शिशुओं के आहार में चीनी पर लगाम: FSSAI का बड़ा फैसला, 6 महीने तक के बच्चों के फूड में एडेड शुगर प्रतिबंधित

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने शिशुओं के लिए तैयार होने वाले आहार में सुक्रोज और फ्रुक्टोज जैसी अतिरिक्त चीनी पर रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है। यह कदम बच्चों के शुरुआती स्वास्थ्य और पोषण को सुरक्षित बनाने की दिशा में उठाया गया है।

नवजात शिशुओं के पोषण को लेकर FSSAI की नई पहल

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने शिशुओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। नियामक संस्था ने छह महीने तक की आयु के शिशुओं के लिए बाजार में उपलब्ध पोषण उत्पादों में सुक्रोज और फ्रुक्टोज जैसी एडेड शुगर मिलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पेश किया है। इस कदम का सीधा लक्ष्य शिशुओं को उनके जीवन के शुरुआती महीनों में ही कृत्रिम मिठास और अतिरिक्त शर्करा के सेवन से बचाना है। यह प्रस्तावित बदलाव 'खाद्य सुरक्षा और मानक (शिशु पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) संशोधन विनियम, 2026' के मसौदे का एक प्रमुख हिस्सा है, जिसे आधिकारिक तौर पर 16 अक्टूबर को भारत के गजट में अधिसूचित किया गया था।

नियामक ढांचे को मजबूत करने की कवायद

इस संशोधन के जरिए FSSAI मौजूदा नियमों को अधिक सख्त और स्पष्ट बनाने का प्रयास कर रहा है। इसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि शिशुओं के लिए बनाए जाने वाले हर पोषण उत्पाद में उनकी उम्र के अनुसार सटीक और अनिवार्य पोषक तत्व मौजूद हों। विशेष रूप से जीवन के पहले छह महीनों के दौरान, जब बच्चे का विकास बहुत तेजी से हो रहा होता है, पोषण की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जा सकता है। वर्ष 2020 के 'खाद्य सुरक्षा और मानक (शिशु पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) विनियम' के तहत जन्म से लेकर 24 महीने तक के बच्चों के आहार के लिए पहले से ही गुणवत्ता, सुरक्षा और संरचना के मानक निर्धारित किए गए हैं, जिन्हें अब और अधिक दुरुस्त किया जा रहा है।

6 महीने तक के बच्चों के भोजन पर विशेष नियम

वर्तमान नियमों के अनुसार, शिशुओं के भोजन में लैक्टोज और ग्लूकोज पॉलिमर को कार्बोहाइड्रेट के प्राथमिक और सुरक्षित स्रोत के रूप में देखा जाता है। हालांकि, मौजूदा व्यवस्था में एक निश्चित सीमा तक सुक्रोज और फ्रुक्टोज को भी कार्बोहाइड्रेट के स्रोत के रूप में मिलाने की छूट दी गई थी। प्रस्तावित नए संशोधनों में इस छूट को खत्म कर दिया गया है। अब छह महीने तक की उम्र के बच्चों के लिए तैयार होने वाले किसी भी उत्पाद में इन शर्कराओं का उपयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित होगा।

स्वास्थ्य संबंधी खतरों से बचाव का प्रयास

FSSAI का मानना है कि जीवन के शुरुआती छह महीने शिशु की शारीरिक और मानसिक वृद्धि के लिए अत्यंत नाजुक होते हैं। इस दौरान केवल मां का दूध या सुरक्षित पोषक आहार ही मिलना चाहिए। बिना किसी अनावश्यक अतिरिक्त शर्करा के उत्पादों को तैयार करने से बचपन के मोटापे और उससे जुड़ी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम किया जा सकेगा। यह निर्णय सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी उन वैश्विक सिफारिशों के अनुकूल है, जो जन्म के शुरुआती छह महीनों में केवल स्तनपान की सलाह देती हैं। इस नीति का उद्देश्य निर्माताओं को ऐसे फॉर्मूलेशन बनाने के लिए बाध्य करना है, जिनमें बच्चों की पोषण संबंधी जरूरतों को सर्वोपरि रखा जाए।

जनता और विशेषज्ञों से मांगे गए सुझाव

FSSAI ने इस मसौदा अधिसूचना को व्यापक सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी कर दिया है। इस नियम को कानूनी रूप देने से पहले खाद्य नियामक ने सभी संबंधित हितधारकों, विशेषज्ञों और आम जनता को अपनी राय रखने का मौका दिया है। अधिसूचना जारी होने की तारीख से 60 दिनों के भीतर कोई भी व्यक्ति या संस्था अपनी आपत्तियां या सुझाव विभाग को भेज सकती है। इन 60 दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद, प्राप्त सभी सुझावों का वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विश्लेषण किया जाएगा और उसके बाद ही इस संशोधन को अंतिम रूप देकर लागू किया जाएगा।

https://www.indiatv.in/health/fssai-takes-a-strict-stance-on-food-for-infants-up-to-six-months-old-proposes-a-ban-on-the-addition-of-sugar-and-fructose-to-nutritional-products-2026-10-17-1249392