लॉरेंस बिश्नोई गैंग और दाऊद की डी-कंपनी: क्या अंडरवर्ल्ड का नया मॉडल बन चुका है खौफ का दूसरा नाम

अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले के बाद लॉरेंस बिश्नोई गैंग के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच एजेंसियां इस गिरोह की तुलना दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी से कर रही हैं जो जेल के अंदर से विदेश तक फैला हुआ है।

टाइगर श्रॉफ पर हमला और बिश्नोई गैंग की सक्रियता

हाल ही में अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुए हमले की घटना के बाद एक बार फिर कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग सुर्खियों में है। हालांकि, गिरोह का सरगना लॉरेंस बिश्नोई खुद गुजरात की अहमदाबाद स्थित साबरमती सेंट्रल जेल की हाई-सिक्योरिटी बैरक में बंद है, लेकिन इसके बावजूद उसका नेटवर्क न केवल सक्रिय है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार से संचालित हो रहा है। रविवार को मुंबई में हुई इस गोलीबारी की जिम्मेदारी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ली गई। इस हमले को अंजाम देने वाले गिरोह के दो कथित सदस्यों में अमेरिका में बैठा अनिल पंडित प्रमुख है, जिसने सार्वजनिक रूप से अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले की जिम्मेदारी ली है।

अनिल पंडित और गिरोह का विदेशी कनेक्शन

खुफिया अधिकारियों का मानना है कि सोशल मीडिया पर अनिल पंडित द्वारा किया गया दावा विश्वसनीय है। अनिल पंडित हरियाणा के पानीपत जिले के रैर कलां गांव का निवासी है और उसकी उम्र 32 वर्ष है। वह साल 2023 में भारत से फरार हो गया था और थाईलैंड व कनाडा के रास्ते अमेरिका तक पहुंचने में सफल रहा। भारतीय जांच एजेंसियों के अनुसार, पंडित वर्तमान में कैलिफोर्निया से अपना नेटवर्क चला रहा है और वह सतविंदर सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ के सीधे संपर्क में है। गौरतलब है कि गोल्डी बराड़ पहले से ही फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) की वांटेड लिस्ट में शामिल है। जांचकर्ताओं का यह भी कहना है कि टाइगर श्रॉफ पर हमले की जिम्मेदारी लेकर पंडित ने शायद ध्यान भटकाने की कोशिश की है ताकि मुख्य सहयोगियों पर से FBI का दबाव कम हो सके।

लॉरेंस बिश्नोई ऑर्गेनाइज्ड क्राइम ग्रुप (OCG) का जाल

FBI ने इस गिरोह को आधिकारिक तौर पर 'लॉरेंस बिश्नोई ऑर्गेनाइज्ड क्राइम ग्रुप' (OCG) का दर्जा दिया है। यह गिरोह केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में बैठे अपने हैंडलर्स के माध्यम से स्थानीय शूटर्स की भर्ती करता है और उन्हें अत्याधुनिक विदेशी हथियार उपलब्ध कराता है। इस गिरोह का तरीका बेहद व्यवस्थित है: यह पहले हाई-प्रोफाइल हस्तियों, गायकों और सफल व्यापारियों को धमकी देता है और फिर उनसे बड़ी रकम वसूलता है। टाइगर श्रॉफ से पहले, यह गिरोह सलमान खान, रणवीर सिंह, आमिर खान और निर्देशक रोहित शेट्टी को भी निशाना बना चुका है। मई 2022 में पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या और अक्टूबर 2024 में महाराष्ट्र के नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या को भी इसी गैंग की साजिश माना जाता है।

हथियार, तकनीक और संचार के तरीके

जांच में खुलासा हुआ है कि बिश्नोई गैंग अपने शूटर्स से संपर्क करने और विदेशों से हथियार मंगवाने के लिए 'सिग्नल' जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप का सहारा लेता है। अनिल पंडित के पिछले ट्रैक रिकॉर्ड को देखें तो पता चलता है कि वह इस साल कई वारदातों में शामिल रहा है। इसमें पश्चिमी दिल्ली में गायक गुरु रंधावा से जुड़े एक जिम मालिक पर गोलीबारी, पुणे के एक ज्वेलरी शोरूम में फायरिंग, और भिवाड़ी व सोनीपत में हुए हमले शामिल हैं। इन सभी घटनाओं की जांच दिल्ली और हरियाणा पुलिस मिलकर कर रही है।

