साइबर जालसाजों का नया नेटवर्क बेनकाब
छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले में साइबर ठगी का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उत्तराखंड और दिल्ली से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन ठगों ने एक व्यक्ति और उसकी पत्नी को अपना शिकार बनाते हुए उनके बैंक खातों से लाखों रुपये उड़ा लिए थे। जांच के दौरान पता चला कि ये अपराधी आम लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खाते और एटीएम कार्ड हासिल कर लेते थे, जिनका इस्तेमाल बाद में अवैध लेन-देन और ठगी की रकम को खपाने के लिए किया जाता था।
क्या है पूरा मामला
पीड़ित राकेश कुमार भोक्ते, जो गातापार थाना क्षेत्र के निवासी हैं, ने खैरागढ़ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके और उनकी पत्नी के बैंक खातों के साथ धोखाधड़ी हुई है। शिकायत के अनुसार, जालसाजों ने अलग-अलग तारीखों पर खातों में सेंधमारी की। 16 अगस्त 2026 को आईडीबीआई बैंक खाते से 99 हजार रुपये और पत्नी के छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक खाते से 80 हजार रुपये उड़ाए गए। इसके बाद 1 सितंबर 2026 को एचडीएफसी बैंक खाते से भी 7 हजार 600 रुपये की निकासी की गई। कुल मिलाकर इन ठगों ने 1 लाख 86 हजार 600 रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया।
कमीशन का प्रलोभन और ठगी की कार्यप्रणाली
शिकायत मिलने के बाद खैरागढ़ पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और आईटी एक्ट की धारा 66डी के तहत अपराध क्रमांक 338/2026 दर्ज किया। पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, एक संगठित गिरोह का खुलासा हुआ। पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उत्तराखंड में दबिश दी, जहां से तारादेव नामक व्यक्ति को पकड़ा गया। पूछताछ में उसने खुलासा किया कि उसने महज 5 हजार रुपये के कमीशन के चक्कर में अपने बैंक खाते और एटीएम कार्ड जालसाजों को सौंप दिए थे। इसी कड़ी में पुलिस ने उज्ज्वल सिंह दानू को भी हिरासत में लिया। उज्ज्वल का काम ठगी की रकम खातों में आते ही उसे निकालना था। वह कुल रकम में से 10 प्रतिशत हिस्सा अपने पास रखता था और बाकी की राशि सतविंदर सिंह तक पहुंचा देता था।
दिल्ली से जुड़ा तार और डॉलर का खेल
पुलिस की जांच का दायरा दिल्ली तक पहुंचा, जहां से सतविंदर सिंह को गिरफ्तार किया गया। सतविंदर इस गिरोह का एक मुख्य हिस्सा बताया जा रहा है। जांच में खुलासा हुआ कि सतविंदर ठगी गई भारतीय मुद्रा को डॉलर में बदलने का काम करता था, जिससे पुलिस की पकड़ से बचना आसान हो जाए। पुलिस ने उज्ज्वल सिंह दानू के पास से 10 हजार रुपये नकद और बैंक जमा की रसीदों की फोटोकॉपी जब्त की है। वहीं, सतविंदर के पास से एक मोबाइल फोन बरामद किया गया है, जो ठगी के नेटवर्क को सुलझाने में मददगार साबित हो सकता है। दोनों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर लेकर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस की सतर्कता और जांच का दायरा
खैरागढ़ थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने इस जटिल मामले को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि साइबर ठग अब सीधे लोगों को ठगने के बजाय, निर्दोष लोगों के बैंक खातों को किराए या कमीशन पर इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि जांच एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके। लोगों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या यूपीआई पिन कभी साझा न करें, क्योंकि इसके बदले मिलने वाला मामूली कमीशन उन्हें गंभीर कानूनी मुसीबत में डाल सकता है। फिलहाल पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना निशाना बनाया है।
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