समूह ने दावा किया है कि उन्होंने बैंक के सिस्टम को निशाना बनाकर ग्राहकों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी हासिल कर ली है। हालांकि बैंक ने इस पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी है, लेकिन बैंक प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनके मुख्य बैंकिंग सिस्टम पूरी तरह से सुरक्षित हैं और रोजमर्रा की बैंकिंग सेवाओं पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है।
क्या है AU स्मॉल फाइनेंस बैंक का आधिकारिक पक्ष?
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए AU स्मॉल फाइनेंस बैंक ने शुक्रवार को अपना आधिकारिक बयान जारी किया है। बैंक के अनुसार, वे एक ऐसे सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म से जुड़े संभावित डेटा लीक की बारीकी से जांच कर रहे हैं, जो सेल्सफोर्स पर होस्ट किया गया था। बैंक ने स्पष्ट किया है कि यह विशेष प्लेटफॉर्म मुख्य रूप से उन ग्राहकों से संबंधित सीमित डेटा रखता है, जिन्होंने वाहन ऋण यानी व्हीकल लोन लिया है। इस प्लेटफॉर्म का प्रबंधन और होस्टिंग सेल्सफोर्स द्वारा किया जाता है। बैंक ने दोहराया है कि उनके आंतरिक कोर बैंकिंग सिस्टम इस घटना से पूरी तरह अछूते हैं और किसी भी प्रकार की बैंकिंग सुविधा बाधित नहीं हुई है।
हैकर ग्रुप के दावे और डरावनी सच्चाई
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्कार्लेटग्रुप नामक हैकर समूह ने इस सेंधमारी की जिम्मेदारी ली है। इस समूह का दावा है कि उनके पास बैंक के ग्राहकों और आंतरिक संचालन से जुड़ी तमाम गोपनीय फाइलें मौजूद हैं। इन जानकारियों में KYC रिकॉर्ड, पहचान पत्र, PAN कार्ड, आधार कार्ड की जानकारी, क्रेडिट रिपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट, लोन आवेदन से जुड़ी फाइलें, ग्राहकों के हस्ताक्षरित समझौते और बीमा दस्तावेज शामिल होने का दावा किया गया है। हैकर्स का यह भी कहना है कि उन्होंने बैंक के CRM डेटा, कर्मचारियों की निजी जानकारी, लॉगिन इतिहास और ऑडिट लॉग जैसे संवेदनशील डेटा भी चुरा लिए हैं। हालांकि, इन दावों की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से बैंक इसे काफी गंभीरता से ले रहा है।
SBI के ग्राहकों का डेटा भी हुआ था प्रभावित
डेटा लीक की यह घटना कोई अकेली मिसाल नहीं है। इससे पहले अक्टूबर महीने में ही SBI के 3,897 ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर उजागर होने की सूचना मिली थी। इस लीक में ग्राहकों के मोबाइल नंबर, जन्मतिथि, ईमेल आईडी और घर के पते जैसी निजी जानकारियां शामिल थीं। 21 अक्टूबर को बैंक ने इस साइबर घटना की पुष्टि की थी, जिसके बाद बैंक को थ्रेट इंटेलिजेंस सर्विस प्रोवाइडर, डिफेंस साइबर एजेंसी और CERT-In की ओर से अलर्ट जारी किए गए थे।
ग्राहकों को बरतनी होगी सावधानी
अगर आपकी निजी जानकारी किसी भी तरह से साइबर अपराधियों के हाथ लग जाती है, तो इसका दुरुपयोग फर्जी कॉल, पहचान की चोरी और बड़ी ऑनलाइन धोखाधड़ी के लिए किया जा सकता है। ग्राहकों के लिए सलाह है कि वे अनजान कॉल्स या संदेहास्पद मैसेज पर बिल्कुल भरोसा न करें। अपना OTP, PIN, पासवर्ड या बैंक से जुड़ी कोई भी गोपनीय जानकारी कभी भी किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा न करें। इसके अलावा किसी भी अज्ञात या संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से पूरी तरह परहेज करें, ताकि आपकी मेहनत की कमाई सुरक्षित रहे।
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