हरमन संधू की भूमिका और FBI का शिकंजा

इस पूरे मामले में हरमनवीर सिंह उर्फ हरमन संधू का नाम भी एक प्रमुख संदिग्ध के तौर पर उभरा है। संधू को जून में FBI की वांटेड सूची में डाला गया था और जुलाई में उसे कैलिफोर्निया में हिरासत में लिया गया। 23 जून को लॉस एंजिल्स की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने संधू के खिलाफ वारंट जारी किया था, जिसमें उस पर प्रतिबंधित पदार्थों की तस्करी और निर्यात की साजिश रचने का आरोप था। जांचकर्ताओं के अनुसार, संधू बिश्नोई गैंग के रविंदर ढांडा नेटवर्क का हिस्सा है और टारगेट की पहचान करने व हथियारों की सप्लाई सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।

ऑपरेशन हार्ड बॉल और वैश्विक कानून प्रवर्तन

जुलाई में अमेरिकी अधिकारियों ने 'ऑपरेशन हार्ड बॉल' का ऐलान किया था। यह अमेरिका, कनाडा और यूरोप की सुरक्षा एजेंसियों का एक संयुक्त अभियान था, जिसमें भारत के 37 गैंगस्टरों के खिलाफ तीन संघीय अभियोग दायर किए गए और 24 को गिरफ्तार किया गया। ये सभी गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई, जग्गू भगवानपुरिया और रविंदर सिंह ढांडा के नेटवर्क से जुड़े थे। अमेरिकी अभियोजकों ने स्पष्ट किया है कि लॉरेंस बिश्नोई जेल के अंदर से प्रतिबंधित मोबाइल फोन और वॉयस-ओवर-इंटरनेट-प्रोटोकॉल (VoIP) उपकरणों का उपयोग करके अपना साम्राज्य चला रहा है। इसके जरिए टारगेट किलिंग, नशीले पदार्थों की तस्करी और जबरन वसूली जैसे अपराधों को नियंत्रित किया जा रहा है।

खौफ का मनोविज्ञान और डी-कंपनी से तुलना

इस गैंग का प्राथमिक उद्देश्य केवल पैसा कमाना नहीं, बल्कि लोगों के मन में डर का माहौल पैदा करना है। गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा जैसे सीनियर लेफ्टिनेंट इस गिरोह के संचालन में मुख्य भूमिका निभाते हैं। FBI की रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि बिश्नोई गैंग ने ही जून 2023 में सरे, ब्रिटिश कोलंबिया में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की साजिश रची थी। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने मार्च 2023 की अपनी चार्जशीट में इस गिरोह की तुलना 1990 के दशक की दाऊद इब्राहिम की 'डी-कंपनी' से की है। 2015 के बरगारी आंदोलन और 2016 की नाभा जेल ब्रेक की घटनाओं ने बिश्नोई गैंग को खालिस्तान-समर्थक तत्वों के करीब ला दिया, जिससे उन्हें आधुनिक हथियारों और फंडिंग का बड़ा आधार मिला। आज यह सिंडिकेट पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में फैला हुआ है।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती

पुलिस के लिए यह गैंग इसलिए बड़ी चुनौती बना हुआ है क्योंकि इनके हैंडलर विदेश में छिपे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर हमला करने वाले ज्यादातर बेरोजगार युवा होते हैं। ये युवा ऑनलाइन माध्यम से भर्ती किए जाते हैं और उन्हें अपने हैंडलर की असल लोकेशन का पता नहीं होता। संचार की कड़ियों को जोड़ना और विदेशों में बैठे अपराधियों तक पहुंच बनाना भारतीय एजेंसियों के लिए एक पेचीदा काम बन गया है। जब तक विदेशों में बैठे इन हैंडलर्स को पकड़ा नहीं जाता, तब तक स्थानीय शूटर्स के जरिए होने वाली हिंसा को पूरी तरह रोकना असंभव सा प्रतीत होता है।

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